रूस और उत्तर कोरिया ने एक नाटो जैसी संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत एक देश पर हमला होने पर दूसरा देश तुरंत सैन्य मदद करेगा। इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किम जोंग उन के साथ एक ऐतिहासिक सैन्य समझौता किया।
- समझौते के तहत एक देश पर हमला होने पर दूसरा देश तुरंत सैन्य मदद देगा।
- प्योंगयांग में आयोजित शिखर सम्मेलन में इस व्यापक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
- अनुच्छेद 4 में प्रावधान है कि युद्ध की स्थिति में तुरंत सैन्य और अन्य मदद मिलेगी।
- यह समझौता शीत युद्ध समाप्ति के बाद रूस और उत्तर कोरिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण समझौता है।
- समझौता सुरक्षा, व्यापार, निवेश, संस्कृति और मानवीय मदद जैसे पहलुओं को कवर करेगा।
- अमेरिका ने उत्तर कोरिया द्वारा रूस को हथियार और गोला बारूद देने पर गहरी चिंता जताई है।
- अमेरिका को डर है कि रूस की मदद से उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को तेजी से बढ़ा सकता है।
- 1961 में सोवियत संघ और उत्तर कोरिया के बीच भी ऐसा ही एक समझौता हुआ था।
- दक्षिण कोरिया ने इस समझौते के प्रावधानों की व्याख्या करने की बात कही है और तत्काल टिप्पणी करने से इनकार किया है।








