Himachal Newborn Kidnapping Case हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बड्डी क्षेत्र में एक नवजात बच्चे के अपहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 13 जनवरी को चोरी हुए बच्चे को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर 16 जनवरी को उसके जैविक माता-पिता को सौंप दिया। इस मामले में उत्तर प्रदेश के एक दंपति को गिरफ्तार किया गया है।

बड्डी पुलिस ने नवजात अपहरण के इस मामले में तेज़ कार्रवाई करते हुए भरोसे को तोड़ने वाले रिश्ते की परतें खोली हैं। आरोपी और पीड़ित दोनों परिवार एक ही इमारत में किराएदार के तौर पर रह रहे थे और एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे।
कहाँ और कैसे हुआ नवजात का अपहरण
यह मामला सोलन जिले के औद्योगिक कस्बे बड्डी के पास स्थित बिलानवाली गांव का है। यहां रहने वाले प्रवासी मजदूर परिवार की महिला मुनीता ने 9 जनवरी को रास्ते में एंबुलेंस में ही एक बच्चे को जन्म दिया था। उस समय पड़ोस में रहने वाली रेखा उसके साथ मौजूद थी।
लिखित समझौते से शुरू हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार, मुनीता और उसके पति जतिंदर की पहले से तीन बेटियां थीं। जब मुनीता गर्भवती हुई, तो उन्होंने कथित तौर पर रेखा और उसके पति रोहित से लिखित समझौता किया था कि वे अपना चौथा बच्चा उन्हें दे देंगे। लेकिन बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता ने यह फैसला बदल लिया।
13 जनवरी को चोरी, 14 को FIR
समझौता टूटने के बाद 13 जनवरी को आरोपी दंपति ने मौका पाकर नवजात को मुनीता के कमरे से चुरा लिया और फरार हो गए। अगले दिन महिला ने बड्डी के महिला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
कानूनी धाराओं में दर्ज हुआ मामला
इस मामले में Baddi Police ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 137(2) के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया। इसके बाद एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसकी निगरानी सहायक उप निरीक्षक लखबीर सिंह कर रहे थे।
तकनीकी निगरानी से आरोपी पकड़े गए
पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रहने वाले रोहित (25) और उसकी पत्नी रेखा (23) को 15 जनवरी को हिरासत में लिया। दोनों दंपति निःसंतान बताए जा रहे हैं।
16 जनवरी को बच्चे की सुरक्षित वापसी
पुलिस ने नवजात को पूरी तरह सुरक्षित हालत में बरामद किया और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 16 जनवरी को बच्चे को उसके जैविक माता-पिता को सौंप दिया।
पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले पर Ashok Kumar, सहायक पुलिस अधीक्षक, बड्डी ने बताया कि दोनों परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे और मामला आपसी विश्वास से जुड़ा था, जो बाद में अपराध में बदल गया।
सजा और कानूनी प्रक्रिया
धारा 137(2) BNS के तहत यह अपराध सात साल से कम सजा वाला है। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं होती और कानूनी नोटिस देकर भी आरोपियों को छोड़ा जा सकता है। फिलहाल मामले की आगे जांच जारी है।
आम लोगों पर असर
यह घटना दिखाती है कि आपसी भरोसे और गैरकानूनी समझौतों के चलते किस तरह नवजात जैसे संवेदनशील मामले अपराध का रूप ले सकते हैं। पुलिस की तेज़ कार्रवाई से बच्चे की जान सुरक्षित रही, लेकिन यह समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।
विश्लेषण
यह केस केवल एक अपहरण का मामला नहीं है, बल्कि यह बताता है कि आर्थिक-सामाजिक दबाव में किए गए निजी समझौते कैसे कानून से टकरा जाते हैं। हिमाचल पुलिस की तत्परता ने जहां एक परिवार को राहत दी, वहीं ऐसे मामलों में सख्त निगरानी और जागरूकता की जरूरत भी उजागर की।
जानें पूरा मामला
बिलानवाली गांव में रहने वाले दो प्रवासी परिवारों के बीच नवजात को देने के कथित समझौते से शुरू हुआ विवाद 13 जनवरी को अपहरण में बदल गया। पुलिस ने 15 जनवरी को आरोपियों को पकड़ा और 16 जनवरी को बच्चे को सुरक्षित माता-पिता के पास पहुंचाया।
मुख्य बातें (Key Points)
- बड्डी में नवजात बच्चे का अपहरण
- पड़ोसी दंपति आरोपी, दोनों प्रवासी मजदूर
- 13 जनवरी को चोरी, 16 जनवरी को सुरक्षित वापसी
- BNS धारा 137(2) के तहत FIR
- मामले की जांच जारी








