पंजाब कांग्रेस की कलह से हाईकमान बैचेन: अगले 3 दिन में बड़ा फ़ैसला, चौधरी ने ली ज़िम्मेदारी


चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू के ताबड़तोड़ हमलों से कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। सिद्धू ने सोमवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फिर चन्नी सरकार पर निशाना साधा। इसके बाद राजभवन के गेस्ट हाउस में सीएम चरणजीत चन्नी और सिद्धू के बीच मीटिंग हुई। इसमें पंजाब कांग्रेस इंचार्ज हरीश चौधरी भी मौजूद रहे। मीटिंग के बाद तय हुआ कि अगले 2-3 दिनों में सिद्धू और चन्नी के बीच मतभेद के कारणों को ख़त्म कर दिया जाएगा। चौधरी ने ख़ुद इसकी ज़िम्मेदारी ली। मीटिंग में सिद्धू के क़रीबी मंत्री परगट सिंह भी मौजूद रहे।

मीटिंग के बाद बाहर आए मंत्री राजकुमार वेरका ने कहा कि कांग्रेस में सब ठीक है। कुछ मुद्दों पर बातचीत हुई है, जिन पर फ़ैसला कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर बेअदबी और ड्रग्स केस में कोई अफ़सर कार्रवाई में रुकावट बनता है तो सरकार उसे हटा भी सकती है। उन्होंने कहा कि हरीश चौधरी अब पूरे मुद्दे को ख़ुद देख रहे हैं। इसलिए जल्द ही इसका हल निकल आएगा। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि सिद्धू डीजीपी और एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग कर रहे हैं।

सिद्धू ने कहा, चन्नी को हाईकमान ने CM लगाया

नवजोत सिद्धू और CM चरणजीत चन्नी में सब कुछ ठीक नहीं है। इसका इशारा सोमवार को सिद्धू की कॉन्फ्रेंस में भी मिला। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ही चन्नी को CM बनवाया तो सिद्धू बिफर गए। उन्होंने इससे साफ़ इनकार कर दिया कि उनकी चन्नी को सीएम बनाने में कोई भूमिका नहीं है। चन्नी को सीएम हाईकमान ने बनाया है।

सिद्धू दे चुके सीधी चेतावनी, अफ़सरों या पंजाब प्रधान में से किसी एक को चुन लो

सिद्धू ने सोमवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर संकेत दिए कि पंजाब की सरकार को डीजीपी और एजी या उनमें से किसी एक को चुनना होगा। सिद्धू ने पहले भी इन्हीं नियुक्तियों को लेकर इस्तीफ़ा दिया था। सिद्धू के रवैए से लग रहा है कि वे फिर कहीं नाराज़ होकर इस्तीफ़ा न दे दें। इसलिए हरीश चौधरी मतभेद मिटाने में जुटे हैं।

चुनाव में कांग्रेस के लिए बढ़ी परेशानी

नवजोत सिद्धू ने पंजाब में 80 से 100 सीटों पर जीत का दावा किया है, लेकिन पार्टी के लिए उनका रवैया मुश्किलें खड़ी कर रहा है। सिद्धू ने प्रधान बनने के बाद क़रीब साढ़े 3 महीने बाद भी संगठन नहीं बनाया है। कांग्रेस भवन भी नहीं जा रहे हैं। इसके अलावा ज़मीनी स्तर पर कांग्रेस वर्करों को भी प्रचार या पार्टी को मज़बूत करने के लिए कोई संदेश नहीं दिया गया है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी की चिंता बढ़ी हुई है। सरकार और पार्टी में भी अंदर खाते इस बात को लेकर चिंता का माहौल है।


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