Hazaribagh Jail Break News. झारखंड के Hazaribagh जिले में स्थित अति-सुरक्षित मानी जाने वाली लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (JP Central Jail) की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। 31 दिसंबर की रात, जब पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी, तब इस हाई सिक्योरिटी जेल से तीन खतरनाक सजायाफ्ता कैदी फिल्मी अंदाज में फरार हो गए।
नए साल की रात सुरक्षा में बड़ी सेंध
यह घटना 31 दिसंबर की रात की है। सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, रात 1:36 बजे से 2:45 बजे के बीच कैदियों ने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया। फरार होने वाले कैदियों में दो पोक्सो (POCSO) एक्ट और एक गैंगरेप का दोषी शामिल है।
इन शातिर अपराधियों ने भागने के लिए बेहद योजनाबद्ध तरीका अपनाया। उन्होंने काफी समय पहले से धीरे-धीरे अपनी सेल की खिड़की की लोहे की रॉड को काटना शुरू कर दिया था। मौका मिलते ही उन्होंने रॉड हटाई और बाहर निकल गए।
17 फीट ऊंची दीवार और ‘टेंट वाली रस्सी’
हैरानी की बात यह है कि जेल से भागने के लिए कैदियों ने जिस रस्सी का इस्तेमाल किया, वह किसी टेंट हाउस की बताई जा रही है। सवाल यह उठता है कि जेल के अंदर यह रस्सी पहुंची कैसे? कैदियों ने इसी रस्सी के सहारे जेल की 17 फीट ऊंची बाहरी दीवार को फांद लिया और अंधेरे का फायदा उठाकर गायब हो गए।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड ‘देवा भुइयां’ (Deva Bhuiyan) बताया जा रहा है। देवा का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह पहले भी जेल ब्रेक (Jail Break) की घटना को अंजाम दे चुका है। माना जा रहा है कि उसी ने बाकी दो साथियों को भी भगाने में मदद की।
पुलिस का एक्शन: SIT गठित, छापेमारी शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग के एसपी Anjani Anjan ने तुरंत कार्रवाई की है। लापरवाही बरतने के आरोप में दो हेड वार्डन को सस्पेंड कर दिया गया है।
फरार कैदियों को पकड़ने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें दो डीएसपी और दो इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल हैं। चूंकि ये तीनों कैदी धनबाद के अलग-अलग कांडों में सजा काट रहे थे, इसलिए धनबाद, रांची और बिहार के कई संभावित ठिकानों पर पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। तकनीकी अनुसंधान (Technical Surveillance) का भी सहारा लिया जा रहा है।
संपादकीय विश्लेषण: 5 लेयर सुरक्षा पर सवालिया निशान
Loknayak Jayaprakash Narayan Central Jail को राज्य की सबसे सुरक्षित जेलों में गिना जाता है, जहां 5 लेयर की सुरक्षा व्यवस्था होने का दावा किया जाता है। यहाँ नक्सली और हाई-प्रोफाइल कैदी बंद रहते हैं। ऐसे में लोहे की रॉड का धीरे-धीरे कटना और किसी को कानों-कान खबर न होना, जेल के अंदरूनी मिलीभगत या घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है। टेंट की रस्सी का अंदर पहुंचना यह साबित करता है कि जेल की सुरक्षा दीवारें भले ही ऊंची हों, लेकिन निगरानी तंत्र बेहद बौना साबित हुआ है।
जानें पूरा मामला
हजारीबाग सेंट्रल जेल से तीन कैदी (देवा भुइयां और दो अन्य) 31 दिसंबर की रात फरार हो गए। लोहसिंघना थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज की गई है। ये कैदी धनबाद कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद यहां शिफ्ट किए गए थे। फिलहाल पुलिस के हाथ खाली हैं, लेकिन तलाश युद्धस्तर पर जारी है।
मुख्य बातें (Key Points)
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Hazaribagh सेंट्रल जेल से 31 दिसंबर की रात 3 सजायाफ्ता कैदी फरार।
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कैदियों ने खिड़की की रॉड काटी और टेंट की रस्सी से 17 फीट ऊंची दीवार फांदी।
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मास्टरमाइंड देवा भुइयां पहले भी जेल से भाग चुका है।
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एसपी ने SIT गठित की, दो हेड वार्डन सस्पेंड, बिहार-झारखंड में छापेमारी जारी।








