Hardeep Puri Epstein Case में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मुश्किलें अब दोगुनी हो गई हैं। विपक्ष के लगातार हमलों से पहले से ही घिरी बीजेपी सरकार को अब अपनी ही पार्टी के भीतर से बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सीनियर नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने खुलेआम मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हरदीप पुरी को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश देना चाहिए। स्वामी ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे और बीजेपी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीट: पार्टी के अंदर से उठी विद्रोह की आवाज़
Hardeep Puri Epstein Case में अब तक विपक्ष ही हमलावर था, लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी के ट्वीट ने पूरी सियासी तस्वीर बदल दी है। स्वामी ने अपने ट्वीट में साफ शब्दों में दो बातें कही हैं। पहली: प्रधानमंत्री मोदी को हरदीप पुरी को तुरंत मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला (क्रिमिनल केस) दर्ज कराने का आदेश देना चाहिए। दूसरी: अगर पार्टी ने कार्रवाई नहीं की तो वह हरदीप पुरी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
सुब्रमण्यम स्वामी अपने तीखे बयानों और कानूनी लड़ाइयों के लिए जाने जाते हैं। वह पहले भी कई बार अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं। लेकिन इस बार उनकी मांग का वजन इसलिए ज्यादा है क्योंकि जेफरी एपस्टीन मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील है और भारतीय राजनीति में इसकी गूंज लगातार बढ़ती जा रही है।
हरदीप पुरी ने खुद कबूली एपस्टीन से मुलाकात: 3-4 बार मिले थे
Hardeep Puri Epstein Case इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की बात स्वीकार कर ली है। पुरी ने कहा था कि वह IPI (इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट) के प्रतिनिधि के रूप में 2013-14 के दौरान तीन से चार बार जेफरी एपस्टीन से मिले थे।
हालांकि पुरी ने इन मुलाकातों को पेशेवर (प्रोफेशनल) बताया है, लेकिन विपक्ष ने इसे हथियार बना लिया है। एपस्टीन पर यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे थे और उनकी जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। एपस्टीन फाइल्स सार्वजनिक होने के बाद दुनिया भर की कई हस्तियों के नाम सामने आए और हरदीप पुरी का नाम भी उनमें शामिल रहा। अब सवाल यह उठ रहा है कि एक भारतीय मंत्री का एपस्टीन जैसे विवादित शख्स से बार-बार मिलना कितना सामान्य माना जा सकता है।
संसद में गूंजे ‘एपस्टीन का दोस्त आया’ के नारे
Hardeep Puri Epstein Case की गर्मी संसद तक पहुंच चुकी है। हाल ही में जब हरदीप पुरी संसद में बोलने के लिए खड़े हुए, तब विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। “देखो देखो कौन आया, एपस्टीन का दोस्त आया” के नारे पूरे सदन में गूंजे। इस नारेबाजी ने न सिर्फ हरदीप पुरी को असहज किया, बल्कि पूरी बीजेपी को रक्षात्मक मुद्रा (डिफेंसिव मोड) में ला दिया।
विपक्ष लगातार सवालों की बौछार कर रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मांग है कि हरदीप पुरी को मंत्रिमंडल से तुरंत हटाया जाए और एपस्टीन से उनकी मुलाकातों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार पारदर्शिता की बात करती है तो उसे इस मामले में भी खुली जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए।
बीजेपी के लिए दोहरा संकट: बाहर विपक्ष, अंदर स्वामी
Hardeep Puri Epstein Case ने बीजेपी के सामने एक दोहरा संकट खड़ा कर दिया है। एक तरफ विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, दूसरी तरफ अब पार्टी के अंदर से ही सुब्रमण्यम स्वामी जैसे दिग्गज नेता ने बर्खास्तगी और आपराधिक कार्रवाई की मांग कर दी है।
सियासी गलियारों में इस घटनाक्रम ने पारा काफी ऊंचा कर दिया है। सरकार अभी तक विपक्ष के हमलों को राजनीति से प्रेरित बताकर टालती आ रही थी, लेकिन जब यही मांग अपनी ही पार्टी के सीनियर नेता से आई तो स्थिति बिल्कुल अलग हो गई है। स्वामी ने सीधे तौर पर कहा है कि अगर बीजेपी ने कार्रवाई नहीं की तो पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होने वाला है और बीजेपी चुनावी मोड में है।
क्या मोदी सरकार लेगी कोई कड़ा कदम?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि Hardeep Puri Epstein Case में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी नेतृत्व क्या कदम उठाता है। सुब्रमण्यम स्वामी ने दो रास्ते रख दिए हैं: या तो सरकार खुद कार्रवाई करे, या फिर वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। स्वामी का कोर्ट जाने का ट्रैक रिकॉर्ड सबको पता है। वह 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, नेशनल हेराल्ड केस जैसे कई बड़े मामलों में कोर्ट गए हैं और परिणाम भी लाए हैं।
अगर स्वामी सच में सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर करते हैं तो यह मामला कानूनी रूप से बेहद जटिल हो जाएगा और बीजेपी के लिए चुनावी मौसम में एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है। दूसरी तरफ अगर मोदी सरकार पुरी के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो यह माना जाएगा कि सरकार ने एपस्टीन कनेक्शन की गंभीरता को स्वीकार किया। दोनों ही स्थितियों में बीजेपी के लिए चुनौती बड़ी है।
एपस्टीन मामला भारतीय राजनीति को कहां तक ले जाएगा
Hardeep Puri Epstein Case की जड़ें अंतरराष्ट्रीय हैं, लेकिन इसकी शाखाएं अब भारतीय राजनीति में गहराई तक फैल चुकी हैं। जेफरी एपस्टीन की फाइल्स सार्वजनिक होने के बाद दुनिया भर में कई बड़े नाम बेनकाब हुए। अमेरिका में तो इसने कई राजनेताओं, व्यापारियों और सेलिब्रिटीज का करियर तबाह कर दिया। भारत में अभी तक यह मामला विपक्षी हमले तक सीमित था, लेकिन अब पार्टी के अंदर से ही आग लगने से यह स्पष्ट हो गया है कि इस मुद्दे को दबाना आसान नहीं होगा।
जिस तरह से विपक्ष, मीडिया और अब बीजेपी के अपने ही नेता हरदीप पुरी पर सवाल उठा रहे हैं, उससे लगता है कि यह मामला और तूल पकड़ेगा। चुनावी माहौल में ऐसे विवाद किसी भी पार्टी के लिए भारी पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि मोदी सरकार इस दबाव के आगे झुकती है या फिर पुरी का बचाव करती रहती है। और अगर स्वामी ने सच में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, कानूनी लड़ाई में भी बदल जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- Hardeep Puri Epstein Case में सुब्रमण्यम स्वामी ने PM मोदी से पुरी को तुरंत बर्खास्त करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की मांग की।
- स्वामी ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर करेंगे और बीजेपी को भारी राजनीतिक नुकसान होगा।
- हरदीप पुरी ने खुद स्वीकार किया है कि वह 2013-14 में IPI के प्रतिनिधि के रूप में 3-4 बार जेफरी एपस्टीन से मिले थे।
- संसद में विपक्षी सांसदों ने “एपस्टीन का दोस्त आया” के नारे लगाए, बीजेपी अब विपक्ष और अपनी ही पार्टी दोनों तरफ से घिरी।








