Gold Silver Price Today: भारत में सोने और चांदी के भाव इन दिनों आसमान छू रहे हैं। 21 जनवरी को 10 ग्राम सोना एक ही दिन में ₹7,795 उछलकर ₹1,52,000 से ऊपर पहुंच गया, जबकि 1 किलो चांदी ₹3,35,000 तक जा पहुंची। लेकिन अगले ही दिन 22 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर ETF में करीब 21% की गिरावट दर्ज हुई और भाव नीचे आ गए। यह उतार-चढ़ाव सामान्य नहीं है क्योंकि एक तरफ लोग सोना खरीदने की होड़ में हैं तो दूसरी तरफ गोल्ड लोन में 125% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब साफ है कि लोग सोना गिरवी भी रख रहे हैं और खरीद भी रहे हैं, जो बताता है कि बाजार में कुछ बड़ा खेल चल रहा है।
एक दिन में ₹10,000 तक का उछाल और गिरावट
जनवरी के पहले 20 दिनों में ही सोने के भाव में ₹2,000 से अधिक का उछाल आया और चांदी की बात करें तो 20 दिनों में ₹89,665 का उछाल दर्ज हुआ। 21 जनवरी को 1 किलो चांदी ₹3,35,000 से अधिक थी, लेकिन 22 जनवरी को यही चांदी ₹3,38,000 पर बिकी जिसमें दो दिनों में करीब ₹3,000 की गिरावट दिखी। अगर एक दिन में सोने का भाव ₹4,000 से लेकर ₹10,000 तक ऊपर या नीचे हो सकता है, तो इसका मतलब है कि बाजार में कुछ भी हो सकता है और आम निवेशकों को इस अस्थिरता से सावधान रहना चाहिए।
क्या Donald Trump के भरोसे है सोने-चांदी का भाव?
बाजार में इन दिनों एक अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है जहां जब ट्रंप कहते हैं कि ग्रीनलैंड के कारण यूरोप पर टैरिफ लगाएंगे तो सोने-चांदी के भाव में उछाल आ जाता है और जब ट्रंप टैरिफ लगाने की बात से पीछे हट जाते हैं तो भाव गिरने लगते हैं। इसी तरह जब भारत से डील होने की बात करते हैं तो दामों में सुधार बताया जाता है। अगर ऐसा है तो अगले 3 साल में ट्रंप क्या-क्या गुल खिलाएंगे कोई नहीं बता सकता और यही अनिश्चितता आम निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
केंद्रीय बैंकों की सोना खरीदारी ने बदला खेल
कई देशों के केंद्रीय बैंक इन दिनों सोना खरीदने में जुटे हैं जिसने पूरे बाजार का समीकरण बदल दिया है। पिछले साल नवंबर में चीन का केंद्रीय बैंक लगातार 12वें महीने भी सोना खरीदता रहा और चीन के पास आधिकारिक रूप से सोने का भंडार 2,036 टन हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी 2024 में खूब सोना खरीदा हालांकि पिछले 8 महीनों से खरीदारी कम कर दी है। इसके बावजूद RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में सोने का हिस्सा 10% से बढ़कर 16% हो गया है और रिजर्व बैंक के पास अब 880.2 टन सोने का भंडार मौजूद है।
सटोरियों का खेल और आम आदमी की भगदड़
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से दाम बढ़ना स्वाभाविक था लेकिन इसमें कूद गए दूसरे निवेशक और शायद सटोरिए जिससे दाम और तेजी से बढ़े। इसके बाद शुरू हो गई भगदड़ कि हम भी खरीदेंगे और हम कहीं पीछे न रह जाएं। इस भ्रम में मत रहिए कि अक्षय तृतीया या शादी-ब्याह के कारण सोने-चांदी के दाम बढ़ रहे हैं क्योंकि दाम इन दिनों बढ़ते जरूर हैं लेकिन इस तरह से कभी नहीं। एक थ्योरी यह भी है कि बड़े बैंक और निवेशक अपने डॉलर को निकालकर सोना-चांदी खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें मुद्राओं का भविष्य कमजोर दिखता है।
राजकोट के 44 कारोबारी हुए दिवालिया, ₹3,500 करोड़ का कर्जा
31 दिसंबर 2025 की एक खबर के अनुसार राजकोट, गुजरात के 44 व्यापारी दिवालिया हो गए और उन पर ₹3,500 करोड़ का कर्जा हो गया। ये व्यापारी शॉर्ट सेलिंग कर रहे थे यानी बाजार से चांदी लेकर इस उम्मीद में बेच रहे थे कि बाद में कम दाम पर खरीद लेंगे। उन्हें भरोसा था कि कीमत ₹1.5 लाख की सीमा को पार नहीं करेगी लेकिन जैसे ही चांदी ₹1.5 लाख से महंगी हुई तो वित्तीय बोझ बहुत ज्यादा हो गया और उन्हें खुद को दिवालिया घोषित करना पड़ा। वायदा बाजार में चांदी की कीमत बेहद अस्थिर है जहां अचानक ₹14,000 से अधिक गिर गई और 3 दिन के भीतर ₹22,000 से अधिक की गिरावट आ गई।
रुपए की कमजोरी और सोने के आयात का दबाव
भारत सोने का आयात करता है और अगर ज्यादा खरीदेंगे तो ज्यादा आयात करना होगा जिससे रुपए पर जोर पड़ रहा है। सोने और चांदी का आयात 12% तक बढ़ा है और इससे रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। आज $1 का भाव ₹91 के आसपास मंडरा रहा है जो चिंता का विषय है। एक विरोधाभास देखिए कि जिस देश का रुपया दिन-रात कमजोर हो रहा है उस देश में सोने-चांदी का भाव आसमान छू रहा है जो दर्शाता है कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है।
सोने-चांदी का ऐतिहासिक पतन: हंट ब्रदर्स की चेतावनी भरी कहानी
ऐतिहासिक रूप से देखें तो चांदी का भाव 90% तक भी गिरा है और 1979 में अमेरिका में हंट ब्रदर्स की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। तीन भाइयों ने खूब सारी चांदी खरीदकर जमा करना शुरू किया और कम समय में इन तीनों भाइयों ने 100 मिलियन आउंस चांदी जमा कर ली जिससे इनके पास दुनिया में चांदी की सप्लाई का 33% हिस्सा आ गया। बाजार में चांदी की कमी होने से एक साल में 1 आउंस चांदी का दाम $6 से $49.45 तक पहुंच गया। लेकिन फिर सरकार ने निगरानी बढ़ाई और चांदी में ट्रेडिंग सस्पेंड कर दी जिसके बाद 27 मार्च 1980 को चांदी का मार्केट गिर गया और 1 दिन में भाव $10.80 पर आ गया जो तब तक की सबसे बड़ी गिरावट थी। हंट भाइयों को 1.7 अरब डॉलर का घाटा हुआ और वे उस समय के वित्तीय इतिहास के सबसे बड़े कर्जदार बन गए।
एक साल में कितना रिटर्न मिला है?
इस समय सोने पर एक साल में 74% से अधिक का रिटर्न मिला है जबकि चांदी पर करीब 140% का रिटर्न दर्ज हुआ है। गोल्ड ETF पर 80% से अधिक का रिटर्न है और सिल्वर ETF का रिटर्न तो 188% तक पहुंच गया है। ये आंकड़े ललचाने वाले जरूर हैं लेकिन याद रखें कि अमीर लोगों के पास घाटा सहने की ताकत होती है जबकि अगर आपने अपनी पूंजी लगा दी और भाव गिर गए तो आप उसका झटका बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।
सोना बनाम शेयर मार्केट: असली तस्वीर क्या है?
2000 से 2025 के बीच सोने ने 14.4% का रिटर्न दिया जहां ₹1,000 का सोना ₹29,000 का हुआ जबकि BSE सेंसेक्स ने 13% का रिटर्न दिया जहां ₹1,000 का निवेश ₹21,500 का हुआ। लेकिन अगर 1998 से 2023 के बीच देखें तो अलग कहानी दिखती है जहां सोने ने 11.3% का रिटर्न दिया और ₹1,000 का सोना ₹14,500 का हुआ जबकि स्टॉक्स ने 13.5% का रिटर्न दिया और ₹1,000 का निवेश ₹23,700 का हो गया। यानी हर समय सोना बेहतर नहीं रहता और निवेश करने से पहले इन आंकड़ों को समझना जरूरी है।
10 महीने में चांदी डबल और 20 दिनों में फिर वही उछाल
पिछले साल 10 महीने में चांदी ₹86,000 से बढ़कर ₹1.5 लाख के करीब पहुंची जिसमें ₹89,000 का उछाल आया। लेकिन इस साल जनवरी के शुरुआती 20 दिनों में ही चांदी के दाम में करीब ₹85,000 का उछाल आ गया यानी 10 महीने में जितना उछाल आया करीब 20 दिनों में उतना ही। सोने में ₹3,000 से ₹4,000 होने में सिर्फ 207 दिन लगे जबकि ₹1,000 से ₹2,000 होने में 15 साल लगे थे और ₹2,000 से ₹3,000 होने में 14 महीने लगे। यह तेजी असामान्य है और इसमें कहीं न कहीं सटोरियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
“सोचा अफसोस” – एक नई मानसिक समस्या
इन दिनों एक नए प्रकार का अफसोस लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है जिसे “सोचा अफसोस” कहा जा सकता है। जिनके पास पहले से सोना है वो अफसोस कर रहे हैं कि काश और खरीद लिए होते और जिन्होंने कभी नहीं खरीदा वो अफसोस कर रहे हैं कि काश कुछ तो खरीद लिए होते। एक और कैटेगरी है जो अभी तय नहीं कर पा रहे कि आज के भाव पर खरीदें या नहीं क्योंकि उन्हें डर है कि कल अफसोस न हो। यह मानसिक स्थिति बाजार की अस्थिरता का नतीजा है।
शादी-ब्याह पर असर: हल्के हुए दुल्हन के जेवर
अखबारों में खबरें आ रही हैं कि जिन घरों में शादी-ब्याह है वे बहुत परेशान हैं और माता-पिता अब कम वजन के आभूषण खरीद रहे हैं। 22 कैरेट के साथ-साथ 18 कैरेट और अब 14 कैरेट के आभूषणों की मांग बढ़ने लगी है क्योंकि लोगों के लिए 22 कैरेट का सोना खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। सास को टेंशन है कि बहू को पायल कैसे देगी और यह चिंता हर उस घर में है जहां जल्द ही शादी होने वाली है।
विश्लेषण: आम आदमी के लिए सबक
यह खबर केवल सोने-चांदी के भाव की नहीं है बल्कि यह आम निवेशकों के लिए एक चेतावनी है। जब कई तरह की कहानियां बनने लगें जैसे ट्रंप, टैरिफ, केंद्रीय बैंक और युद्ध तब समझ जाना चाहिए कि आपको पता न चले इसलिए इतनी कहानियां बनाई जा रही हैं। सटोरिए केवल माल का स्टॉक नहीं करते बल्कि बाजार में स्टोरी भी फ्लोट करते हैं। देखादेखी और बिना ठोस जानकारी के किया गया निवेश आपको धोखा दे सकता है ठीक वैसे ही जैसे कोविड के बाद शेयर बाजार में कूदे छोटे निवेशकों को घाटा हुआ।
मुख्य बातें (Key Points)
- 21 जनवरी को सोना ₹1,52,000 और चांदी ₹3,35,000 के पार पहुंची लेकिन अगले ही दिन ETF में 21% गिरावट आई
- गोल्ड लोन में 125% की बढ़ोतरी हुई है जो दर्शाता है कि लोग सोना गिरवी भी रख रहे हैं और खरीद भी रहे हैं
- राजकोट के 44 कारोबारी दिवालिया हुए और उन पर ₹3,500 करोड़ का कर्जा हो गया क्योंकि वे शॉर्ट सेलिंग में फंस गए
- ऐतिहासिक चेतावनी के तौर पर 1980 में चांदी 90% गिरी थी और हंट ब्रदर्स को 1.7 अरब डॉलर का घाटा हुआ था
- RBI के पास 880.2 टन सोना है और फॉरेक्स रिजर्व में इसका हिस्सा 10% से बढ़कर 16% हो गया है








