Galgotia University AI Dog Controversy: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे AI India Impact Summit से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को 18 फरवरी 2026 को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यूनिवर्सिटी का पूरा स्टॉल खाली करा दिया गया, बिजली का कनेक्शन काट दिया गया और प्रदर्शनी के सारे सामान हटा दिए गए। वजह – एक AI रोबोट डॉग जिसे गलगोटिया ने अपना इनोवेशन बताया, लेकिन वो दरअसल चीन की कंपनी यूनिट्री (Unitree) का बना था और उसकी वेबसाइट पर महज $600 से $2800 में बिक रहा था। प्रसिद्ध पत्रकार रवीश कुमार ने इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खोलते हुए तीखी टिप्पणी की है।
दूरदर्शन के कैमरे पर दावा, ट्विटर पर 10 मिनट में पर्दाफाश
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने दूरदर्शन के संवाददाता से इंटरव्यू में साफ-साफ कहा – “यह ओरायन है, इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के द्वारा विकसित किया गया है।” दूरदर्शन ने यह खबर प्रसारित कर दी।
लेकिन ट्विटर पर लोगों ने 10 मिनट के भीतर ही कॉपी चेक कर लिया। ढेरों जानकारियां सामने आ गईं कि यह डॉग तो चीन में बना है, वेबसाइट पर बिक रहा है और 2 साल पहले ही लॉन्च हो चुका है। X (ट्विटर) पर यूजर्स ने कम्युनिटी नोट लगा दिया कि “यह तो चीन में $800 का मिल रहा है।” यूनिट्री के YouTube पेज पर इसके प्रोमो वीडियो को 52 लाख लोगों ने देखा है।
IT मंत्री अश्विनी वैष्णव की रील भी डिलीट करनी पड़ी
17 फरवरी को केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI समिट की तारीफ में एक रील पोस्ट की जिसमें यही AI डॉग दिख रहा था। उन्होंने अपने ट्वीट में इसे भारत की “सॉवरेन” (संप्रभु) उपलब्धि से जोड़ दिया। लेकिन जैसे ही पर्दाफाश हुआ, ट्वीट डिलीट करना पड़ा। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने भी अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।
एक देश के IT मंत्री का चीन में बने प्रोडक्ट को भारतीय उपलब्धि बताकर ट्वीट करना और फिर चुपचाप डिलीट करना – यह पूरे आयोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।
यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर नेहा सिंह पर फोड़ा ठीकरा
जब विवाद बढ़ा तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गॉड ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि “प्रोफेसर नेहा सिंह ‘डेवलप’ और ‘डेवलपमेंट’ में कंफ्यूज हो गईं।” यानी यूनिवर्सिटी ने पूरी जिम्मेदारी प्रोफेसर पर डाल दी।
इस पर रवीश कुमार ने तीखा सवाल उठाया – नेहा सिंह AI की प्रोफेसर तो हैं ही नहीं, वो स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में कम्युनिकेशन की प्रोफेसर हैं। अगर यूनिवर्सिटी ने AI में 350 करोड़ रुपये का निवेश किया है तो AI के प्रोफेसर को भेजना चाहिए था। और जब यूनिवर्सिटी ने मान ही लिया कि रोबोट उनका नहीं है तो “डेवलप” और “डेवलपमेंट” का तमाशा बंद कर देना चाहिए।
प्रोफेसर नेहा सिंह – इस पूरे फर्जीवाड़े की असली शिकार
रवीश कुमार ने एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया – प्रोफेसर नेहा सिंह इस पूरे मामले की सबसे बड़ी पीड़ित हैं। 18 फरवरी की सुबह जब कैमरों ने उन्हें घेर लिया तो उन्होंने कहा कि “टाइम नहीं था इसलिए समझा नहीं पाई” और “कभी दावा नहीं किया कि रोबोटिक डॉग हमने बनाया है।” लेकिन दूरदर्शन पर दिया गया उनका इंटरव्यू रिकॉर्ड पर है।
इस समय नेहा सिंह भयंकर मानसिक तनाव से गुजर रही होंगी। उनकी सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को गहरा धक्का पहुंचा है। सवाल है – उन्हें इस स्थिति में किसने डाला? जाहिर है यूनिवर्सिटी ने और आयोजकों की लापरवाही ने। क्या यूनिवर्सिटी ने उन्हें गलत ब्रीफ किया? क्या उन्हें नौकरी से निकाला जाएगा? क्या दूसरी जगह नौकरी मिलने में मुश्किल होगी? उनका जीवन इसके कारण दांव पर लग गया है।
एक हफ्ते पहले से चल रहा था प्रचार – कहीं नहीं लिखा ‘चीन का रोबोट’
AI समिट से एक हफ्ते पहले गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने इस रोबोट डॉग के कई वीडियो डाले। पहले पोस्ट में लिखा – “टेक इनोवेशन का एक नया सदस्य गलगोटिया यूनिवर्सिटी पहुंचा है। भविष्य ने कैंपस पर कदम रखा है।” किसी भी पोस्ट में कहीं नहीं लिखा कि यह चीन का रोबोट है।
और भी गंभीर बात यह है कि यूनिट्री कंपनी का नाम जो आमतौर पर रोबोट के शरीर पर लिखा होता है, गलगोटिया के रोबोट पर वह नाम नहीं था। क्या नाम मिटा दिया गया ताकि प्रचार हो सके? रोबोट का नाम “ओरायन” रखा गया – वो भी ग्रीक माइथोलॉजी से प्रेरित। 18 फरवरी के अखबार में गलगोटिया ने बड़ा विज्ञापन दिया जिसमें वही कुत्ता सबसे आगे नजर आ रहा है – जबकि यूनिवर्सिटी मान चुकी है कि उसने इसे नहीं बनाया।
ड्रोन पर भी उठे सवाल – वो भी चीन का?
रोबोट डॉग के अलावा गलगोटिया के स्टॉल पर रखे एक ड्रोन को लेकर भी विवाद हो रहा है। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल है कि वह ड्रोन भी चीन का है और वेबसाइट पर उपलब्ध है। जबकि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि इसे उन्होंने खुद बनाया है। यूनिवर्सिटी के CEO ध्रुव गलगोटिया ने कहा है कि AI में 350 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है – यह मामूली रकम नहीं है। लेकिन इतना निवेश करने के बाद भी AI डॉग चीन से खरीदना और AI समिट में लाना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
PM मोदी ने गलगोटिया के VC को दिया था पुरस्कार
दिलचस्प बात यह है कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सुनील गलगोटिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की तमाम यूनिवर्सिटियों में ग्लोबल लिंकेजेस और एकेडमिक्स में अव्वल आने के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया था। अब उसी यूनिवर्सिटी के कारण AI समिट की साख मिट्टी में मिल गई है।
AI समिट का इंतजाम – करोड़ों खर्च, शिकायतों का अंबार
यह विवाद सिर्फ गलगोटिया तक सीमित नहीं है। पूरे AI समिट के आयोजन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्टॉल लगाने का खर्चा देखें तो 1 वर्ग मीटर जगह का रेट 25,000 रुपये था। आमतौर पर एक स्टॉल 55 स्क्वायर मीटर का होता है – टैक्स मिलाकर करीब 15 लाख का खर्चा। सरकारी संस्थानों के लिए 9,000 प्रति वर्ग मीटर, PSU के लिए 18,000 और विदेशी स्टॉल के लिए $200 प्रति स्क्वायर मीटर का रेट था।
इतना पैसा देने के बावजूद कंपनियों की शिकायतें देखिए – अव्यवस्था है, सामान सुरक्षित नहीं, टारगेट ऑडियंस नहीं मिल रही, इंटरनेट स्टेबल नहीं तो लाइव डेमो नहीं हो पा रहा, VIP मूवमेंट के कारण बार-बार बाधा, लोग 3-4 घंटे लाइन में खड़े रहे, AI इवेंट में वाईफाई तक नहीं और UPI-कार्ड से पेमेंट भी नहीं हो पा रहा – सिर्फ कैश चल रहा था।
स्टार्टअप फाउंडर का सामान चोरी, PM की सिक्योरिटी के लिए खाली कराया मेन हॉल
नियो सेपियंस नामक स्टार्टअप के संस्थापक धनंजय यादव का ट्वीट वायरल हो गया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री के आने के कारण उन्हें अपने स्टॉल से चले जाने के लिए कहा गया और सिक्योरिटी के होते हुए भी उनका सामान चोरी हो गया। कुछ घंटे बाद उन्होंने ट्वीट किया कि दिल्ली पुलिस ने सामान ढूंढ लिया है – लेकिन ट्विटर पर लोगों ने सवाल उठाया कि इतनी जल्दी कार्रवाई कैसे हुई, क्या दबाव डालकर ट्वीट करवाया गया?
प्रधानमंत्री के आगमन पर मेन हॉल खाली करवा दिया गया – वही हॉल जहां लोगों ने लाखों रुपये देकर अपने पवेलियन और डेमोंस्ट्रेशन स्पेस लिए थे। टेक समिट में कैमरा और लैपटॉप अंदर ले जाना अलाउड नहीं था। गाड़ी या बाइक की चाबी भी अंदर नहीं ला सकते थे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया – कांग्रेस ने कसा तंज
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने लिखा – “अगर सावरकर को आधिकारिक रूप से स्वतंत्रता सेनानी ब्रांड कर रहे हैं जो कि नहीं थे, तो क्यों नहीं चीन के रोबोट डॉग को भी इंडियन घोषित कर देते हैं।”
राहुल गांधी ने ट्वीट किया – “AI समिट में भारत की प्रतिभाओं और डाटा का दम दिखाना चाहिए था, इसे PR के तमाशे में बदल दिया गया है। भारत का डाटा बिक रहा है। चीन का माल दिखाया जा रहा है।”
जांच के बड़े सवाल – आयोजकों की जवाबदेही कहां है
कई गंभीर सवाल अनुत्तरित हैं। जब यह AI डॉग चीन में बना था तो भारत की यूनिवर्सिटी की तरफ से इसकी प्रदर्शनी की इजाजत कैसे दी गई? क्या कोई जांच नहीं हुई कि कौन सी यूनिवर्सिटी कैसा सामान कैसा इनोवेशन लेकर आ रही है? महीनों पहले से यह प्रक्रिया चली होगी, एक-एक प्रोडक्ट की जांच हुई होगी। क्या गलगोटिया ने आयोजकों से दावा किया था कि यह उनका प्रोडक्ट है? या बताया था कि चीन से लेकर आए हैं?
टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोग लिख रहे हैं कि “आगे से किसी भी भारतीय समिट में भाग लेने का मतलब नहीं रह गया। हम पैसे देते हैं, स्टॉल तैयार नहीं, खरीदार नहीं, सैंपल चोरी हो रहे हैं, VIP दौरों के लिए घंटे बर्बाद हो रहे हैं।”
“मेरठ का नौचंदी मेला बेहतर ऑर्गेनाइज होता है”
रवीश कुमार ने तंज कसा कि AI जैसे सीरियस मुद्दे पर समिट को तमाशे की तरह आयोजित करने का नतीजा है कि आयोजन का तमाशा बन गया है। उन्होंने कहा – “इससे बेहतर तो मेरठ का ऐतिहासिक नौचंदी का मेला आयोजित होता है। उसमें कोई बिल गेट्स नहीं आता, न चीन का बना डॉग।”
एक समिट से किसी यूनिवर्सिटी का खदेड़ दिया जाना – यह सिर्फ गलगोटिया की नाक नहीं कटी, पूरे देश की साख पर सवाल खड़ा हो गया है। दुनिया के कई बड़े अखबारों में इस AI डॉग की चर्चा हो रही है और एनवीडिया जैसी दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनी से ज्यादा गलगोटिया यूनिवर्सिटी की चर्चा हो रही है – लेकिन गलत कारणों से।
मुख्य बातें (Key Points)
- गलगोटिया यूनिवर्सिटी को AI India Impact Summit से बाहर निकाला गया – स्टॉल खाली कराया, बिजली कनेक्शन काटा और सारे सामान हटाए गए। वजह – चीन की कंपनी यूनिट्री का बना AI रोबोट डॉग ($600-$2800) को अपना इनोवेशन बताकर प्रदर्शित करना।
- IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI डॉग वाली रील पोस्ट की और इसे भारत की “सॉवरेन उपलब्धि” बताया – ट्विटर पर कम्युनिटी नोट लगते ही डिलीट करना पड़ा। MeitY का ट्वीट भी डिलीट हुआ।
- यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर नेहा सिंह पर ठीकरा फोड़ा – रजिस्ट्रार ने कहा “डेवलप और डेवलपमेंट में कंफ्यूज हो गईं।” नेहा सिंह AI नहीं बल्कि कम्युनिकेशन की प्रोफेसर हैं। उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा और मानसिक शांति दांव पर लग गई है।
- AI समिट के आयोजन पर भी सवाल – PM की सिक्योरिटी के लिए मेन हॉल खाली कराया, स्टार्टअप का सामान चोरी हुआ, WiFi नहीं था, डिजिटल पेमेंट नहीं हो रहा था और 3-4 घंटे लाइनें लगीं।








