Falgun Month 2026 : सनातन परंपरा में फाल्गुन मास को उल्लास, भक्ति और आत्मशुद्धि का पावन काल माना जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन मास की शुरुआत 2 फरवरी से होगी और इसका समापन 3 मार्च को माना गया है। इसके बाद 4 मार्च से चैत्र मास आरंभ होगा, जिसे हिंदू नववर्ष की भूमिका के रूप में देखा जाता है। यानी फाल्गुन मास वर्ष के समापन और नए आरंभ के बीच एक सेतु की तरह माना जाता है।
क्यों खास है फाल्गुन मास
फाल्गुन वह समय होता है जब ठंड धीरे-धीरे विदा लेने लगती है और मौसम में हल्की गर्माहट आने लगती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान श्रीकृष्ण का अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसी कारण ब्रज क्षेत्र में पूरे फाल्गुन मास के दौरान होली का उत्सव विशेष भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी पावन माह में महाशिवरात्रि का महान पर्व भी आता है, जब शिवभक्त व्रत, जलाभिषेक और रात्रि जागरण करते हैं।
पूजा-पाठ और धर्म-कर्म का श्रेष्ठ समय
फाल्गुन मास केवल उत्सवों तक सीमित नहीं है। इसे आत्मशुद्धि, साधना और दान-पुण्य के लिए भी सर्वोत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस माह में किए गए पूजा-पाठ और शुभ कार्य शीघ्र फल देने वाले होते हैं।
- प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करने की सलाह दी जाती है।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और भस्म अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
- इस महीने में अन्न, वस्त्र और धन का दान विशेष पुण्यदायी माना गया है।
पितृ कर्म और मानसिक शांति का योग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास में चंद्रदेव का जन्म हुआ था। इसलिए चंद्रमा की पूजा से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है। पितरों की कृपा पाने के लिए यह महीना विशेष माना गया है। इस दौरान तर्पण और दान करने से परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
फाल्गुन मास में क्या न करें
जहां यह महीना शुभ कर्मों के लिए श्रेष्ठ है, वहीं कुछ नियमों का पालन भी जरूरी माना गया है।
- होलाष्टक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
- इस महीने में मांस, मदिरा और नशे से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
- वाणी पर संयम रखें, बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान न करें।
- रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना और तुलसी में जल देना वर्जित माना गया है।
आम जीवन पर असर
फाल्गुन मास का संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत संतुलन से भी जुड़ा है। संयम, दान और भक्ति के जरिए यह महीना व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आत्मिक संतोष की ओर प्रेरित करता है।
क्या है पृष्ठभूमि
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास वर्ष का अंतिम महीना होता है। यही कारण है कि इसे पुराने का समापन और नए का स्वागत करने वाला पावन काल माना जाता है। इसी माह में होली जैसे रंगों के पर्व और महाशिवरात्रि जैसे तप-साधना के पर्व का संगम देखने को मिलता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- फाल्गुन मास 2026 में 2 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगा।
- इस माह में होली और महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व आते हैं।
- पूजा, दान और पितृ कर्म के लिए यह महीना श्रेष्ठ माना गया है।
- होलाष्टक में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।








