भारत में EV की बिक्री 240% बढ़ी, टाटा मोटर्स का इलेक्ट्रिक कारों में पहला स्थान बरकरार

देश की ऑटोमोबाइल मार्केट में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की बिक्री में तेजी आ रही है। इस वजह से बहुत सी ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने व्हीकल्स के इलेक्ट्रिक वेरिएंट लॉन्च करने के साथ ही इस सेगमेंट में नए मॉडल्स उतारने की भी योजना बना रही हैं। 

JMK Research की हाल की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले वर्ष दिसंबर में देश की इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट की वर्ष-दर-वर्ष आधार पर ग्रोथ लगभग 240 प्रतिशत की रही। दिसंबर में लगभग 50,800 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदे गए। यह आंकड़ा नवंबर में 42,000 यूनिट्स से कुछ अधिक का था। इससे पिछले वर्ष दिसंबर में देश भर में केवल 14,978 इलेक्ट्रिक व्हीकल्स रजिस्टर्ड हुए थे। EV की बिक्री बढ़ने में बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर का है। दिसंबर में EV की कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 90.3 प्रतिशत की थी। इनमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का योगदान 48.6 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक पैसेंजर थ्री-व्हीलर्स का 41.7 प्रतिशत था। इलेक्ट्रिक कारों और कार्गो व्हीकल्स की हिस्सेदरी क्रमशः लगभग 5 प्रतिशत और 4.3 प्रतिशत की थी।

हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में Okinawa, हीरो इलेक्ट्रिक, TVS Motors, बजाज ऑटो, Ampere Vehicles, Ather Energy और रिवोल्ट प्रमुख कंपनियां थी। इस सेगमेंट में दिसंबर में 24,725 यूनिट्स बिकी। यह महीना-दर-महीना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत और वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 444 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इलेक्ट्रिक कारों के सेगमेंट में टाटा मोटर्स का पहला स्थान बरकरार है। इस सेगमेंट में दिसंबर में 2,522 यूनिट्स की बिक्री हुई जिसमें टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी लगभग 93 प्रतिशत की थी।

केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारें भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा दे रही हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अब केवल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स खरीदने या रेंट पर लेने का फैसला किया है। इससे पहले राजधानी दिल्ली में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रोत्साहन देने के लिए उपायों की घोषणा की गई थी। दिल्ली सरकार ने 10 साल से पुराने डीजल इंजन वाले व्हीकल्स को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने की अनुमति दी है। इससे इन डीजल इंजन वाले व्हीकल्स पर बैन के फैसले से बचा जा सकेगा। नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की ओर से 2015 और सुप्रीम कोर्ट के 2018 में जारी ऑर्डर्स के तहत दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल इंजन वाले व्हीकल्स को चलाया नहीं जा सकता। हालांकि, पुरानी डीजल कारों में इलेक्ट्रिक किट तभी लगाने की अनुमति तभी मिलगी जब टेस्टिंग एजेंसी डीजल कार के इंजन को फिट घोषित करेगी। अप्रूवल मिलने के बाद ही इंजन को इलेक्ट्रिक सिस्टम के साथ बदला जा सकेगा।

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