काले धन पर ईडी कर रही है लगातार कार्रवाई, पिछले 6 वर्षों में वसूले सर्वाधिक रुपये

नई दिल्ली, 6 अगस्त (The News Air)
गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फ्लिपकार्ट, उसके संस्थापकों और प्रमुख निवेशक टाइगर ग्लोबल को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा है कि क्यों ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस पर भारतीय क़ानूनों का उल्लंघन के लिए 1.35 बिलियन डॉलर का जुर्माना नहीं लगाया जाना चाहिए। ख़बरों के अनुसार, ईडी का नोटिस वॉलमार्ट सहित 10 पार्टियों को गया है, जिसमें आइएनसी-स्वामित्व वाली कंपनी के संस्थापक बिन्नी बंसल और सचिन बंसल भी है। नोटिस में कहा गया है कि प्रत्येक से अपेक्षा की जाती है कि वे अपना पक्ष एजेंसी के सामने रखें।
कालाधन पर हुई लगातार कार्रवाई
केन्द्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय पिछले कुछ समय से काले धन पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी का नतीजा है कि ज़ब्त की गई कुल रक़म पिछले 6 वर्षों में सर्वाधिक है। कई मामलों में कोर्ट के आदेश के तहत भी कार्रवाई की गई है। प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement) के अनुसार, वर्ष 2005 से 2014 तक काले धन के मामले में कुल 2681 करोड़ रुपये की संपत्ति अधिग्रहण को कोर्ट द्वारा अनुमति मिली थी। वर्ष 2014 से नवंबर 2020 तक 44302 करोड़ रुपये की संपत्ति के अधिग्रहण को कोर्ट द्वारा अनुमति मिली। पिछले कुछ समय में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कुछ बड़ी कार्यवाहियां निम्नानुसार-
विजय माल्या की संपत्ति की ज़ब्त
16 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक को भगोड़े व्यवसायी विजय माल्या की संपत्ति को ज़ब्त कर, नीलाम करने पर 792.11 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। विजय माल्या की यह संपत्ति एंटीमनी लॉन्ड्रिंग क़ानून के ज़ब्त की गई थी। इतनी बड़ी रक़म इससे पहले एक साथ कभी वसूल नही की गई थी।
नीरव मोदी और मेहुल चौकसी पर भी की कार्रवाई
माल्या मामले के अलावा, एक अन्य मामला पंजाब नेशनल बैंक एनएसई की ब्रैडी हाउस (मुंबई) शाखा में मेहुल चौकसी द्वारा 13,500 करोड़ रुपये से अधिक की कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से संबंधित है। इस मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय ने काफ़ी तेज़ी और मुस्तैदी दिखाई है। एजेंसी ने इनके द्वारा की गई धोखाधड़ी की 40% रक़म ज़ब्त कर ली है। जिसमें से कुछ हिस्सा बैंक को भी लौटाया जा चुका है।
9 हज़ार करोड़ से अधिक लौटाए सरकारी बैंक को
ईडी ने भगोड़े आरोपी विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की अबतक 18,170.02 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त कर ली है। इसमें से 9,371 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी ने सरकारी बैंकों को ट्रांसफर कर दी, ताकि धोखाधड़ी के कारण हुए नुक्सान की भरपाई की जा सके। ईडी ने बताया, विजय माल्या और पीएनबी बैंक धोखाधड़ी मामलों में बैंकों की 40 फ़ीसदी राशि पीएमएलए के तहत ज़ब्त किए गए शेयरों की बिक्री के ज़रिए वसूली गई है।
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के बारे में
प्रवर्तन निदेशालय को नई दिल्ली में वर्ष 1956 में स्थापित किया गया था। यह विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) और धन आशोधन अधिनियम के तहत कुछ प्रावधानों को लागू करने के लिए उत्तरदायी है। पीएमएल के तहत मामलों की जांच और मुक़दमे से संबंधित कार्य प्रवर्तन निदेशालय को सौंपे जाते हैं। यह निदेशालय, परिचालन उद्देश्यों के लिए राजस्व विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है। फेमा के नीतिगत पहलू, इसके विधायन तथा संशोधन के आर्थिक कार्य विभाग के दायरे में हैं। हालांकि, पीएमएल अधिनियम से संबंधित नीतिगत मुद्दे, राजस्व विभाग की ज़िम्मेदारी है। फेमा के प्रभावी (1 जून 2000) लागू होने से पूर्व, निदेशालय ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 के तहत नियम लागू थे।

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