Drug-Free Punjab : पंजाब में नशे के खिलाफ जंग को और तेज करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज यहां लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कैंपस में प्रदेश में नशे की बला को जड़ से उखाड़ने के लिए ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की।
‘आप’ प्रमुख ने पहले चरण के ठोस नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि तस्करों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई, सजा दर बढ़ने के साथ-साथ नशों के खिलाफ युद्ध में लोगों की भागीदारी बढ़ी। उन्होंने कहा कि दूसरा चरण प्रदेश में ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए पंजाब को एकजुट करेगा।
सभा को संबोधित करते हुए, ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, “युद्ध नशे के विरुद्ध के पहले चरण की शानदार सफलता के बाद, दूसरा चरण आज शुरू हो रहा है। पहला चरण 1 मार्च 2025 को लगभग 10 महीने पहले शुरू किया गया था, और जिस ईमानदारी, कड़ी मेहनत और दृढ़ता के साथ इसे लागू किया गया, वह पहले कभी नहीं देखी गई, न केवल पंजाब में बल्कि देश भर के किसी भी राज्य में, नशों के खिलाफ लड़ाई इतने व्यापक ढंग से नहीं लड़ी गई। ऐसा नहीं है कि नशे केवल पंजाब में ही बिकते हैं। हरियाणा, गुजरात, दिल्ली और कई अन्य राज्यों सहित बहुत से राज्य हैं, जहां नशे खुलेआम और बड़ी मात्रा में बिकते हैं, लेकिन वहां की सरकारों को कोई परवाह नहीं है।”

‘आप’ सरकार बनने से पहले के हालात को याद करते हुए ‘आप’ प्रमुख ने आगे कहा, “पंजाब में, हमसे पहले, जब शिरोमणि अकाली दल की सरकार सत्ता में थी, उनके राज के दौरान नशे हर गली और हर घर में सप्लाई होते थे। यह वह समय था जब पंजाब नशों में जकड़ा हुआ था जिसके कारण ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म बनी थी। पंजाब ने नशे को घरों में घुसते देखा, और उनके कई बड़े नेता सीधे तौर पर नशे बेचने में शामिल थे। उसके बाद, कैप्टन अमरिंदर ने गुटका साहिब पर शपथ ली और कहा कि वे 30 या 60 दिनों में नशों को खत्म कर देंगे। उनकी सरकार पांच साल चली और कुछ नहीं किया गया। वे झूठी शपथें थी। उसके बाद, हमारी सरकार आई।”
अधिक विस्तार से बताते हुए, अरविंद केजरीवाल ने कहा, “हमने कुछ समय लिया क्योंकि सही तैयारी की जरूरत थी, लेकिन पिछले साल 1 मार्च के बाद, जिस दृढ़ता और हिम्मत के साथ हमने नशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, वह बेमिसाल थी। बहुत से लोगों ने हमें चेतावनी दी कि नशा तस्कर बहुत खतरनाक हैं, वे बड़े गैंगस्टर, अपराधी और गुंडे हैं, और वे हमारे परिवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हमने कहा नहीं, हम लोगों से वादा करके आए हैं कि हम पंजाब को नशा मुक्त बनाएंगे और अपने बच्चों के लिए एक अच्छा भविष्य सुरक्षित करेंगे।”
लागू करने के पैमाने का विवरण देते हुए, उन्होंने आगे कहा, “पिछले 10 महीनों में नशा तस्करों के खिलाफ 28,000 मामले दर्ज किए गए हैं। इतने बड़े स्तर पर, आजादी के बाद के 75 सालों में, देश के किसी भी राज्य ने कभी इतने सारे मामले दर्ज नहीं किए। ये फर्जी मामले नहीं हैं। जब ये मामले अदालतों में पहुंचे और एफआईआर की जांच हुई, तो 88 प्रतिशत मामलों में दोषियों को जेल भेज दिया गया। अगर ये फर्जी मामले होते, तो खत्म हो जाते, लेकिन पुलिस द्वारा पकड़े गए लोग जेल जा रहे हैं और अदालतें सजा दे रही हैं। हर 100 मामलों में से 88 मामलों में जेल का हुक्म दिया गया है, और अब तक अदालतों में पहुंचे 28,000 मामलों में से 88 प्रतिशत को कैद की सजा हुई है।”
बड़े ड्रग नेटवर्क के खिलाफ गिरफ्तारियां और कार्रवाई पर जोर देते हुए ‘आप’ सुप्रीमो ने साझा किया कि लगभग 42,000 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पहले कभी किसी राज्य ने इतने बड़े स्तर पर तस्करों को नहीं पकड़ा। उनमें से 350 बड़े तस्कर हैं। लोगों ने इसे अपने गांवों, मोहल्लों में देखा होगा, जहां तस्करों की संपत्तियां, बड़े महल, बंगले, इमारतें और दफ्तर बने थे। पहली बार, किसी सरकार ने उनकी इमारतों को ढहाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा, “लोगों को महसूस होने लगा कि पहली बार एक ऐसी सरकार आई है जो सचमुच नशों के खिलाफ लड़ रही है। इसे टेलीविजन पर लाइव दिखाया गया और यह कार्रवाई अभी भी जारी है, बड़े तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। पंजाब का सबसे बड़ा तस्कर, जिसका नाम सुनकर लोग कांप जाते थे, जिसका नाम लेने से भी प्रशासन डरता था, उसे इस सरकार, आपकी सरकार ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। पहले किसी के पास उसका नाम लेने की भी हिम्मत नहीं थी, उसे जेल भेजने की तो दूर की बात थी। पुलिस डरती थी, प्रशासन डरता था और सीनियर नेता भी डरते थे, लेकिन ‘आप’ सरकार के पास उसे सलाखों के पीछे डालने की हिम्मत थी।”
जनता का विश्वास कैसे फिर से स्थापित हुआ, इस बारे में बताते हुए, अरविंद केजरीवाल ने जोर देकर कहा, “इससे लोगों का मनोबल मजबूत हुआ और वे आगे आने लगे। जब हमने यह मुहिम शुरू की, तो हमारी सबसे बड़ी चुनौती लोगों का विश्वास जीतना था। लोगों ने कहा कि बहुत सी पार्टियां आती हैं, बड़े वादे करती हैं और कुछ नहीं होता। लेकिन जब लोगों ने इमारतों को ढहाया जाता देखा, तस्करों के घर और बड़े महल ढहाए जाते देखे, तस्करों को गिरफ्तार किया जाता देखा और उनमें से सबसे बड़े नेता को भी पकड़ा जाता देखा, तो लोग हम पर भरोसा करने लगे और जानकारी लेकर आगे आने लगे।”
दूसरे चरण की एक घटना का वर्णन करते हुए, उन्होंने आगे कहा, “एक दिन, एक दिलचस्प घटना हुई जब मुख्यमंत्री भगवंत मान और मैं साथ बैठे थे। उन्होंने अपने गांव के एक युवक को बुलाया और पूछा कि वहां कौन नशा बेचता है। लड़के ने उस व्यक्ति का नाम लिया, बताया कि वह कहां बैठता है, कहां से बेचता है और किससे वह नशा प्राप्त करता है, यह समझाते हुए कि सप्लायर एक पुल के नीचे बैठता है और इसे कहीं और से सप्लाई मिलती है। इससे पता चला कि पूरी जनता जानती है कि नशा कौन बेचता है। यही घटना दूसरे चरण की नींव बन गई।”
समुदायिक भागीदारी की शुरुआत करते हुए, ‘आप’ प्रमुख ने आगे कहा, “विलेज डिफेंस कमेटियां अब बनाई गई हैं। हर गांव से 10 से 20 लोगों को इकट्ठा किया गया और कमेटियां बनाई गईं। लोगों से पूछा गया कि कौन आगे आना चाहता है और कौन फिर से ‘रंगला पंजाब’ बनाना चाहता है। युवाओं ने स्वेच्छा से काम किया और कहा कि वे अपने गांवों को ठीक करेंगे। हर गांव और वार्ड में 10 से 20 वॉलंटियर्स की टीमें बनाई गईं और उन्हें डिफेंस कमेटियों का नाम दिया गया। अब तक डेढ़ लाख वॉलंटियर्स इन कमेटियों में शामिल हो चुके हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। पहले केवल पुलिस और प्रशासन काम कर रहे थे, लेकिन अब डेढ़ लाख वॉलंटियर्स पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए एक साथ काम करेंगे। उन्हें ट्रेनिंग दी गई है और वे अपने गांवों में नशा बेचने वालों के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।”

उन्होंने आगे बताया कि उनके फोन पर एक एप इंस्टॉल की जाएगी जहां वे रिपोर्ट कर सकेंगे कि कौन नशा बेच रहा है, नशा कहां से आते हैं और सभी संबंधित विवरण दर्ज कर सकेंगे। “उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और उनकी पूरी सुरक्षा की जाएगी। सारी निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय में की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कार्रवाई हो और स्थानीय स्तर पर किसी भी तरह की मिलीभगत की इजाजत न दी जाए। अगर प्रशासन या पुलिस का कोई व्यक्ति शामिल है, तो जानकारी साझा की जानी चाहिए और उन्हें भी जेल भेज दिया जाएगा।”
अरविंद केजरीवाल ने कहा, “पंजाब में सुधार चाहने वाले तीन करोड़ पंजाबियों के लिए एक मिस्ड कॉल नंबर जारी किया गया है। कोई भी युवक जो वी.डी.सी. में शामिल होना चाहता है, वह मिस्ड कॉल दे सकता है और पंजाब सरकार से ट्रेनिंग प्राप्त करेगा। 13 फरवरी को इन डेढ़ लाख ‘गांवों के पहरेदारों’ (वॉलंटियर्स) की एक विशाल सभा होगी। 10 जनवरी से 30 जनवरी के बीच इस लहर में पूरे प्रदेश को शामिल करने के लिए पंजाब के हर गली, कोने, मोहल्ले और गांव में पैदल यात्राएं निकाली जाएंगी।”
सीमा पार तस्करी का जिक्र करते हुए अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा, “ज्यादातर नशे पाकिस्तान से ड्रोनों के जरिए आते हैं जो सीमा पर पैकेट डालते हैं। पहली बार, पंजाब सरकार ने केंद्र की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने फंडों का उपयोग करके एंटी ड्रोन सिस्टम खरीदे। अगर अब कोई ड्रोन पाकिस्तान से आता है, तो उसे रोका जाता है, मार गिराया जाता है और पंजाब में नशा पहुंचाने से रोका जाता है। डिफेंस कमेटियों की एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्हें उन लोगों की सूचियां बनानी चाहिए जो नशे के आदी हैं और उन्हें सलाह देनी चाहिए तथा नशा छुड़ाऊ केंद्रों में ले जाना चाहिए। जब हमारी सरकार आई, तो ये केंद्र बहुत बुरी हालत में थे, लेकिन अब इनमें एयर कंडीशनिंग, सीसीटीवी, टेलीविजन, अच्छा खाना है और इनकी क्षमता 1,500 से बढ़ाकर 5,000 बेड कर दी गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान और मैंने व्यक्तिगत रूप से कई केंद्रों का दौरा किया और लोग अब विश्वास करते हैं कि सही इलाज उपलब्ध है।”
सामूहिक अपील के भाषण को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, “पुलिस, प्रशासन और आम आदमी पार्टी की सरकार के सक्रिय रूप से काम करने से पंजाब के लोगों को अब एक साथ आना चाहिए। तीन करोड़ पंजाबी मिलकर ‘रंगला पंजाब’ और नशा मुक्त पंजाब बनाएंगे।”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोगों का उत्साह इस बात का गवाह है कि हम नशे के खिलाफ जंग जीतने के बहुत करीब आ गए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे आम आदमी से संबंधित मुद्दों को सामने लाने का श्रेय अरविंद केजरीवाल जी को जाता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि नशों के खिलाफ जंग को जन आंदोलन में बदल दिया गया है क्योंकि यह अभिशाप एक सामाजिक बुराई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के अभिशाप को केवल एक जन आंदोलन ही रोक सकता है, न कि पुलिस या कोई सरकारी कार्रवाई रोक सकती है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने नशे के कारोबार को संरक्षण दिया था लेकिन हमने इस पर सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों में एक अनोखा गुण है जिससे हम हर समस्या पर काबू पा लेते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने बाढ़ की स्थिति का डटकर मुकाबला किया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की तरह, पंजाब को नशे के अभिशाप के लिए अनावश्यक बदनाम किया गया है जो कि गैर-वाजिब है।
एक उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात में क्विंटलों की मात्रा में नशा बरामद होता है लेकिन एक साजिश के तहत केवल पंजाब को गलत तरीके से बदनाम किया जाता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान का उद्देश्य प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों को बचाना है और इसके नतीजे जल्द सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि हर राज्य पंजाब के वैध अधिकारों को छीनना चाहता है लेकिन पंजाब सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार को संरक्षण देने वाले लोगों को अपने पापों की सजा भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी प्रदेशवासी प्रशंसा के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब प्रदेश का इतिहास लिखा जाएगा, तो नशा विरोधी लहर का हिस्सा बनने वाले इन सभी वीरों के प्रदेश को बचाने के लिए दिए योगदान को सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रदेश के लोग पंजाब को बर्बाद करने वाले अवसरवादी राजनीतिक नेताओं के संदिग्ध चरित्र से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा पीड़ित अपराधी नहीं हैं और उन्हें सहानुभूति और इलाज की जरूरत है जिसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि समय की जरूरत है कि नशों के खिलाफ निस्वार्थ ढंग से बड़े स्तर पर कार्रवाई के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए नशे के कारोबार को संरक्षण दिया था लेकिन इस लहर का उद्देश्य रंगला और खुशहाल पंजाब सृजन करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां प्रदेश सरकार कई जन-पक्षीय और विकास-मुखी नीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं विपक्षी दल विभाजनकारी एजेंडे पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि अकाली दल को अपने पापों की कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि लोग उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे क्योंकि उन्होंने गलती नहीं बल्कि गुनाह किए हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों के सक्रिय सहयोग से रंगला पंजाब सृजेगी और यह लहर प्रदेश की किस्मत को नया रूप देगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल अपने मौके की प्रतीक्षा कर रहे हैं लेकिन प्रदेश सरकार पंजाब को प्रगतिशील, खुशहाल और रंगला राज्य बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मुहिम नशों के खिलाफ जंग का रूप है और इसके जरिए प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं, किसानों, पानी और पर्यावरण को बचाएगी। भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश के लोगों के अधिकारों की रक्षा और उनकी खुशहाली के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से पंजाब की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ है और प्रदेश को तस्करों के लिए नशीले पदार्थों का रूट बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा तस्करी को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं और नशा तस्करों के प्रति कोई नरमी न बरतने की नीति लागू की गई है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि नशा बेचकर लोगों के घरों में जहर घोलने वाले लोग प्रदेश के दुश्मन हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पंजाब के लोगों को आश्वासन दिया कि वे इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने और पंजाब को वास्तविक अर्थों में नशा मुक्त बनाने तक चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि दूसरा चरण पहले चरण से भी अधिक सफल साबित होगा और पंजाब इस मुहिम के हिस्से के रूप में सफलता की एक नई कहानी लिखेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने के लिए व्यापक और बहु-आयामी रणनीति अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत नशे की सप्लाई लाइन तोड़ दी गई है, नशों के कारोबार से जुड़े बड़े तस्करों को जेल में डाल दिया गया है, नशा पीड़ितों के लिए इलाज और पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है और नशा तस्करों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए गए हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह मुहिम आने वाले समय में भी जारी रहेगी और वे तब तक आराम नहीं करेंगे, जब तक पंजाब नशों के कोढ़ से मुक्त नहीं हो जाता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों का असली नेता वह होता है जो लोगों की भाषा में बात करता है और उनकी भावनाओं को समझता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विपक्ष का कोई भी नेता ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष प्रदेश की सत्ता पर कब्जा करने के दिन गिन रहा है, जबकि उनके पास लोगों की भलाई के लिए कोई एक भी एजेंडा नहीं है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया है, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया है, 61,000 युवाओं को मेरिट के आधार पर या किसी भी भ्रष्टाचार के बिना नौकरियां दी हैं जबकि दूसरी ओर विपक्ष के पास ऐसा कोई भी एजेंडा नहीं है।
इस मौके पर आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान का एक साल सफलता से पूरा होने पर प्रदेश सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस जन लहर को सफल करके पंजाब ने बड़ी मिसाल कायम की है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस मुहिम का श्रेय आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को जाता है।
वरिष्ठ आप नेता ने कहा कि इससे पहले नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल खानापूर्ति होती थी क्योंकि राजनीतिक रूप से किसी के पास यह चुनौती स्वीकार करने की हिम्मत नहीं थी। साथ ही उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे की बला से मुक्त करने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि पहले चरण में पुलिस ने सख्त कार्रवाई की और पीड़ितों का पुनर्वास किया गया। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में अब आम लोग नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करेंगे। मनीष सिसोदिया ने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोगों के साथ मिलकर प्रदेश से नशों को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा जो समय की बहुत बड़ी जरूरत है।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, डॉ. बलवीर सिंह और तरुणप्रीत सिंह सौंद, लोक सभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल, राज्य सभा सदस्य अशोक मित्तल और अन्य व्यक्तित्वों ने भी संबोधन किया।
इस मौके पर मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और स्पेशल डी.जी.पी. अर्पित शुक्ला तथा अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
युद्ध नशे के विरुद्ध दूसरे निर्णायक चरण में दाखिल
फरवरी 2025 में शुरू हुए अभियान पर आधारित युद्ध नशे के विरुद्ध का दूसरा चरण पंजाब की नशे के खिलाफ निरंतर जंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोआबे की धरती से, गांवों के पहरेदार पहल शुरू की गई है, जिसके तहत 10 जनवरी से 25 जनवरी तक लगभग 15,000 गांवों और वार्डों में पैदल यात्राएं की जाएंगी। इस मुहिम का उद्देश्य नागरिकों को नशों के खिलाफ लड़ाई में अपने गांवों और पड़ोस के सक्रिय संरक्षक बनने के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके साथ ही, एक मिस्ड-कॉल नंबर 9899-100002 शुरू किया गया है ताकि कोई भी नागरिक अपने गांव को इस लहर के हिस्से के रूप में रजिस्टर कर सके। इसके बाद मुख्यमंत्री की टीम उन्हें नशा विरोधी गतिविधियों में शामिल करने के लिए व्यक्तिगत रूप से संपर्क करेगी।
विलेज डिफेंस कमेटियां इस लहर का मुख्य केंद्र
विलेज डिफेंस कमेटियों के सदस्यों के लिए एक समर्पित युद्ध नशे के विरुद्ध मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च की गई है। इससे वे अपनी पहचान गुप्त रखते हुए नशों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी साझा कर सकेंगे।
नशा मुक्ति यात्रा के बाद, जमीनी स्तर पर मुहिम को मजबूत करने के उद्देश्य से अगस्त और अक्टूबर 2025 के बीच विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई गईं। मात्र तीन महीनों में 1.50 लाख वॉलंटियर्स इन कमेटियों में शामिल हो गए और अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने की शपथ ली।
इस पहल ने नशा विरोधी प्रयासों को पंजाब भर में एक व्यापक जन लहर में बदल दिया। इससे नशे के नेटवर्कों के खात्मे के लिए निरंतर जन भागीदारी सुनिश्चित हुई।
प्रशिक्षण, तालमेल और जवाबदेही विधियां
इस मुहिम को संस्थागत बनाने के लिए 6 और 7 नवंबर 2025 को विधान सभा हलका स्तर पर विलेज डिफेंस कमेटियों के 50,000 से अधिक सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया। बेहतर संचार के लिए तालमेल ढांचे स्थापित किए गए। नशीले पदार्थों से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए ढांचागत रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल पेश किए गए।
गांव वासियों के बीच कमेटी सदस्यों की भरोसेमंदता बढ़ाने और जवाबदेही स्पष्ट करने के लिए उन्हें पहचान पत्र जारी किए गए। इससे पहले मई और जुलाई 2025 के बीच युद्ध नशों के खिलाफ मुहिम ने नशा मुक्ति यात्रा के तहत 15,000 से अधिक गांवों को कवर किया। इस दौरान भाईचारों ने अपनी हदों के अंदर नशीले पदार्थों की तस्करी न होने देने का अहद लिया। इससे सामाजिक रूप से अलग-थलग व्यक्तियों को भी शामिल किया गया।
लागू करना और नशे के नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई
पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने के लिए एक व्यापक और बहु-आयामी रणनीति अपनाई गई है। इस अभियान के तहत नशे की सप्लाई लाइन तोड़ दी गई है। नशों के कारोबार से जुड़े बड़े तस्करों को जेल में डाल दिया गया है। नशा पीड़ितों के लिए इलाज और पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। नशा तस्करों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए गए हैं।
इसके अलावा 1 मार्च से 31 दिसंबर 2025 के बीच एनडीपीएस एक्ट के तहत 29,352 मामले दर्ज किए गए। 39,981 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। 1,849 किलोग्राम हेरोइन और 28 टन भुक्की जब्त की गई। 15.25 करोड़ रुपए की ड्रग मनी बरामद की गई।
इस दौरान 2 किलोग्राम से अधिक हेरोइन की जब्ती के मामलों में शामिल 358 बड़े तस्करों को गिरफ्तार किया गया। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 490 ड्रोन गतिविधियां पता लगाई गईं। 252 ड्रोन बरामद किए गए। इसके साथ ही 299 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।
अदालतों द्वारा एनडीपीएस के 6,040 मामलों की सुनवाई की गई। इसके नतीजे में 5,317 व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया, जो 88 प्रतिशत है। इसके अलावा जिलों में 50,433 नशा विरोधी जागरूकता मीटिंगें की गईं।
इलाज और पुनर्वास बुनियादी ढांचे का विस्तार
547 आउटपेशेंट ओपियोइड असिस्टेड ट्रीटमेंट क्लीनिकों में 10.48 लाख से अधिक मरीज रजिस्टर किए गए हैं। वर्तमान में नशा पीड़ितों के पुनर्वास और इलाज के लिए 5,000 से अधिक समर्पित बेड उपलब्ध हैं। ये सभी सेवाएं मुफ्त प्रदान की जा रही हैं। प्राइवेट संस्थाओं में इलाज संबंधी सरकारी भुगतान में वृद्धि की गई है।
पंजाब में वर्तमान में 36 सरकारी नशा छुड़ाऊ केंद्र, 19 सरकारी पुनर्वास केंद्र, 143 प्राइवेट नशा छुड़ाऊ केंद्र, 72 प्राइवेट पुनर्वास केंद्र और 55 सूचीबद्ध पुनर्वास केंद्र हैं। इसके अलावा 44 नर्सिंग कॉलेजों और 11 मेडिकल कॉलेजों में भी सेवाएं दी जा रही हैं।
सुरक्षित ढंग से रिकॉर्ड रखने और आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक तस्दीक के साथ वास्तविक समय की निगरानी के लिए एक डी.डी.आर.पी. पोर्टल बनाया गया है।
मरीजों की बढ़ती संख्या और क्षमता निर्माण
सरकारी नशा छुड़ाऊ केंद्रों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। अगस्त 2025 में 962 से बढ़कर 2,674 और सितंबर 2025 में 632 से बढ़कर 2,756 हो गई।
सरकारी पुनर्वास केंद्रों में अगस्त में 254 से 888 मरीज और सितंबर में 275 से बढ़कर 804 हो गए। ओओएटी क्लीनिकों ने सितंबर 2025 में 27.64 लाख मरीजों की आमद दर्ज की, जो साल-दर-साल वृद्धि दर्शाती है।
क्षमता निर्माण उपायों में दिल्ली के एम्स में 24 मनोवैज्ञानिकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में ट्रेनिंग देना, 1,000 से अधिक मेडिकल अधिकारियों को ट्रेनिंग देना, 180 मनोवैज्ञानिकों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करना और पांच मेडिकल कॉलेजों को क्लस्टर संसाधन केंद्रों के रूप में नामित करना शामिल है।
मरीजों को समाज की मुख्य धारा में शामिल होने के लिए हुनर विकास, रोजगार और पुन: एकीकरण के अवसर प्रदान करने के लिए सन फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के साथ साझेदारी की गई है। इसमें सात पुनर्वास केंद्रों में कौशल विकास इकाइयां स्थापित की गई हैं।
जेलों, शिक्षा और रोकथाम पर ध्यान केंद्रित
अन्य पहलों में आठ केंद्रीय जेलों में नशा छुड़ाऊ केंद्रों की स्थापना शामिल है। गुरदासपुर और होशियारपुर के लिए केंद्रों की योजना है। जेलों में तंदरुस्ती क्लीनिकों की शुरुआत शामिल है। सभी 25 जेलों के लिए 60 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती प्रगति पर है।
सूरमा कार्यक्रम के तहत नशा छुड़ाने वाले व्यक्तियों को रिकवरी एम्बेसडर के रूप में मान्यता दी जा रही है। 700 कॉलों के माध्यम से 25 ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है और जिला स्तर पर शामिल करने के लिए तैयार किया गया है।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटियाला में 720 जांच अधिकारियों और सरकारी वकीलों के लिए एनडीपीएस नियमों और नशा पीड़ितों को मुख्य धारा में लाने के बारे में वर्कशॉप करवाई गईं। इससे कानून लागू करने वाले और न्यायपालिका को ट्रेनिंग दी गई।
खेल, युवाओं की भागीदारी और जन रिपोर्टिंग
रोकथाम प्रयासों के तहत सभी सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए नशा रोकथाम पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई है। इससे 8 लाख से अधिक विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा की जा रही है।
अभियान की शुरुआत के समय पुनर्वास के लिए बेडों की क्षमता 1,455 से बढ़ाकर 4,940 बेड तक पहुंच गई है। 31 नए ओओएटी केंद्र खोले गए हैं।
युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक गतिविधियों में लगाने के लिए 1,350 करोड़ की लागत से 3,100 स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। 3,000 आधुनिक जिम स्थापित किए जा रहे हैं और 17,000 खेल किटें वितरित की गई हैं।
नशीले पदार्थों की तस्करी की रिपोर्ट करने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी शुरू किया गया है। इसमें सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है।
जीरो सहनशीलता और निरंतर प्रतिबद्धता
पंजाब की भौगोलिक स्थिति के कारण राज्य से अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। इससे इसे तस्करों के लिए नशीले पदार्थ भेजने का रास्ता बनाया जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए सख्त निगरानी और लागू करने के उपाय किए जा रहे हैं।
नशीले पदार्थ बेचकर समाज में दुख फैलाने वाले लोग राज्य के दुश्मन हैं। उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह अभियान तब तक निरंतर जारी रहेगी जब तक पंजाब पूरी तरह नशा मुक्त नहीं हो जाता।








