Dope Test Before Marriage को लेकर संसद में एक बड़ी और संवेदनशील मांग उठी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने 27 मार्च 2026 को नई दिल्ली में संसद को संबोधित करते हुए देश की बेटियों और बहनों की सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि शादी का प्रमाण पत्र जारी करने से पहले दूल्हे का Dope Test और Medical Fitness Certificate अनिवार्य किया जाए, ताकि शादी के बाद महिलाओं को धोखाधड़ी और घरेलू हिंसा का शिकार न होना पड़े।
तलाक और घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर जताई गहरी चिंता
MP मलविंदर सिंह कंग ने संसद में बोलते हुए कहा कि आज के समाज में शादियां टूटने और परिवारों के बिखरने का रुझान लगातार बढ़ रहा है। Dope Test Before Marriage की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के परिवारों को प्रभावित कर रही है। तलाक के बढ़ते मामले और घरेलू हिंसा की घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि विवाह संबंधी कानूनों में सख्त सुधारों की तुरंत जरूरत है।
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि शादी के बाद सामने आने वाली समस्याएं न सिर्फ महिला का जीवन बर्बाद करती हैं बल्कि दोनों परिवारों को भी तोड़कर रख देती हैं। कई मामलों में महिलाओं को शादी के बाद पता चलता है कि उनके पति नशे की लत, गंभीर बीमारियों या आपराधिक प्रवृत्तियों से ग्रस्त हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
समाज के दोहरे मापदंडों पर कांग ने साधा निशाना
Dope Test Before Marriage की पैरवी करते हुए सांसद मलविंदर सिंह कंग ने समाज में व्याप्त दोहरे मापदंडों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शादी से पहले लड़की की शिक्षा, चरित्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि की बारीकी से जांच-पड़ताल की जाती है, लेकिन जब बात लड़के की आती है तो सब आंखें बंद कर लेते हैं।
कंग ने कहा कि नशे की लत, गंभीर बीमारियां और आपराधिक प्रवृत्तियां जैसे मुद्दे जो शादी के बाद पुरुषों में सामने आते हैं, वे अनगिनत जिंदगियां बर्बाद कर रहे हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है कि हमारे समाज में लड़के पक्ष की जांच को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता जितना लड़की पक्ष की। इसी दोहरेपन का खामियाजा शादी के बाद महिलाओं को भुगतना पड़ता है।
सरकार से की गई दो बड़ी मांगें
AAP सांसद ने भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से इस दिशा में तुरंत और सख्त कदम उठाने की अपील की। उन्होंने दो प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग यह है कि Marriage Certificate जारी करने से पहले दूल्हे का Dope Test अनिवार्य किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह किसी भी तरह के नशे की लत से मुक्त है। दूसरी मांग यह है कि शादी से पहले दूल्हे के लिए Medical Fitness Certificate को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाए।
कंग ने जोर देकर कहा कि यह छोटा सा सुधार देश की महिलाओं के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। अगर शादी से पहले ही दूल्हे की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति स्पष्ट हो जाए, तो शादी के बाद होने वाले कई दुखद हादसों को रोका जा सकता है।
आम महिलाओं के जीवन पर क्या पड़ेगा असर?
Dope Test Before Marriage अगर कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम परिवारों की बेटियों को होगा। शादी से पहले ही दूल्हे के नशे की लत या किसी गंभीर बीमारी की जानकारी मिल जाने से परिवार सोच-समझकर फैसला ले सकेंगे। इससे न सिर्फ घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आएगी बल्कि तलाक की बढ़ती दर पर भी लगाम लग सकती है। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां महिलाओं को शादी के बाद बोलने का मौका भी नहीं मिलता, वहां यह कानून एक बड़ी ढाल बन सकता है।
क्या यह मांग बदलाव की शुरुआत बनेगी?
सांसद मलविंदर सिंह कंग ने जो मुद्दा संसद में उठाया है, वह सतही तौर पर भले ही छोटा लगे लेकिन इसकी जड़ें बेहद गहरी हैं। भारत में हर साल लाखों शादियां होती हैं और इनमें से एक बड़ा हिस्सा शादी के कुछ ही समय बाद टूट जाता है। कई मामलों में महिलाओं को शादी के बाद पता चलता है कि उनका पति नशे का आदी है या किसी लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है। ऐसे में Dope Test Before Marriage और Medical Certificate की अनिवार्यता एक ऐसा कदम हो सकता है जो विवाह संस्था में पारदर्शिता लाए। हालांकि इसके क्रियान्वयन में कई व्यावहारिक चुनौतियां भी होंगी, जैसे ग्रामीण इलाकों में जांच की सुविधा, निजता का अधिकार और सामाजिक स्वीकार्यता। लेकिन अगर सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे तो यह महिला सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने संसद में शादी से पहले दूल्हे का Dope Test औरMedical Fitness Certificate अनिवार्य करने की मांग उठाई।
- कंग ने कहा कि शादी के बाद सामने आने वाले नशे की लत, गंभीर बीमारियों और आपराधिक प्रवृत्तियों से अनगिनत महिलाओं का जीवन बर्बाद हो रहा है।
- उन्होंने समाज के दोहरे मापदंडों पर निशाना साधते हुए कहा कि लड़की की जांच तो होती है लेकिन लड़के पक्ष पर आंखें बंद कर ली जाती हैं।
- यह मांग पूरे देश की महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी है और इसे एक छोटा लेकिन बड़ा सुरक्षा कवच बताया गया।








