Donald Trump Aspirin Bruise Davos: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह न टैरिफ है, न कब्जे की धमकी और न ही नोबेल पीस प्राइज। इस बार चर्चा में है उनके हाथ पर दिखे नीले-बैंगनी निशान। स्विट्जरलैंड के दावोस में 19 से 23 जनवरी के बीच हुई वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में ट्रंप का एक वीडियो सामने आया जिसमें उनके बाएं हाथ पर साफ ब्रूसेस (चोट के निशान) दिखे। जब पत्रकारों ने इन निशानों के बारे में पूछा तो ट्रंप ने खुद ही एस्प्रिन का जिक्र कर दिया और इससे एक नई बहस शुरू हो गई।
ट्रंप ने बताई निशानों की वजह
जब डोनाल्ड ट्रंप से उनके हाथ पर दिखे नीले-बैंगनी निशानों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनका हाथ टेबल से टकरा गया था और उन्होंने उस पर क्रीम लगा ली थी।
लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। ट्रंप ने आगे कहा कि अगर आपको अपना दिल पसंद है तो एस्प्रिन लीजिए, लेकिन अगर आप थोड़ी सी भी ब्रूजिंग नहीं चाहते तो एस्प्रिन मत लीजिए।
ट्रंप ने कहा कि वो “बिग एस्प्रिन” लेते हैं, जिसका मतलब है कि वो एस्प्रिन की हाई डोज लेते हैं। उन्होंने बताया कि जब आप बिग एस्प्रिन लेते हैं तो इससे ब्रूसेस पड़ जाते हैं और यह इसके साइड इफेक्ट्स में से एक है।
डॉक्टर्स ने कहा जरूरत नहीं, फिर भी ट्रंप ले रहे एस्प्रिन
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि डॉक्टर्स ने उन्हें बताया है कि उन्हें एस्प्रिन लेने की जरूरत नहीं है और वो स्वस्थ हैं।
लेकिन ट्रंप का कहना है कि वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहते इसलिए एस्प्रिन ले रहे हैं। 78 साल की उम्र में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान उनकी सेहत को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या सच में एस्प्रिन से पड़ते हैं ब्रूसेस?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर एंड यूनिट हेड डॉ. समीर कुब्बा ने बताया कि हां, एस्प्रिन लेने से ब्रूसेस हो सकते हैं यानी स्किन पर नीले-बैंगनी रंग के निशान पड़ सकते हैं।
डॉ. कुब्बा ने समझाया कि एस्प्रिन एक ब्लड थिनर है जो खून को पतला करती है। ऐसे में अगर स्किन पर कहीं चोट लगे तो उस जगह पर ब्रूजिंग आसानी से हो जाती है।
एस्प्रिन क्या है और यह कैसे काम करती है?
डॉ. समीर कुब्बा ने बताया कि एस्प्रिन ब्लड थिनर होने के साथ-साथ एंटी इनफ्लेममेटरी दवा भी है। यह एंटी प्लेटलेट दवा के रूप में भी काम करती है।
इसे अक्सर दिल की बीमारियों जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज में दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियां (आर्टरीज) पतली हो जाती हैं या ब्लॉक हो जाती हैं।
ऐसा धमनियों में प्लैक जमने से होता है जिससे दिल तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
एस्प्रिन की कितनी डोज सुरक्षित है?
डॉ. कुब्बा ने बताया कि आमतौर पर दिल की बीमारियों में एस्प्रिन की तीन डोज दी जाती हैं जिनमें 75 मिलीग्राम, 150 मिलीग्राम और 325 मिलीग्राम शामिल हैं। इन्हें सेफ भी माना जाता है।
लेकिन हर किसी के लिए एक ही डोज सही नहीं होती। किस मरीज को कौन सी दवा लेनी चाहिए और उसका कितना डोज लेना चाहिए, यह मरीज की उम्र और उसकी मेडिकल कंडीशन देखने के बाद डॉक्टर तय करते हैं।
किन लोगों को ब्लीडिंग का ज्यादा खतरा?
डॉ. समीर कुब्बा ने बताया कि कुछ लोगों में एस्प्रिन से ब्लीडिंग का रिस्क ज्यादा होता है। इनमें शामिल हैं:
बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ स्किन पतली हो जाती है और ब्रूजिंग आसानी से हो जाती है।
पेप्टिक अल्सर के मरीज: पेट में अल्सर होने पर एस्प्रिन से ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग: इनमें भी ब्लीडिंग का रिस्क ज्यादा रहता है।
इसके अलावा अगर एस्प्रिन की हाई डोज दी जा रही है तो ब्लीडिंग का थोड़ा ज्यादा रिस्क रहता है।
क्या एस्प्रिन के विकल्प मौजूद हैं?
डॉ. कुब्बा ने बताया कि दर्द कम करने या दिल की सेहत के लिए एस्प्रिन के अलावा भी दवाइयां दी जा सकती हैं।
लेकिन यह तय करना पूरी तरह से डॉक्टर के हाथ में होता है कि किस मरीज को कौन सी दवा देनी है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कभी भी एस्प्रिन या कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।
आम लोगों के लिए जरूरी सबक
ट्रंप का यह मामला आम लोगों के लिए भी एक जरूरी सबक है। बहुत से लोग दिल की सेहत के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के एस्प्रिन लेना शुरू कर देते हैं।
लेकिन जैसा कि डॉ. कुब्बा ने बताया, एस्प्रिन एक ब्लड थिनर है और इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। खासकर बुजुर्गों को बिना डॉक्टर की सलाह के एस्प्रिन नहीं लेनी चाहिए।
विश्लेषण: राष्ट्रपति की सेहत पर नजर
ट्रंप का यह खुलासा कि वो डॉक्टर की सलाह के बावजूद एस्प्रिन ले रहे हैं, कई सवाल खड़े करता है। 78 साल की उम्र में किसी भी व्यक्ति को अपनी सेहत के मामले में सावधान रहना चाहिए और डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए। दूसरी तरफ यह भी सच है कि एस्प्रिन दिल के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रंप के हाथ पर दिखे ब्रूसेस इसी का उदाहरण हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- डोनाल्ड ट्रंप के बाएं हाथ पर दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान नीले-बैंगनी निशान दिखे जो एस्प्रिन के हाई डोज लेने की वजह से हैं
- एस्प्रिन एक ब्लड थिनर है जो खून को पतला करती है और चोट लगने पर ब्रूजिंग आसानी से हो जाती है
- ट्रंप ने बताया कि डॉक्टर्स ने उन्हें एस्प्रिन लेने की जरूरत नहीं बताई लेकिन वो रिस्क नहीं लेना चाहते
- बुजुर्गों, पेप्टिक अल्सर के मरीजों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में एस्प्रिन से ब्लीडिंग का खतरा ज्यादा होता है








