Diabetes Control : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डायबिटीज एक आम बीमारी बन चुकी है। यह सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिटायल क्लीनिक के फाउंडर और डायबिटीज रिवर्सल के एक्सपर्ट डॉक्टर गगनदीप ने एक विशेष इंटरव्यू में बताया कि शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल नहीं है, बशर्ते आपको सही जानकारी हो और आप अपनी लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करें।
डॉक्टर गगनदीप के अनुसार, ज्यादातर लोग शुगर के बारे में गलत धारणाओं के शिकार हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रोटी, चावल या ब्रेड खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, तो कुछ शुगर फ्री चाय पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि किसी एक चीज से न तो शुगर होती है और न ही किसी एक चीज को बंद करने से यह ठीक होती है।
डायबिटीज के दो मुख्य प्रकार
डॉक्टर गगनदीप ने बताया कि मुख्य रूप से डायबिटीज दो प्रकार की होती है – टाइप वन और टाइप टू। टाइप वन डायबिटीज में शरीर को बाहर से इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। लेकिन जो सबसे ज्यादा आम है, वह है टाइप टू डायबिटीज। इसमें शरीर के अंदर इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो जाता है, जिसके कारण खून में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है।
टाइप टू डायबिटीज आज के समय में तेजी से फैल रही है और इसका मुख्य कारण है खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि यह समस्या अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है।
99% मामलों में नहीं होते शुगर के लक्षण
डॉक्टर गगनदीप ने एक चौंकाने वाली बात बताई कि 99% मामलों में शुगर के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते। लोग अक्सर सिम्टम्स का इंतजार करते हैं – जैसे पैरों में सूजन, उल्टी जैसा महसूस होना या अत्यधिक थकान। लेकिन जब तक ये लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक डायबिटीज शरीर में घर कर चुकी होती है।
उन्होंने बताया कि शुगर के लक्षण तब आते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इनमें शामिल हैं – बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, जल्दी थक जाना, घाव या इन्फेक्शन का समय पर ठीक न होना। इसलिए लक्षणों का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
समय पर चेकअप है सबसे जरूरी
डॉक्टर ने सबसे अहम सलाह दी कि लोगों को समय पर चेकअप कराना चाहिए। आजकल लोगों में जागरूकता की कमी है। वे या तो ब्लड टेस्ट समय पर नहीं कराते या बहुत देर से कराते हैं। कुछ लोग सिर्फ घर पर ब्लड शुगर चेक करते हैं, वह भी दो-छह महीने में एक बार।
उन्होंने सलाह दी कि अगर आप स्वस्थ भी हैं, तो कम से कम महीने में एक बार अपनी शुगर लैब से चेक करानी चाहिए। हर तीन महीने में एचबीए1सी टेस्ट जरूर कराएं। जितनी जल्दी आपको पता चलेगा, उतनी जल्दी आप इस पर काबू पा सकेंगे।
शुगर होने के मुख्य कारण
डॉक्टर गगनदीप ने बताया कि डायबिटीज होने में दो चीजों का कॉम्बिनेशन होता है। पहला है जेनेटिक्स। अगर आपके परिवार में माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या मोटापे की समस्या रही है, तो वही जींस आप में भी आ सकते हैं।
लेकिन ये जींस अपने आप सक्रिय नहीं होते। ये तब एक्टिव होते हैं जब हम अपनी लाइफस्टाइल खराब रखते हैं। अगर हम बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड या जंक फूड खा रहे हैं, जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट ले रहे हैं, और साथ ही फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर रहे हैं, तो समस्या शुरू हो जाती है।
डॉक्टर ने कहा कि आजकल की लाइफस्टाइल सेडेंट्री है, यानी लोग ज्यादातर समय बैठे रहते हैं या कुर्सी पर बिताते हैं। डेली एक्सरसाइज नहीं करते। जब ये सारे फैक्टर्स जेनेटिक्स के साथ मिल जाते हैं, तो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है और धीरे-धीरे खून में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है।
घरेलू नुस्खे हैं सिर्फ मिथ
डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि लोग अक्सर घरेलू नुस्खों के चक्कर में पड़ जाते हैं। कहीं से सुन लिया कि रोटी बंद कर दो, कहीं से सुन लिया चावल बंद कर दो। कुछ लोग करेले का जूस, जामुन का जूस या त्रिफला जैसी चीजों पर निर्भर हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इन घरेलू नुस्खों का रोल एक से दो प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। जो बाकी 95 या 98 प्रतिशत रोल है, वह है आपकी ओवरऑल डाइट और लाइफस्टाइल का। लोग न्यूट्रिशनल एक्सपर्ट की बात सुनने की बजाय या अपना केस किसी एक्सपर्ट से डिस्कस करने की बजाय घरेलू नुस्खे लगाते हैं, जो गलत है।
सही डाइट है असली समाधान
डॉक्टर गगनदीप ने बताया कि अगर आप शुगर के मरीज हैं, तो सबसे पहले चीज को साइंटिफिकली समझें। जो टोटल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा है – जिसमें अनाज, गेहूं, चावल, चीनी और फल सब आते हैं – उसे नीचे रखना चाहिए। वहीं प्रोटीन इंटेक ज्यादा रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह एक जनरल एडवाइस है, लेकिन हर व्यक्ति की बॉडी अलग होती है। इसलिए कोशिश करें कि एक एक्सपर्ट से बात करके अपनी बॉडी के लिए, अपने कैलोरीज और बॉडी टाइप के हिसाब से एक स्पेसिफिक डाइट प्लान बनवाएं।
डॉक्टर ने जोर देकर कहा कि किसी एक चीज को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है। बल्कि संतुलित मात्रा में सही चीजें खाना जरूरी है। प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड से परहेज करें। साबुत अनाज, हरी सब्जियां, दालें और लीन प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करें।
लाइफस्टाइल में बदलाव है जरूरी
डॉक्टर ने बताया कि सिर्फ डाइट से काम नहीं चलेगा। आपको अपनी लाइफस्टाइल में भी बदलाव करना होगा। रोजाना एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी है। कम से कम 30-45 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें। यह वॉकिंग, जॉगिंग, योगा या जिम कुछ भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर आप अपनी लाइफस्टाइल में सही बदलाव करते हैं, तो डायबिटीज को कंट्रोल करना ही नहीं, बल्कि रिवर्स भी किया जा सकता है। इसका मतलब है कि आप दवाओं पर निर्भरता कम कर सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
डायबिटीज रिवर्सल संभव है
डॉक्टर गगनदीप डायबिटीज रिवर्सल के एक्सपर्ट हैं और उन्होंने बताया कि सही मार्गदर्शन और प्रयास से डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी डाइट, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में स्थायी बदलाव करें।
उन्होंने कहा कि यह कोई जादू नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। जब आप अपने शरीर को सही पोषण देते हैं, नियमित व्यायाम करते हैं और तनाव को मैनेज करते हैं, तो आपका शरीर खुद ठीक होने लगता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है और शुगर लेवल नियंत्रित होने लगता है।
युवाओं में बढ़ रहा है खतरा
डॉक्टर ने चिंता जताई कि आजकल युवा भी तेजी से डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। पहले यह बीमारी 50-60 साल की उम्र में होती थी, लेकिन अब 25-30 साल के युवाओं में भी यह देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण है गलत खान-पान, फास्ट फूड की बढ़ती खपत, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अभी से सचेत होने की जरूरत है। अगर आपके परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री है, तो आपको और भी ज्यादा सावधान रहना चाहिए। नियमित चेकअप, स्वस्थ खान-पान और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं।
तनाव और नींद का भी है असर
डॉक्टर ने बताया कि सिर्फ खान-पान और एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि तनाव और नींद का भी शुगर लेवल पर सीधा असर पड़ता है। अगर आप लगातार तनाव में रहते हैं या पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो आपके शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाते हैं।
इसलिए जरूरी है कि आप अपने तनाव को मैनेज करें। मेडिटेशन, योगा या अपनी पसंद की कोई भी एक्टिविटी करें जो आपको रिलैक्स करे। रात में कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लें।
मुख्य बातें (Key Points)
- डायबिटीज के 99% मामलों में शुरुआती लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित चेकअप जरूरी है
- टाइप टू डायबिटीज सबसे आम है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होती है
- जेनेटिक्स और खराब लाइफस्टाइल का कॉम्बिनेशन डायबिटीज का मुख्य कारण है
- घरेलू नुस्खों का रोल सिर्फ 1-2% है, असली समाधान है सही डाइट और लाइफस्टाइल
- कार्बोहाइड्रेट कम और प्रोटीन ज्यादा लेना चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट से कस्टमाइज्ड डाइट प्लान बनवाएं
- नियमित एक्सरसाइज, तनाव प्रबंधन और पर्याप्त नींद भी जरूरी है
- सही मार्गदर्शन से डायबिटीज रिवर्सल संभव है








