Dhurandhar 2 को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। निर्देशक Aditya Dhar की इस बहुचर्चित फिल्म पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि यह मनोरंजन नहीं, बल्कि BJP का अब तक का सबसे महंगा चुनावी विज्ञापन है: वो भी इंटरवल के साथ। फिल्म में नोटबंदी, राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों को इस तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है कि देश के हालिया इतिहास को ही फिर से लिखने की कोशिश नजर आती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन घटनाओं को लोगों ने अपनी आंखों से देखा और जिया, उन्हें ही झुठलाने का प्रयास किया गया है।
BJP नेताओं ने खुद माना: Dhurandhar 2 देखोगे तो वोट हमें दोगे
इस विवाद को और गहरा बनाता है असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा: “जो लोग Dhurandhar देखने जाएंगे, वो BJP को वोट देंगे।” यही नहीं, BJP के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ने Dhurandhar 2 के गानों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचार सामग्री के रूप में किया है। आम तौर पर लोग विज्ञापन स्किप करते हैं, लेकिन Dhurandhar 2 ऐसा विज्ञापन है जिसके लिए दर्शक 500 रुपये देकर खुद थिएटर जाता है। जब एक राजनीतिक दल खुद किसी फिल्म को अपने चुनावी प्रचार से जोड़ रहा हो, तो फिल्म का “काल्पनिक” होने का दावा अपने आप खोखला हो जाता है।
डिस्क्लेमर: “काल्पनिक कहानी” का कानूनी चीट कोड
Dhurandhar 2 की शुरुआत में लिखा है कि “यह वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक काल्पनिक रचना है” और “किसी भी व्यक्ति से समानता मात्र संयोग है।” लेकिन जब फिल्म में नरेंद्र मोदी की असली फुटेज, 2014 के शपथ ग्रहण समारोह का वास्तविक दृश्य और दाऊद इब्राहिम जैसे गैंगस्टरों के असली नाम खुलेआम इस्तेमाल किए जा रहे हैं, तो “संयोग” की बात कहना हास्यास्पद है। यह डिस्क्लेमर दरअसल एक कानूनी ढाल है। विज्ञापन की दुनिया में इसे “फाइन प्रिंट में छुपा झूठ” कहते हैं: दर्शक को यह पता ही नहीं चलता कि सच कहां खत्म होता है और गढ़ी हुई कहानी कहां शुरू।
खलनायकों के मुंह से मोदी की तारीफ: प्रोपेगेंडा की मास्टरक्लास
Dhurandhar 2 में एक बेहद चालाक तकनीक इस्तेमाल की गई है। फिल्म में दाऊद इब्राहिम का किरदार कहता है: “जबसे वो चायवाला आया है, हमारे लोग डरे हुए हैं।” यानी भारत का सबसे बड़ा वांटेड अपराधी, प्रधानमंत्री की प्रभावशीलता की समीक्षा दे रहा है: जैसे कोई स्विगी डिलीवरी ड्राइवर 5 स्टार रेटिंग दे रहा हो। इस तकनीक को समझना जरूरी है: अगर फिल्म का हीरो मोदी की तारीफ करता, तो दर्शकों पर उतना असर नहीं पड़ता। लेकिन जब फिल्म का सबसे बड़ा खलनायक खुद डरकर प्रशंसा करे, तो दर्शक एक अलग ही स्तर पर आश्वस्त हो जाता है।
इसके अलावा, फिल्म में एक ISI अफसर कहता है कि विदेशी ताकतों ने NGOs, मीडिया, यूनिवर्सिटी और समाजवादियों को अमेरिकी डॉलर दिलवाए ताकि मोदी न जीतें, फिर भी वो जीत गए। यह संवाद किसी ISI अफसर का नहीं, बल्कि हूबहू वही बात है जो BJP प्रवक्ता संबित पात्रा न्यूज चैनलों पर बोलते हैं। Aditya Dhar ने WhatsApp फॉरवर्ड्स का सिनेमाटिक यूनिवर्स बना दिया है।
“अमेरिका मोदी के खिलाफ था”: हकीकत इसके ठीक उल्टी
Dhurandhar 2 का दावा है कि अमेरिका नहीं चाहता था कि मोदी प्रधानमंत्री बनें। लेकिन 2014 में चुनाव नतीजे आने के दिन ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्यक्तिगत रूप से मोदी को फोन करके बधाई दी और व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। फरवरी 2014 में, चुनाव नतीजों से तीन महीने पहले ही अमेरिकी राजदूत मोदी से मिलने गुजरात पहुंचे थे। अमेरिका पहले से ही मोदी के साथ काम करने की तैयारी कर रहा था।
इससे भी चौंकाने वाली बात: 2018 में पाकिस्तान के पूर्व ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असद दुर्रानी ने खुद कहा कि ISI मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में पसंद करती थी। उनके अनुसार, मोदी की जीत पाकिस्तान के लिए अच्छी थी क्योंकि इससे भारत की छवि और आंतरिक संतुलन प्रभावित होता। यानी हकीकत में ISI ने मोदी को पसंद किया, जबकि Dhurandhar 2 इसका ठीक उल्टा दिखाती है।
नोटबंदी: Dhurandhar 2 का सबसे बड़ा झूठ
Dhurandhar 2 का सबसे विवादित हिस्सा नोटबंदी से जुड़ा है। फिल्म दिखाती है कि पाकिस्तान ने भारत में 11,000 करोड़ रुपये की नकली करेंसी भेजी थी और UP चुनाव के लिए 60,000 करोड़ की नकली करेंसी भेजने की तैयारी थी। इंटेलिजेंस एजेंसियों ने प्रधानमंत्री को ब्रीफ किया और फिर नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया गया।
लेकिन RBI की 2017-18 वार्षिक रिपोर्ट बिल्कुल अलग कहानी बताती है। बंद किए गए 15.41 लाख करोड़ रुपये में से 15.31 लाख करोड़ वापस बैंकिंग सिस्टम में आ गए: यानी 99.3% नोट वापस आ गए। RBI ने उस साल सिर्फ 43 करोड़ रुपये की नकली करेंसी पकड़ी। Dhurandhar 2 में दिखाए गए 60,000 करोड़ और 11,000 करोड़ की नकली करेंसी महज Aditya Dhar की कल्पना है।
National Bureau of Economic Research के अनुसार, नोटबंदी ने नवंबर-दिसंबर 2016 में भारत की आर्थिक गतिविधि कम से कम 3% घटा दी, जिसका असर GDP पर कई सालों तक देखा गया। ATM की लाइनों और नकदी संकट के कारण कम से कम 80 लोगों की जान गई। कुछ बैंकों के बाहर लाइन में खड़े-खड़े गए, कुछ ATM के पास हार्ट अटैक से गुजरे। अस्पतालों में इलाज नहीं हो पाया क्योंकि नकदी नहीं थी: डॉक्टरों ने 500 के पुराने नोट स्वीकार नहीं किए। यह सब लोगों ने अपनी आंखों से देखा, BJP के समर्थक तक इसका बचाव नहीं कर पाए, और Aditya Dhar इसे “मास्टरस्ट्रोक” बता रहे हैं।
Dhurandhar 2 ने क्या-क्या छुपाया?
Dhurandhar 2 में वो सब दिखाया गया जो BJP के narrative को मजबूत करता है, लेकिन जो खिलाफ जाता है, उसे पूरी तरह गायब कर दिया गया। 25 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक पाकिस्तान का दौरा किया। यह 10 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा थी। इससे पहले केवल अटल बिहारी वाजपेयी 2004 में पाकिस्तान गए थे, जबकि मनमोहन सिंह ने 10 साल के कार्यकाल में कभी पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। नवाज शरीफ के घर दोनों नेता 90 मिनट बैठे और साथ खाना खाया। यह Dhurandhar 2 में नहीं है, क्योंकि यह फिल्म के “product” के खिलाफ जाता है।
इस दौरे के सिर्फ 8 दिन बाद, 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर पाकिस्तानी आतंकियों ने भारतीय सेना की वर्दी पहनकर हमला किया और 7 भारतीय सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। यह भी Dhurandhar 2 में गायब है।
फरवरी 2019 के पुलवामा हमले में 40 से अधिक CRPF जवान शहीद हुए। फिल्म का मुख्य किरदार NSA अजित डोभाल 2019 में भी NSA थे। 11 इंटेलिजेंस इनपुट आ चुके थे कि कुछ होने वाला है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वो व्यक्ति जो युद्ध न रोकने का श्रेय भी ले लेता है, जो पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट मांगता है, वो इस “मास्टरस्ट्रोक” का श्रेय नहीं लेता? यह सोचने वाली बात है।
अतीक अहमद: कस्टोडियल किलिंग या इंटेलिजेंस ऑपरेशन?
Dhurandhar 2 का सबसे परेशान करने वाला हिस्सा अतीक अहमद पर आधारित किरदार का है। फिल्म में इस किरदार को जेल से बाहर निकलते हुए मीडिया इंटरव्यू के दौरान गोली मारी जाती है, और ISI अफसर “मेजर इकबाल” इसे पाकिस्तान में टीवी पर देखते हुए “क्लीन इंटेलिजेंस ऑपरेशन” बताता है।
हकीकत में, 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को पुलिस कस्टडी में, लाइव टेलीविजन पर, 3 हमलावरों ने गोली मार दी। कुछ दिन पहले ही अतीक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि उन्हें फर्जी एनकाउंटर में मारा जाएगा। जब यह हुआ, तो यह UP सरकार की कानून-व्यवस्था की विफलता माना गया। लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सवाल सीधा है: अगर यह “इंटेलिजेंस ऑपरेशन” था, तो संसद में श्रद्धांजलि क्यों?
एक और विरोधाभास: फिल्म में मेजर इकबाल 2023 की यह हत्या टीवी पर देख रहा है, जबकि वास्तविक जीवन में जिस व्यक्ति पर यह किरदार आधारित है, वह 2011 में ही मारा गया था। Aditya Dhar की यह “बिजनेस रिक्वायरमेंट” थी: खलनायक को जिंदा रखना जरूरी था ताकि अपने क्लाइंट की ब्रीफ पूरी कर सकें।
NGOs और “समाजवादी” शब्द पर हमला
Dhurandhar 2 में ISI द्वारा भारत के NGOs, मीडिया और यूनिवर्सिटी को फंड करने का दावा वही narrative है जिसका इस्तेमाल करके BJP सरकार ने 2020 में Amnesty International India को बंद कराया, 2023 में NewsClick पत्रकारों पर छापे मारे, और 2014 से 20,000 से अधिक NGOs के विदेशी फंडिंग लाइसेंस रद्द किए, जिनमें Greenpeace India भी शामिल है। ये वही NGOs हैं जो साफ हवा, अरावली की पहाड़ियों और हसदेव जंगल के लिए आवाज उठाते हैं।
फिल्म ने तो “समाजवादी” (Socialist) शब्द को ही ISI-फंडेड बता दिया, जबकि यह शब्द भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दर्ज है। दूसरी तरफ, 2002 की “Foreign Exchange of Hate” रिपोर्ट में सामने आया कि अमेरिकी संगठन IDRF व्यवस्थित तरीके से RSS-संबद्ध संगठनों को पैसा भेज रहा था। 2001 से 2012 के बीच 5 अमेरिकी चैरिटीज़ ने संघ से जुड़े संगठनों को 55 मिलियन डॉलर से अधिक दिए। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 के दौरान अमेरिकी सरकार के फेडरल रिलीफ फंड से 8,33,000 डॉलर दक्षिणपंथी समूहों तक पहुंचे। लेकिन यह ट्विस्ट Aditya Dhar की फिल्म में कभी नहीं आएगा।
जब Dhurandhar 2 आपकी याददाश्त बदलने की कोशिश करे
2016 की नोटबंदी, 2019 का पुलवामा, 2023 की कस्टोडियल किलिंग: ये सब लोगों की आंखों के सामने हुआ। ATM के बाहर लंबी लाइनें, पुलवामा की सच्चाई, सबने देखी। लेकिन Dhurandhar 2 कहती है कि जो आपने देखा, वो सच नहीं था। नोटबंदी “मास्टर प्लान” थी, UP चुनाव पाकिस्तान की “हार” थी, कस्टोडियल किलिंग “इंटेलिजेंस ऑपरेशन” थी।
मनोविज्ञान में इसे “गैसलाइटिंग” कहते हैं: जब कोई आपको यकीन दिलाए कि आपकी याददाश्त गलत है, जो आपने अपनी आंखों से देखा वो सच नहीं था। जब 1947 की घटनाओं के बारे में झूठ बोला जाता है, तो सत्यापित करना मुश्किल है क्योंकि आप उस समय जिंदा नहीं थे। लेकिन 2016, 2019, 2023: ये सब आपकी आंखों के सामने हुआ। और जब यह गैसलाइटिंग बड़े पर्दे पर, करोड़ों लोगों के सामने हो, तो यह सिर्फ फिल्म नहीं रहती: यह एक हथियार बन जाती है। Aditya Dhar का विज्ञापन बजट असीमित हो सकता है, लेकिन सच मुफ्त है और सच ज्यादा ताकतवर है।
मुख्य बातें (Key Points)
- BJP की स्वीकारोक्ति: असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद कहा कि Dhurandhar 2 देखने वाले BJP को वोट देंगे, BJP हैंडल ने फिल्म के गानों को मोदी प्रचार में इस्तेमाल किया
- नोटबंदी का झूठ: RBI के आंकड़ों के अनुसार 99.3% नोट वापस आए, सिर्फ 43 करोड़ की नकली करेंसी मिली, जबकि Dhurandhar 2 में 60,000 करोड़ का दावा किया गया
- छुपाई गई घटनाएं: मोदी की पाकिस्तान यात्रा, पठानकोट हमला और पुलवामा की इंटेलिजेंस विफलता फिल्म से पूरी तरह गायब
- इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास: अतीक अहमद की कस्टोडियल किलिंग को “इंटेलिजेंस ऑपरेशन” और नोटबंदी को “मास्टरस्ट्रोक” बताकर Dhurandhar 2 ने गैसलाइटिंग का सहारा लिया







