Delhi Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में जहरीली हवा का कहर लगातार जारी है, जिससे लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। शहर में सुबह से ही स्मॉग की एक मोटी चादर छाई हुई है, जिसने विजिबिलिटी को काफी कम कर दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुबह 7 बजे ‘बेहद खराब’ श्रेणी में 349 दर्ज किया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने विशेष रूप से दिल्ली में स्कूलों को फिर से खोलने के फैसले पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है, जबकि शहर में वायु प्रदूषण का स्तर ‘बेहद खराब’ बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है ताकि वायु गुणवत्ता के बिगड़ते हालात और स्कूलों के खुलने के संबंध में जवाब दिया जा सके। यह स्थिति आम आदमी के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है, खासकर बच्चों पर जो इस जहरीली हवा के सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जयमालिया बागची की पीठ वजीरपुर जेजे कॉलोनी एसोसिएशन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने केंद्र सरकार, शिक्षा निदेशालय और अन्य उत्तरदाताओं द्वारा जवाब दाखिल न करने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सभी सात उत्तरदाताओं को 20 सितंबर, 2025 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से नोटिस भेजे गए थे, लेकिन केवल उत्तरदाता संख्या चार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और हलफनामा दाखिल किया। दिल्ली सरकार और उसके शिक्षा निदेशालय सहित भारत सरकार ने भी उपस्थिति दर्ज कराने का विकल्प नहीं चुना।
शिक्षा निदेशालय के सचिव को तलब किया गया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “दुर्भाग्यवश, यह विभाग भी अदालत की सहायता को आगे नहीं आया। ऐसी परिस्थितियों में, हम दिल्ली के शिक्षा निदेशालय के सचिव को तलब करते हैं, जो दिसंबर 2025 को उपस्थित रहेंगे।” कोर्ट ने दिल्ली के एनसीटी और इसके शिक्षा निदेशालय को भी अपना काउंटर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह कदम दिल्ली सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया गया है, ताकि वे प्रदूषण नियंत्रण और बच्चों के स्वास्थ्य के मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दें।
दिल्ली-एनसीआर में AQI का चिंताजनक स्तर
राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया है।
उदाहरण के तौर पर:
धौला कुआँ में AQI 356
आनंद विहार में AQI 390
अलीपुर में AQI 356
अशोक विहार में AQI 388
चांदनी चौक में AQI 371
आईटीओ में AQI 357
बवाना में AQI 405 (गंभीर श्रेणी)
बुराड़ी में AQI 379
जहांगीरपुरी में AQI 394
नरेला में AQI 388
द्वारका में AQI 348
दिल्ली से सटे एनसीआर के इलाकों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है:
नोएडा सेक्टर 62 में AQI 325
गाजियाबाद के वसुंधरा में AQI 296
इंदिरापुरम में AQI 389
गुरुग्राम में AQI 325
इससे पहले, दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 327 रहा था, जबकि मंगलवार को यह 352 और सोमवार को 382 दर्ज किया गया था। वायु गुणवत्ता चेतावनी प्रणाली के अनुसार, आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में बहुत सुधार होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
आम जनता पर असर
इस जहरीली हवा का सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत, आँखों में जलन और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों को खोलने का फैसला ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है। सरकार की ढिलाई और प्रदूषण नियंत्रण में विफलता ने नागरिकों के जीवन को जोखिम में डाल दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
दिल्ली-एनसीआर में AQI ‘बेहद खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में, कई इलाकों में 400 के पार।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को प्रदूषण पर फटकार लगाई।
कोर्ट ने दिल्ली में स्कूलों को दोबारा खोलने के फैसले पर गहरी नाराजगी जताई।
शिक्षा निदेशालय के सचिव को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।
आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद कम।








