Crude Oil Price Breaking News: नई दिल्ली में ऊर्जा बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। ईरान और अमेरिका के बीच अचानक हुए सीजफायर के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। महज कुछ घंटों में क्रूड ऑयल 20% टूटकर $117 से गिरकर $91 प्रति बैरल तक आ गया है। यह कोविड-19 के बाद तेल बाजार की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट मानी जा रही है।
40 दिनों से चल रहे तनाव के दौरान तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी थी। लेकिन सीजफायर की घोषणा के साथ ही यह जोखिम प्रीमियम खत्म हो गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। विश्व के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने की धमकियों ने ग्लोबल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया था। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था।
अब जब यह रास्ता फिर से खुल गया है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। इससे न केवल तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
ट्रंप की घोषणा और ईरान का प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सीजफायर की घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से 10 सूत्री प्रस्ताव मिला है जिस पर बातचीत आगे बढ़ेगी। 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में इस मुद्दे पर वार्ता होने की संभावना है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर युद्ध का अंत नहीं है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने अपने ज्यादातर सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और आगे की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी। ईरान ने अमेरिका से सेना हटाने, प्रतिबंध खत्म करने और मुआवजे जैसी बड़ी मांगें भी रखी हैं।
वैश्विक तेल बाजार में भूचाल
सीजफायर की खबर आते ही अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में जबरदस्त गिरावट देखी गई। Brent Crude 13.07% गिरकर $94.98 प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं WTI Crude Oil में 13.83% की गिरावट के साथ यह $91.32 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।
यह गिरावट तेल कंपनियों और निर्यातक देशों के लिए झटका साबित हो सकती है। वहीं भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह बड़ी राहत की खबर है। भारत का तेल आयात बिल काफी कम हो सकता है।
पेट्रोल-डीजल पर असर की संभावना कम
क्रूड ऑयल के दाम घटने के बावजूद पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की संभावना कम है। इसकी मुख्य वजह यह है कि जब कच्चा तेल महंगा हो रहा था, तब सरकार ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी।
भारत सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती ईंधन कीमतों के असर को कम करने के लिए पेट्रोल पर लगने वाली विशेष एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर और डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की कटौती की थी। इस कटौती के बाद यह ड्यूटी क्रमशः ₹3 प्रति लीटर और शून्य हो गई थी।
इस कदम का मकसद तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को नुकसान से निपटने में मदद करना और खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए रखना था।
LPG की कीमतों में कमी संभव
एलपीजी के दाम जरूर घट सकते हैं। पिछले महीने 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी के चलते की गई थी।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम भी 1 अप्रैल से दिल्ली में ₹195.50 बढ़ाए गए थे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से एलपीजी की सप्लाई पर काफी प्रभाव पड़ा था। हालांकि बाद में ईरान ने भारत के लिए रास्ता खोल दिया था।
भारत के लिए राहत की खबर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना भारत के लिए काफी राहत की खबर है। इससे कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई बेहतर होगी। क्रूड के दाम घटना भी अच्छा संकेत है जिससे भारत का आयात बिल कम होगा।
भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। यह भारतीय रुपए के लिए भी अच्छी खबर है।
मुख्य बातें (Key Points)
• क्रूड ऑयल $117 से गिरकर $91 प्रति बैरल पर, 20% की गिरावट
• होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुला, वैश्विक तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद
• पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की संभावना कम, LPG सस्ती हो सकती है
• भारत के तेल आयात बिल में कमी आने की संभावना













