PM Kisan Installment : देशभर के किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। 19 नवंबर को 21वीं किस्त जारी होने के बाद अब किसान अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन, e-KYC और जमीन के कागजी नियमों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। साफ कर दिया गया है कि जिन किसानों की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, उन्हें अगली किस्त नहीं मिलेगी।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक 21 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। 21वीं किस्त 19 नवंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी की गई थी, जिसमें 9 करोड़ से अधिक किसानों को करीब ₹18,000 करोड़ की राशि दी गई थी। इसके बाद से किसान 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
‘22वीं किस्त कब तक आने की उम्मीद’
अब तक के पैटर्न को देखें तो पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त मार्च से अप्रैल 2026 के बीच आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यह किस्त केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी, जिनका रजिस्ट्रेशन और e-KYC पूरी तरह से पूरा होगा।
‘e-KYC अनिवार्य, नहीं तो किस्त अटकी’
सरकार ने साफ कर दिया है कि e-KYC के बिना सम्मान निधि की अगली किस्त नहीं दी जाएगी। इसके लिए OTP आधारित e-KYC सिस्टम लागू किया गया है, जिसे किसान पोर्टल या पीएम किसान ऐप के जरिए पूरा किया जा सकता है। इसके लिए आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर होना जरूरी है।
‘60% से ज्यादा किसान रजिस्ट्रेशन से बाहर’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान के तहत 60 प्रतिशत से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। तकनीकी दिक्कतें, कागजी अड़चनें और e-KYC की अनिवार्यता किसानों की सबसे बड़ी परेशानी बन गई है।
‘जमीन अपने नाम नहीं, आवेदन खारिज’
नए नियमों के तहत केवल उन्हीं किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं, जो वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन जमीन पिता, दादा या अन्य परिजनों के नाम पर दर्ज है। ऐसे किसानों को शिविरों से यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि पहले जमीन अपने नाम कराएं।
‘म्यूटेशन फंसा, दफ्तरों के चक्कर’
जमीन अपने नाम कराने के लिए किसानों ने अंचल कार्यालयों में म्यूटेशन के आवेदन दे रखे हैं, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। किसानों का कहना है कि खेती छोड़कर बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाना समय और पैसे दोनों की बर्बादी है।
‘ग्रामीण इलाकों में बढ़ता असंतोष’
गैर-रैयत किसानों के आवेदन सीधे खारिज किए जा रहे हैं, जिससे गांवों में असंतोष बढ़ रहा है। पंचायत स्तर पर लगाए गए विशेष शिविरों में रोजाना औसतन 25 से 30 किसानों का ही निबंध हो पा रहा है, जबकि पहुंचने वालों की संख्या कहीं ज्यादा है। लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के बाद भी कई किसान खाली हाथ लौट रहे हैं।
विश्लेषण: योजना और ज़मीनी हकीकत में फासला
पीएम किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए आर्थिक सहारा है, खासकर तब जब खेती की लागत, खाद-बीज और डीजल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन तकनीकी और कागजी प्रक्रियाएं इतनी जटिल हो गई हैं कि वही योजना अब किसानों के लिए तनाव का कारण बनती जा रही है। अगर व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में किसान योजना से बाहर हो सकते हैं।
आम किसान पर असर
सम्मान निधि की रकम से किसान खाद, बीज और घरेलू जरूरतें पूरी करते हैं। किस्त रुकने से उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है।
जानें पूरा मामला
पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त से पहले सरकार ने रजिस्ट्रेशन, e-KYC और जमीन से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू कर दिया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जिन किसानों की प्रक्रिया अधूरी होगी, उनका नाम लाभार्थी सूची से हटाया जा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पीएम किसान की 22वीं किस्त मार्च–अप्रैल 2026 में संभावित
- e-KYC और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
- 60% से ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन अधूरा
- जमीन अपने नाम न होने पर आवेदन खारिज








