COVID-19: पंजाब सरकार 1500 रुपए प्रति माह पैंशन, ग्रैजूएशन तक मुफ्त शिक्षा, आशीर्वाद स्कीम के अंतर्गत 51,000 रुपए, मुफ्त राशन और स्वास्थ्य बीमा करवाएगी मुहैया

चण्डीगढ़, 4 जूनः

पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अरुणा चौधरी ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने राज्य के ऐसे कुल 23 बच्चे ढूँढे हैं, जिनके माता और पिता दोनों की 31 मार्च, 2020 से 31 मई, 2021 दौरान कोविड-19 महामारी के कारण मौत हो गई थी।

इस संबंधी और अधिक जानकारी देते हुए श्रीमती चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, जोकि एक नोडल विभाग है, ने दो हफ्तों के अंदर-अंदर 23 ऐसे बच्चों का पता लगाया है। इनमें वह बच्चे शामिल हैं, जिनके दोनों अभिभावक (माता-पिता) की मौत कोविड से हुई है या वह बच्चे जो पहले एक अभिभावक (माता या पिता) गंवा चुके थे और कोविड के कारण दूसरे अभिभावक की भी मौत हो गई, जिस कारण यह बच्चे अनाथ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के सम्बन्ध में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया, सामाजिक जांच की गई और उनके नजदीकी रिश्तेदारों से पूछताछ की गई और उनके विचार पूछे गए। शुरूआती तौर पर ऐसे बच्चों को उनके नजदीकी रिश्तेदारों द्वारा संभाल लिया गया है। परन्तु कुछ बच्चे ऐसे हैं जिनको रिश्तेदारों ने स्वीकार नहीं किया या वह जिनके रिश्तेदार नहीं हैं, ऐसे बच्चों को चिल्ड्रेन होम्स में लेजाया जायेगा।

उन बच्चों जिन्होंने कोविड के कारण अपने माता-पिता दोनों को गंवा दिया है और वह परिवार जो इस महामारी के कारण अपने रोजी-रोटी कमाने वाले सदस्य़ को गंवा चुके हैं, के संकट को दूर करने के लिए उठाए गए तत्काल उपायों बारे बताते हुए श्रीमती चौधरी ने कहा कि संबंधित विभागों को इन बच्चों और परिवारों के लिए संबंधित विभिन्न कल्याण योजनाओं के अंतर्गत तुरंत राहत प्रदान करने के लिए कहा गया है।

श्रीमती चौधरी ने कहा कि इन विभागों के प्रशासनिक सचिवों को विस्तारपूर्वक कार्य योजना को साझा करने सहित नीति में संशोधन की सूची बनाने / दिशा-निर्देशों की तैयारी / अलग-अलग निर्धारित कार्यों संबंधी एसओपी, नोडल अधिकारी नियुक्त करने (जो डिप्टी डायरैक्टर के पद से कम न हो) राहत उपायों के निर्विघ्न और प्रभावशाली ढंग से लागूकरण को यकीनी बनाने के लिए कहा गया है।

श्रीमती चौधरी ने कहा कि उनकी अध्यक्षता में एक निगरानी समिति भी स्थापित की गई है जिसमें प्रमुख विभागों के प्रशासनिक सचिव मैंबर होंगे। समिति माह में कम-से-कम एक बार मीटिंग करेगी और हर केस में दिए जा रहे राहत उपाय की विस्तृत समीक्षा करेगी।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रभावित व्यक्तियों तक राहत उपायों की सुविधाजनक पहुँच के लिए सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग ऐसे सभी व्यक्तियों का रिकार्ड बरकरार रखेगा और कल्याण योजनाओं के अंतर्गत दी जाती राहत संबंधी उनको लिखित रूप में अवगत करवाया जायेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब प्रभावित व्यक्ति कोई राहत लेने के लिए विभाग को आवेदन करता है तो विभाग संबंधित विभागों के साथ तालमेल करेगा और अपेक्षित राहत मुहैया करवाई जायेगी।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि हर ब्लाक के सी.डी.पी.ओ को ऐसे बच्चों के लिए विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया है और वह बच्चों के लिए सलाहकार-कम-प्रेरक के तौर पर काम करेंगे। इसके साथ ही बच्चों को संबंधित जिले की बाल कल्याण समिति के सामने भी पेश किया जायेगा।

श्रीमती चौधरी ने कहा कि जुलाई 2021 से कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों और रोजी-रोटी कमाने वाला सदस्य गंवा चुके परिवारों को राहत देने के लिए राज्य सरकार की तरफ से सामाजिक सुरक्षा पैंशन के रूप में प्रति माह 1500 रुपए, ग्रैजूएशन तक मुफ्त शिक्षा दी जायेगी। कोविड प्रभावित व्यक्ति अशीर्वाद योजना के अंतर्गत 51000 रुपए के अनुदान के लिए भी योग्य होंगे और राज्य स्मार्ट राशन कार्ड स्कीम के अंतर्गत मुफ्त राशन और सरबत सेहत बीमा योजना के लाभ लेने के भी हकदार होंगे। राज्य सरकार प्रभावित पारिवारिक सदस्यों को घर-घर रोजगार और कारोबार मीशन के अंतर्गत उचित नौकरी ढूँढने में भी सहायता करेगी।

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