Shashi Tharoor Congress : केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर एक बार फिर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने पार्टी हाईकमान द्वारा बुलाई गई अहम बैठक में शामिल न होकर नेतृत्व को सख्त राजनीतिक संकेत दे दिया है। 24 जनवरी 2026 को सामने आए इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की केरल रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और पार्टी के भीतर बढ़ती खटास को उजागर किया है।
मामला कोच्ची में हुई हालिया महापंचायत से जुड़ा है, जहां शशि थरूर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल को लेकर असहज महसूस करते दिखे। बताया गया कि उनसे 15 मिनट पहले पहुंचने और अपना भाषण जल्द समाप्त करने को कहा गया, क्योंकि Rahul Gandhi के आने की सूचना थी। थरूर को यह भी बताया गया कि उनके बाद केवल राहुल गांधी ही मंच से संबोधन करेंगे।
मंच पर घटनाक्रम ने बढ़ाई नाराजगी
कार्यक्रम में स्थिति तब और बिगड़ी जब राहुल गांधी के भाषण के बाद छह अन्य नेताओं ने भी मंच से संबोधन किया, जिनमें से कुछ नेता पार्टी में शशि थरूर से कनिष्ठ माने जाते हैं। सबसे अहम बात यह रही कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में कई वरिष्ठ नेताओं का नाम लिया, लेकिन चार बार के सांसद और तिरुवनंतपुरम से लगातार जीत दर्ज करने वाले शशि थरूर का उल्लेख तक नहीं किया। इसे थरूर ने अपने राजनीतिक अपमान के तौर पर लिया।
बैठक से गैरहाज़िरी बना बड़ा संकेत
महापंचायत विवाद के बाद केरल चुनावों को लेकर दिल्ली और केरल के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई गई, लेकिन शशि थरूर उसमें शामिल नहीं हुए। उनकी यह अनुपस्थिति केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के प्रति असहमति का सार्वजनिक संकेत मानी जा रही है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, थरूर की चुप्पी इस बार ज्यादा मुखर मानी जा रही है।
पुराने मतभेद फिर आए सामने
यह पहला मौका नहीं है जब शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद उजागर हुए हों। पिछले वर्ष उन्होंने एक मलयाली मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी आकांक्षा जाहिर की थी। इसके अलावा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनका राष्ट्रवादी रुख पार्टी लाइन से अलग नजर आया था, जिससे नेतृत्व के साथ दूरी और बढ़ी। हालांकि बाद में उन्हें संसदीय समिति (वैश्विक मामलों) का अध्यक्ष बनाए रखने से यह संकेत मिला था कि मामला संभल रहा है।
केरल की राजनीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शशि थरूर की लोकप्रियता के बावजूद उन्हें किनारे करना कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है। एक सर्वे रिपोर्ट में 28 प्रतिशत लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पसंद किया था, जो मौजूदा मुख्यमंत्री से भी अधिक था। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनका असंतोष पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष
केरल कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर पहले से ही कई दावेदार हैं। राष्ट्रीय महासचिव K C Venugopal समेत कई वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में माने जाते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शशि थरूर की बढ़ती लोकप्रियता ही उन्हें हाशिए पर डालने की वजह बन रही है।
विश्लेषण
केरल में कांग्रेस पहले ही दस साल से सत्ता से बाहर है और इस बार वापसी की उम्मीदें तभी मजबूत हो सकती थीं जब पार्टी एकजुट दिखती। लेकिन शशि थरूर जैसे बड़े और लोकप्रिय चेहरे की नाराजगी ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को कमजोर कर दिया है। अगर यह मतभेद जल्द नहीं सुलझे, तो इसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ मोर्चे को मिल सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Shashi Tharoor ने हाईकमान बैठक से दूरी बनाई
- कोच्ची महापंचायत में प्रोटोकॉल विवाद से नाराजगी
- Rahul Gandhi के भाषण में नाम न लिए जाने से बढ़ा असंतोष
- केरल चुनाव से पहले कांग्रेस की एकता पर सवाल
- लोकप्रिय चेहरे की उपेक्षा से पार्टी को संभावित नुकसान








