China Silver Export Rules : दुनिया के फैसलों की दिशा बदलने वाले चीन ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाया है, जिसकी गूंज ग्लोबल बाजारों से लेकर डिफेंस और एनर्जी सेक्टर तक सुनाई दे रही है।
1 जनवरी 2026 से China ने चांदी के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लागू करने का फैसला किया है। अब बिना सरकारी लाइसेंस कोई भी कंपनी चीन से बाहर चांदी एक्सपोर्ट नहीं कर सकेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब मोबाइल फोन, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और मिसाइल सिस्टम जैसे अहम सेक्टर चांदी पर तेजी से निर्भर होते जा रहे हैं।

इंडस्ट्रियल मेटल से स्ट्रेटेजिक हथियार तक
अब तक चांदी को दुनिया एक इंडस्ट्रियल मेटल मानती रही थी, लेकिन चीन ने इसे रणनीतिक हथियार का दर्जा दे दिया है। रेयर अर्थ मिनरल्स के बाद यह ड्रैगन की अगली बड़ी चाल मानी जा रही है, जिसने ग्लोबल पॉलिटिक्स में नई बहस छेड़ दी है।
माइनिंग कम, कंट्रोल सबसे ज्यादा
भले ही चीन दुनिया की कुल चांदी माइनिंग का करीब 13% ही करता हो, लेकिन असली ताकत रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग में है। इस मोर्चे पर चीन ग्लोबल सिल्वर सप्लाई का 60 से 70% तक कंट्रोल करता है। यानी चांदी कहां जाएगी और कितनी जाएगी, इसका फैसला अब बीजिंग के हाथ में होगा।
नया एक्सपोर्ट सिस्टम, सख्त शर्तें
1 जनवरी 2026 से चीन ने अप्रूवल बेस्ड एक्सपोर्ट सिस्टम लागू किया है। इसके तहत केवल सरकारी मान्यता प्राप्त कंपनियां ही लाइसेंस लेकर चांदी निर्यात कर सकेंगी। 2026 और 2027 के लिए सिर्फ 44 कंपनियों को इसकी इजाजत दी गई है, वो भी कड़ी शर्तों के साथ।
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स्ट्रेटेजिक मटेरियल का दर्जा
सरकारी अखबार Securities Times के मुताबिक, चीन ने चांदी को औपचारिक रूप से स्ट्रेटेजिक मटेरियल घोषित कर दिया है, ठीक वैसे ही जैसे पहले रेयर अर्थ मिनरल्स को किया गया था। इसका मतलब साफ है कि अब चांदी सिर्फ कारोबार नहीं, रणनीति का हिस्सा है।
किस-किस को लगेगा झटका
अमेरिका और यूरोप, जहां सोलर एनर्जी, सेमीकंडक्टर और डिफेंस इंडस्ट्री चांदी पर निर्भर हैं, इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे। जापान और साउथ कोरिया जैसे देश, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक चिप्स में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं, वहां भी दबाव बढ़ेगा। India भी, जो सोलर एनर्जी मिशन, ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अब भी चांदी के लिए आयात पर निर्भर है।
कीमतों पर असर तय
ग्लोबल सप्लाई घटेगी, जबकि डिमांड पहले से ही ऊंची है। इंडस्ट्रियल इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में चांदी की कीमतों में तेज उछाल की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अब चांदी के सस्ते होने की संभावना बेहद कम रह गई है।
चीन की रणनीति क्या कहती है
चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल निर्माता, इलेक्ट्रॉनिक्स हब और ईवी सेक्टर का ग्लोबल लीडर है। इन सभी क्षेत्रों में चांदी रीढ़ की हड्डी की तरह है। चीन चाहता है कि पहले उसकी घरेलू जरूरतें पूरी हों और फिर बाकी दुनिया को सप्लाई मिले—वो भी उसकी शर्तों पर।
भविष्य की बड़ी तस्वीर
रेयर अर्थ मिनरल्स के बाद अब चांदी को लेकर चीन ने साफ संकेत दे दिया है कि वह सिर्फ “फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड” नहीं, बल्कि “रिसोर्स कंट्रोलर ऑफ द वर्ल्ड” बनना चाहता है। यह मुद्दा अब केवल कीमतों का नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की सुरक्षा, डिफेंस इंडस्ट्री और एनर्जी फ्यूचर से जुड़ चुका है।
क्या है पृष्ठभूमि
सालों तक नजरअंदाज की गई चांदी अब जियोपॉलिटिक्स का अगला बड़ा हथियार बन चुकी है। चीन के इस फैसले ने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या चांदी भी आने वाले समय में रेयर अर्थ की तरह रणनीतिक संकट का कारण बनेगी।

मुख्य बातें (Key Points)
- 1 जनवरी 2026 से चीन ने चांदी के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाया
- सिर्फ लाइसेंसधारी 44 कंपनियों को एक्सपोर्ट की अनुमति
- ग्लोबल सप्लाई घटने से चांदी की कीमतें बढ़ने की आशंका
- चांदी अब इंडस्ट्रियल नहीं, स्ट्रेटेजिक मटेरियल बन चुकी है








