China Iran MANPADS Supply: अमेरिका और ईरान के बीच इस समय सीजफायर की बेहद नाजुक स्थिति बनी हुई है। शांति की इस कोशिश के बीच एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यह पता लगाया है कि चीन अगले कुछ हफ्तों के भीतर ईरान को एक आधुनिक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम सौंपने की तैयारी कर रहा है। यह खबर ऐसे वक्त में सामने आई है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता जारी है।
‘F-15 गिराने के बाद चीन पर शक और गहरा’
हाल ही में ईरान ने अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस वक्त कहा था कि इसे हीट सीकिंग पोर्टेबल मिसाइल ने मारा है, यानी ऐसी मिसाइल जिसे एक सैनिक कंधे पर रखकर आसानी से चला सकता है। इसे MANPADS (Man-Portable Air-Defense Systems) कहा जाता है। अब जब CNN की रिपोर्ट में चीन द्वारा ईरान को ठीक इसी तरह के हथियार भेजने की बात सामने आई है, तो अमेरिका का शक चीन की तरफ और गहरा हो गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चीन इन हथियारों को सीधे ईरान नहीं भेज रहा बल्कि तीसरे देशों के रास्ते ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहा है ताकि असली स्रोत छिपा रहे। यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चीन की छवि को और संदिग्ध बना रही है।
‘क्या है FN-6 मिसाइल और कितनी खतरनाक है?’
CNN रिपोर्ट के मुताबिक चीन जो मिसाइल सिस्टम ईरान को भेजने की तैयारी कर रहा है, वह FN-6 (या हंगिंग सिक्स) है। यह चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का सबसे महत्वपूर्ण MANPADS सिस्टम माना जाता है। इसकी खासियतें देखें तो यह समझ आता है कि यह कितना घातक हथियार है।
इसकी अधिकतम रेंज 6 किलोमीटर तक है और यह 15 मीटर से लेकर 4 किलोमीटर की ऊंचाई तक के टारगेट को मार सकती है। इसकी स्पीड 600 मीटर प्रति सेकंड है। इसमें डक एरोडायनेमिक्स डिज़ाइन लगा है जिससे यह बेहद तेजी से दिशा बदल सकती है और टारगेट को सटीक निशाने पर मार सकती है।
FN-6 एक इंफ्रारेड गाइडेड सिस्टम से लैस है जो फ्लेयर्स यानी धोखा देने वाले डिकॉय को भी नजरअंदाज कर सकती है। इसे साल 2000 में लॉन्च किया गया था और अब इसका बेहतर वर्जन भी तैयार है। चीन ने पहले से ही FN-6 को पाकिस्तान, मलेशिया, कंबोडिया, सूडान और पेरू जैसे देशों को बेचा है।
‘सीजफायर का फायदा उठा रहा ईरान?’
CNN का कहना है कि ईरान सीजफायर का फायदा उठाकर अपने हथियारों को फिर से जमा करने की कोशिश कर रहा है और इसमें चीन बड़े पैमाने पर मदद कर रहा है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों का यह भी कहना है कि ये MANPADS अमेरिकी सेना के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं, खासकर अगर सीजफायर टूट गया तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
यह मिसाइलें छोटी और हल्की हैं, एक सैनिक इन्हें कंधे पर रखकर आसानी से दुश्मन का हेलीकॉप्टर, ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट मार गिरा सकता है। इनका छोटा आकार ही इन्हें सबसे ज्यादा खतरनाक बनाता है क्योंकि इन्हें छिपाना आसान है और आतंकवादी संगठन भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
‘चीन का दोहरा खेल: मध्यस्थ भी, हथियार सप्लायर भी?’
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चीन एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की मध्यस्थता का काम कर रहा है, और दूसरी तरफ अगर वह ईरान को हथियार भी दे रहा है तो यह एक बेहद उलझन वाली और विरोधाभासी स्थिति है।
CNN रिपोर्ट के सामने आने के बाद वाशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि “चीन ने इस संघर्ष में किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं, यह खबर पूरी तरह गलत है।” उन्होंने आगे कहा कि “चीन एक जिम्मेदार देश है, हम अपनी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करते हैं। अमेरिका से अपील है कि बिना सबूत के आरोप न लगाएं और सनसनीखेज खबरें न फैलाएं।”
‘ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से पहले बढ़ सकता है तनाव’
अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होनी है। ऐसे में इस MANPADS डील की खबर के बाद दोनों देशों के बीच गरमागरमी बढ़ सकती है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ईरान को हमलावर हथियारों की बजाय रक्षात्मक सिस्टम दे रहा है, जबकि रूस ईरान को ज्यादा आक्रामक सैन्य सहायता दे रहा है।
लेकिन अमेरिका के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। अगर चीन सच में MANPADS ईरान को पहुंचाता है तो मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद काफी कम हो सकती है। फिलहाल सीजफायर बरकरार है, लेकिन पर्दे के पीछे हथियारों की होड़ साफ दिख रही है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता जारी है और अगले दो दिनों में यह तय हो सकता है कि यह युद्ध किस मोड़ पर जाने वाला है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- CNN रिपोर्ट के अनुसार चीन ईरान को FN-6 MANPADS मिसाइल सिस्टम तीसरे देशों के रास्ते भेजने की तैयारी कर रहा है।
- ईरान ने हाल ही में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को इसी तरह के पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम से मार गिराया था।
- चीन एक तरफ मध्यस्थ बन रहा है तो दूसरी तरफ हथियार सप्लायर होने के आरोप झेल रहा है।
- अगले महीने ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से पहले यह मामला दोनों देशों के रिश्तों में नई तल्खी ला सकता है।













