Chardham Yatra Non-Hindus Entry Ban : उत्तराखंड के प्रसिद्ध गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 25 जनवरी 2026 को श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। यह पाबंदी केवल गंगोत्री मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में भी प्रभावी होगी। इसी बीच बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने भी संकेत दिए हैं कि केदारनाथ, बद्रीनाथ और समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव जल्द बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
गंगोत्री समिति ने क्यों लिया यह फैसला
गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि समिति ने धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मंदिर क्षेत्र की पवित्रता और परंपरागत व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। समिति का कहना है कि नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्था की जाएगी।
केदारनाथ-बद्रीनाथ में भी लग सकती है रोक
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी बीकेटीसी के अध्यक्ष और भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और बीकेटीसी के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव जल्द ही समिति की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
हेमंत द्विवेदी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा सबसे जरूरी है। उनके मुताबिक ऐतिहासिक तौर पर केदारनाथ और माणा क्षेत्र के मंदिरों में सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति रही है लेकिन गैर बीजेपी सरकारों के दौरान इन परंपराओं की अनदेखी हुई।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब इन नियमों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी का बड़ा बयान
इस मुद्दे पर जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रशासन तीर्थ स्थलों का प्रबंधन करने वाली समितियों और संस्थाओं की सिफारिशों के मुताबिक ही कार्रवाई करेगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जितने भी धार्मिक स्थल हैं, पौराणिक स्थल हैं और देवस्थान हैं, इन स्थानों को देखने वाले और संचालन करने वाले धार्मिक संगठनों के लोग, तीर्थ सभा, गंगा सभा, केदार सभा, बद्री-केदार मंदिर समिति और पूज्य संत समाज जो भी राय देंगे, सरकार उसी के अनुसार आगे बढ़ेगी।
साथ ही उन्होंने बताया कि ये स्थान पौराणिक महत्व के हैं और पहले के समय में इनके लिए कुछ कानून भी बने हुए हैं। सरकार उन कानूनों का भी अध्ययन कर रही है और उसी आधार पर आगे बढ़ेगी।
बीकेटीसी अध्यक्ष ने कही ये बड़ी बात
हेमंत द्विवेदी ने विस्तार से समझाते हुए कहा कि श्री केदारनाथ जी और बद्रीनाथ जी धाम कोई पर्यटक स्थल नहीं है बल्कि सनातन परंपराओं का सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र है। उन्होंने कहा कि यहां प्रवेश का प्रश्न नागरिक का अधिकार नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और परंपराओं का है।
उन्होंने बताया कि आदरणीय शंकराचार्य जी इस पूरी व्यवस्था को बना कर गए थे और आदिकाल से यह व्यवस्था चली आ रही है। लोगों की लंबे समय से यह मांग रही है कि धार्मिक स्थलों और बड़े धामों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गैर हिंदू कौन है। उनके मुताबिक जो सनातन धर्म को मानते हैं, जो सनातन धर्म के अनुयायी हैं, जो भगवान पर आस्था रखते हैं और अपने धार्मिक स्थलों पर विश्वास रखते हैं उन सबका स्वागत है। लेकिन जो सनातन धर्म और परंपराओं का पालन नहीं करते उनके लिए यह प्रतिबंध है।
अवैध धार्मिक ढांचों पर भी एक्शन
इसी बीच हेमंत द्विवेदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस आदेश की भी तारीफ की जिसमें राज्य भर में अवैध धार्मिक ढांचों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने इसे उत्तराखंड की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। साथ ही कहा कि राज्य सरकार और मंदिर समितियों के बीच बेहतर तालमेल से मंदिरों की पवित्रता और परंपराओं की सुरक्षा और मजबूत होगी।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
इस फैसले पर विपक्षी कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि इस पर उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी क्योंकि यह बीजेपी का अपना एजेंडा है।
हरीश रावत ने कहा कि दुनिया भर में दूसरे धर्म अपने पूजा स्थलों की ओर लोगों को आकर्षित करते हैं। वे रोक नहीं लगाते बल्कि लोगों को बुलाते हैं ताकि उनके धर्म की अच्छाइयों और महानता को दूसरे लोग भी समझ सकें।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब यह नया रिवाज चला है। लगता है चुनावी एजेंडे में और कोई मुद्दे नहीं रह गए हैं इसलिए नए तरीके के एजेंडे इजाद किए गए हैं।
हरीश रावत ने एक और सवाल उठाया कि घर का मंदिर, गांव का मंदिर और बड़े-बड़े मंदिर बनाने में गैर हिंदुओं से बनवा रहे हैं। कावड़ भी गैर हिंदू बना रहे हैं।
सुजाता पॉल ने पूछा – हिंदू कौन
कांग्रेस नेता सुजाता पॉल ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि पहले यह बताइए कि कौन होते हैं हिंदू? हिंदू होने की परिभाषा क्या है?
उन्होंने पूछा कि जिन लोगों को वीआईपी दर्शन कराते हैं, बड़े-बड़े होटलों में ठहराते हैं, उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं और फेसबुक-ट्विटर पर डालते हैं, क्या वो अब दर्शन नहीं कर पाएंगे? उन्होंने सारा अली खान जैसी हस्तियों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया जिनके नाम के आगे खान लगता है।
सुजाता पॉल ने एक और बड़ा सवाल उठाया कि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी तो सिख हैं, क्या उन्हें भी रोकेंगे? और जो आदिवासी लोग हैं क्या उनको भी रोकेंगे?
चारधाम यात्रा कब से शुरू होगी
चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर छह महीने की शीतकालीन बंदी के बाद 23 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खुलेगा। अधिकारियों के मुताबिक इसकी तारीख और मुहूर्त बसंत पंचमी के मौके पर नरेंद्र नगर के टिहरी राजमहल में पारंपरिक पूजा के बाद तय किया गया।
उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री और यमुनोत्री धाम 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख महाशिवरात्रि के दिन घोषित की जाएगी।
पिछले साल कितने श्रद्धालु आए थे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2025 के यात्रा सीजन में केदारनाथ धाम में 16.5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और लगभग इतने ही श्रद्धालुओं ने बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए।
यह आंकड़ा बताता है कि चारधाम यात्रा देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है और हर साल लाखों लोग इन पवित्र धामों के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं।
क्या है पूरा मामला
यह दोनों बयान ऐसे समय पर आए हैं जब देश भर से लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। गंगोत्री मंदिर समिति ने धार्मिक परंपराओं और मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने के नाम पर गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने संकेत दिए हैं कि इसी तरह का प्रस्ताव उनकी बोर्ड बैठक में भी रखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार मंदिर समितियों और धार्मिक संगठनों की सिफारिशों के अनुसार ही कार्रवाई करेगी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे चुनावी एजेंडा बताते हुए हिंदू होने की परिभाषा पर सवाल उठाए हैं। यह मामला आने वाले दिनों में गरमा सकता है क्योंकि चारधाम यात्रा का सीजन पास आ रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- गंगोत्री मंदिर समिति ने 25 जनवरी को गैर हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध का फैसला लिया, यह रोक मुखबा गांव में भी लागू होगी
- बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के सभी मंदिरों में भी ऐसा प्रस्ताव जल्द बोर्ड बैठक में रखा जाएगा
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार मंदिर समितियों की सिफारिशों के अनुसार ही कार्रवाई करेगी
- पूर्व सीएम हरीश रावत ने इसे बीजेपी का चुनावी एजेंडा बताया, कांग्रेस ने हिंदू होने की परिभाषा पर सवाल उठाए
- बद्रीनाथ 23 अप्रैल को, गंगोत्री-यमुनोत्री 19 अप्रैल को खुलेंगे, केदारनाथ की तारीख महाशिवरात्रि पर घोषित होगी






