Canada Khalistan Protest Indian Embassy Ottawa — रविवार को कनाडा की राजधानी ओटावा में भारतीय दूतावास के बाहर खालिस्तान समर्थकों ने प्रदर्शन किया। यह विरोध भारतीय राजदूत के उस सख्त बयान के बाद हुआ, जिसमें निज्जर हत्याकांड को लेकर सबूत पेश करने की मांग की गई थी। ठंड और जमी बर्फ के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे लगाए।

दूतावास के बाहर बढ़ा तनाव
कनाडा में खालिस्तान समर्थकों ने भारतीय दूतावास के सामने खालिस्तानी झंडे लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उस बयान से भड़का, जिसमें अलगाववाद पर कड़ा रुख अपनाया गया था। दूतावास के बाहर जमी बर्फ और ठंडे मौसम के बावजूद वे लंबे समय तक डटे रहे।
प्रधानमंत्री और राजदूत के खिलाफ नारे
प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने नरेंद्र मोदी और दिनेश पटनायक के खिलाफ नारे लगाए। वे बार-बार हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराते रहे और इसी मुद्दे को अपने विरोध का आधार बनाया।
राजदूत का दो-टूक संदेश
ओटावा में एक चैनल को दिए इंटरव्यू में भारतीय राजदूत ने स्पष्ट कहा था कि यदि भारत पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनके सबूत दिए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा में खालिस्तान समर्थक लंबे समय से गतिविधियां चला रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी बयान के बाद अलगाववादी और आक्रामक हो गए।
कनाडा सरकार पर भी सवाल
राजदूत ने इंटरव्यू में यह भी संकेत दिया था कि कनाडा सरकार की ढिलाई के कारण खालिस्तान समर्थकों को लगातार गतिविधियां चलाने का मौका मिल रहा है। इस टिप्पणी को प्रदर्शनकारियों ने अपने खिलाफ कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा और दूतावास के बाहर विरोध तेज कर दिया।
कनाडाई झंडे के इस्तेमाल पर विवाद
प्रदर्शन के दौरान कनाडाई झंडे के इस्तेमाल पर भी सवाल उठे। कनाडा के सोशल एक्टिविस्ट एथन ने अपने X हैंडल पर लिखा कि खालिस्तान समर्थक नियमित तौर पर प्रदर्शन करते हैं और अब वे कनाडा के झंडे का उपयोग कर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कनाडा भी उनके एजेंडे का हिस्सा है। उनका कहना था कि ये समूह कनाडाई जमीन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं।
भारत दौरे का भी किया विरोध
खालिस्तान समर्थकों ने ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी के भारत दौरे का भी विरोध किया था। वे भारत के साथ व्यापारिक संबंधों के खिलाफ थे, जबकि यह दौरा नए व्यापारिक रिश्ते स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया था। प्रीमियर डेविड एबी शिष्टमंडल के साथ भारत आए थे और अब दौरा पूरा कर वापस लौट चुके हैं।
आम लोगों पर असर
इस तरह के प्रदर्शन सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करते, लेकिन जब कूटनीतिक मिशनों के बाहर तनाव बढ़ता है तो सुरक्षा व्यवस्था सख्त करनी पड़ती है। इससे दूतावास से जुड़े कामों और स्थानीय आवाजाही पर असर पड़ सकता है।
जानें पूरा मामला
भारतीय दूतावास के बाहर यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब खालिस्तान समर्थकों पर सख्ती को लेकर भारत ने खुलकर अपनी बात रखी। राजदूत के बयान ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया और अलगाववादी समूहों ने इसे अपने विरोध का आधार बना लिया।
मुख्य बातें (Key Points)
- ओटावा में भारतीय दूतावास के बाहर खालिस्तान समर्थकों का प्रदर्शन।
- राजदूत के बयान के बाद भारत विरोधी नारेबाजी तेज हुई।
- ठंड और जमी बर्फ के बावजूद प्रदर्शनकारी डटे रहे।
- कनाडाई झंडे के इस्तेमाल पर सोशल एक्टिविस्टों ने आपत्ति जताई।








