Union Budget 2026 India : 1 फरवरी 2026 को जब निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी, तो क्या आप उनके भाषण को पूरी तरह समझ पाएंगे? बजट शब्द सुनते ही अक्सर लोगों को लगता है कि यह तो अर्थशास्त्रियों की समझ की चीज है। लेकिन सच यह है कि बजट आपके और हमारे घर के हिसाब-किताब का ही एक विशाल रूप है। आइए जानते हैं वो पांच बातें जो बजट को आसानी से समझने में मदद करेंगी।
‘बजट’ शब्द कहां से आया?
क्या आपने कभी सोचा कि बजट शब्द का मतलब क्या होता है? इसकी जड़ें लेटिन के “बुलगा” और फ्रेंच के “बुकेट” में छिपी हैं। इसका अर्थ है चमड़े का थैला। पुराने जमाने में व्यापारी इसी थैले में अपना हिसाब-किताब रखते थे। ब्रिटेन में एक परंपरा थी कि वित्त मंत्री लाल चमड़े के बैग में दस्तावेज लेकर संसद आते थे। वहीं से यह शब्द बन गया “बजट”। आसान भाषा में कहें तो यह सरकार की साल भर की कमाई और खर्च का पूरा लेखा-जोखा है।
बजट में क्या होता है?
बजट में वित्त मंत्री बताते हैं कि आने वाले साल में पैसा कहां से आएगा। जैसे आपके इनकम टैक्स से या जीएसटी से। साथ ही यह भी बताया जाता है कि वो पैसा कहां खर्च होगा। जैसे सेना पर, फ्री राशन पर या नई सड़कों पर। इसे ही “बजट आकलन” (Budget Estimate) कहते हैं। यह देश की आर्थिक दिशा तय करता है।
पहला शब्द: वित्त वर्ष (Fiscal Year)
वित्त वर्ष 1 जनवरी से नहीं बल्कि 1 अप्रैल से शुरू होता है और 31 मार्च तक चलता है। इसे ही हिसाब-किताब का साल माना जाता है। सरकार अपनी सभी योजनाओं और खर्चों का हिसाब इसी अवधि में रखती है। जब भी आप “वित्त वर्ष 2025-26” सुनें, तो समझ जाइए कि बात अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की हो रही है।
दूसरा शब्द: डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स
डायरेक्ट टैक्स वो है जो आप अपनी सैलरी से सीधे सरकार को देते हैं। जैसे इनकम टैक्स। वहीं इनडायरेक्ट टैक्स वो है जो आप किसी सामान या सेवा पर देते हैं। जैसे चिप्स के पैकेट पर या मूवी टिकट पर लगने वाला जीएसटी। आम आदमी पर इनडायरेक्ट टैक्स का असर सबसे ज्यादा पड़ता है क्योंकि रोजमर्रा की हर चीज पर यह लागू होता है।
तीसरा शब्द: फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा)
इसे समझना बेहद आसान है। मान लीजिए आपकी कमाई ₹100 है और खर्च है ₹120। तो वो ₹20 का अंतर घाटा है। यही फिस्कल डेफिसिट है। जब सरकार विकास कार्यों के लिए अपनी कमाई से ज्यादा खर्च करती है, तो उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं। यह बजट का एक अहम पैमाना है जो देश की आर्थिक सेहत बताता है।
चौथा शब्द: विनिवेश (Disinvestment)
जब सरकार अपनी किसी कंपनी का कुछ हिस्सा बेचकर पैसा जुटाती है, तो उसे विनिवेश कहते हैं। एयर इंडिया या LIC जैसी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचना इसका उदाहरण है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है जो विकास कार्यों में लगाया जाता है।
पांचवां शब्द: जीडीपी (GDP)
जीडीपी यानी Gross Domestic Product। एक साल में देश के भीतर बने सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू। सरल भाषा में कहें तो यह देश की तरक्की का रिपोर्ट कार्ड है। अगर जीडीपी बढ़ रही है तो इसका मतलब है देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
क्या सरकार मनमर्जी से टैक्स लगा सकती है?
इसका जवाब है नहीं। सरकार मनमानी नहीं कर सकती। बजट के साथ एक वित्त विधेयक (Finance Bill) लाया जाता है। जब तक संसद इस पर मोहर नहीं लगा देती, तब तक कोई भी नया टैक्स लागू नहीं होता। यह लोकतंत्र की वो व्यवस्था है जो आम जनता के हितों की रक्षा करती है।
सब्सिडी: आम आदमी को सहारा
सब्सिडी वो मदद है जो सरकार आम नागरिकों को देती है। जब सरकार आपको सस्ती खाद, सस्ता राशन या सस्ती बिजली देती है, तो उसका अतिरिक्त खर्च सरकार खुद उठाती है। इसे ही सब्सिडी कहते हैं ताकि महंगाई का बोझ आप पर कम पड़े।
आम पाठक पर असर
बजट सीधे तौर पर आपकी जेब से जुड़ा है। टैक्स स्लैब में बदलाव हो या सब्सिडी में कटौती, इसका असर हर परिवार पर पड़ता है। अगर आप इन पांच शब्दों को समझ गए तो 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री का पूरा भाषण आसानी से समझ आ जाएगा। बजट कोई डरावनी चीज नहीं है। यह आपके घर के बजट का ही एक विशाल रूप है। अगर यह सही है तो देश खुशहाल है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बजट शब्द चमड़े के थैले से निकला है जिसमें पुराने समय में व्यापारी हिसाब रखते थे
- वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है
- फिस्कल डेफिसिट तब होता है जब सरकार का खर्च कमाई से ज्यादा हो
- बिना संसद की मंजूरी के सरकार कोई नया टैक्स लागू नहीं कर सकती
- सब्सिडी के जरिए सरकार आम आदमी पर महंगाई का बोझ कम करती है








