Breathing Balance हमारे शरीर का ऐसा रहस्य है, जिसे अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं। पंडित जी के अनुसार हमारी बाईं और दाहिनी नासिका से चलने वाली सांस सीधे तौर पर शरीर के पित्त और कफ को प्रभावित करती है।
अगर इसे सही ढंग से समझ लिया जाए, तो कई बीमारियों से बचाव संभव है।
बाईं और दाहिनी नासिका का प्रभाव
जब बाईं नाक से सांस चलती है तो शरीर में शीतलता बढ़ती है। इससे कफ की मात्रा बढ़ती है और पित्त शांत होता है।
इसके विपरीत, जब दाहिनी नासिका सक्रिय होती है तो शरीर में उष्णता बढ़ती है। इससे पित्त और अम्लता में वृद्धि होती है।
स्वस्थ व्यक्ति में सामान्य रूप से एक नासिका लगभग 54 मिनट तक सक्रिय रहती है, फिर स्वर बदल जाता है। अगर एक ही नासिका दो-तीन घंटे तक चलती रहे, तो यह असंतुलन या बीमारी का संकेत हो सकता है।
गर्मी और सर्दी में आसान उपाय
अगर शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस हो, लू लग जाए या पित्त बढ़ जाए तो कुछ देर दाहिनी करवट लेट जाएं। इससे बाईं नासिका सक्रिय होगी और शरीर की गर्मी कम होगी।
वहीं, अगर सर्दी-जुकाम या बुखार हो तो बाईं करवट लेटें। इससे दाहिना स्वर चलेगा और शरीर में गर्मी बढ़ेगी, जिससे राहत मिल सकती है।
सोने की सही मुद्रा क्यों जरूरी?
अक्सर कहा जाता है कि बाईं करवट सोना चाहिए। इसका कारण पाचन से जुड़ा है।
जब आप बाईं करवट सोते हैं तो दाहिनी नासिका सक्रिय होती है। इससे मणिपूरक चक्र और जठराग्नि जागृत होती है, जो भोजन को जल्दी पचाने में मदद करती है।
अगर दाहिनी करवट ज्यादा देर सोते हैं तो पाचन मंद पड़ सकता है, जिससे आलस्य और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
सोने से पहले क्या करें?
स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए पहले कुछ मिनट सीधे लेटकर गहरी सांस लें। फिर करवट बदलते हुए श्वास पर ध्यान दें। इससे शरीर और मन दोनों शांत होते हैं।
दोनों नासिकाओं से सांस का अर्थ
अगर शांत अवस्था में दोनों नासिकाओं से समान रूप से सांस चल रही है और यह लंबे समय तक बनी रहे, तो यह गंभीर असंतुलन का संकेत भी हो सकता है।
हालांकि दौड़ने या मेहनत करने पर दोनों नासिकाओं से सांस चलना सामान्य है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बाईं नासिका से शीतलता, दाहिनी से उष्णता बढ़ती है।
- 54 मिनट बाद स्वर बदलना सामान्य है।
- गर्मी में दाहिनी करवट, सर्दी में बाईं करवट लाभकारी।
- बाईं करवट सोने से पाचन बेहतर होता है।
- लंबे समय तक एक ही स्वर चलना असंतुलन का संकेत।








