BJP की धड़ा-धड़ गिरती जा रही है विकेट, अब इस मंत्री और विधायकों ने छोड़ी भाजपा

The News Air- यूपी चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद भाजपा में भगदड़ मची है। एक-एक कर मंत्री और विधायक इस्तीफा दे रहे हैं। गुरुवार को दोपहर तक एक और मंत्री व तीन विधायकों ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। यानी एक दिन में 4 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसमें मंत्री धर्म सिंह सैनी, विधायक मुकेश वर्मा, विनय शाक्य और बाला प्रसाद अवस्थी शामिल हैं।

मुकेश वर्मा शिकोहाबाद से विधायक हैं जबकि विनय शाक्य ओरैया की बिधूना सीट से विधायक हैं। धर्म सिंह सैनी, मुकेश वर्मा और विनय शाक्य ने अलग-अलग सपा कार्यालय पहुंचकर अखिलेश से मुलाकात की। इससे पहले मंगलवार को योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और बुधवार को दारा सिंह चौहान ने इस्तीफा दिया था। यानी बीते तीन दिन में तीन मंत्रियों ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, अब तक 14 विधायक (इनमें मंत्री भी शामिल) पार्टी छोड़ चुके हैं।

मौर्य बोले- स्वामी रूपी नेवला भाजपा को खत्म करके दम लेगा

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अब तक ये दे चुके हैं इस्तीफा…

नामसीट
स्वामी प्रसाद मौर्यपडरौना, कुशीनगर
धर्म सिंह सैनीनकुड़, सहारनपुर
भगवती सागरबिल्हौर
रोशनलाल वर्मातिलहर
विनय शाक्यबिधूना, औरैया
अवतार सिंह भड़ानामीरापुर
दारा सिंह चौहानमधुबन, मऊ
बृजेश प्रजापतितिंदवारी, बांदा
मुकेश वर्माशिकोहाबाद, फिरोजाबाद
दिग्विजय नारायण जय चौबेखलीलाबाद
बाला प्रसाद अवस्थीधौरहरा, लखीमपुर
राकेश राठौरसीतापुर
माधुरी वर्मानानपारा, बहराइच
आरके शर्माबिल्सी, बदायूं

स्वामी ने OBC, दलितों की उपेक्षा को बताया वजह

स्वामी प्रसाद ने इस्तीफे में लिखा था- मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों और विचारधारा में रहकर उत्तरदायित्व का निर्वहन किया, लेकिन दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और व्यापारियों की उपेक्षा के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।

दारा ने कहा- OBC को सम्मान नहीं

दारा सिंह ने योगी को भेजे इस्तीफे में लिखा- मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरे मन से निभाई, पर सरकार किसानों, पिछड़ों, वंचितों, बेरोजगारों की उपेक्षा कर रही है। इसके अलावा पिछड़ों और दलितों के आरक्षण को लेकर जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे मैं आहत हूं। इसी वजह से मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं।

भड़ाना ने किसानों की उपेक्षा होने से छोड़ी पार्टी

अवतार सिंह भड़ाना किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। वो किसानों की उपेक्षा होने से खुद को आहत बता रहे हैं। उन्हें गुर्जर समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है। वह पिछले कुछ समय से समुदाय को एकजुट करने की कोशिशों में जुटे हुए थे।

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