Monsoon Session: OBC रिज़र्वेशन से जुड़ा बिल आज होगा लोकसभा में पेश; जाट-मराठा व लिंगायत समुदाय को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली, 9 अगस्त (The News Air)
OBC रिज़र्वेशन को लेकर आज अहम फ़ैसला लिया जा सकता है। आज केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार लोकसभा में संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया जाएगा। इस बिल के माध्यम से पिछड़े वर्गों की पहचान करने के लिए राज्यों की शक्ति को बहाल करना है। इस बिल में संशोधन की मांग क्षेत्रीय दलों के साथ सत्ताधारी पार्टी के ओ.बी.सी. नेता लंबे समय से करते आ रहे थे। वहीं विपक्ष ने भी इस बिल का समर्थन किया है। इधर, राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ पर सदस्यों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि दी।
विपक्षी नेताओं ने किया समर्थन- विपक्ष ने भी इस बिल का समर्थन किया है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियों के नेता इस बिल के साथ हैं। खड़गे ने कहा-बाकी के मुद्दे अपनी जगह हैं, लेकिन ये मुद्दा पिछड़े वर्ग के लोगों और देश के हित में है। हम सबका फ़र्ज है कि ग़रीबों और पिछड़ों के हित में जो क़ानून आता है हम उसका समर्थन करें।
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद लाया जा रहा संशोधन विधेयक- हाल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान में 2018 के संशोधन के बाद सिर्फ़ केंद्र ही सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) को अधिसूचित कर सकता है। जबकि राज्यों के पास ये अधिकार नहीं थे। संशोधन विधेयक के बाद राज्यों को ओबीसी वर्ग में अपनी जरुरतों के अनुसार जातियों को अधिसूचित करने का अधिकार मिल जाएगा। इसका लाभ हरियाणा में जाट, महाराष्ट्र में मराठा, गुजरात में पटेल और कर्नाटक में लिंगायत समुदाय मिलेगा। इन्हें OBC में शामिल किया जा सकेगा।
आरक्षण को लेकर दूसरा वर्ग नाराज़ है- हाल में केंद्र सरकार ने मेडिकल एजुकेशन (OBC Reservation, Reservation in Medical courses) में ऑल इंडिया कोटे के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग(OBC) के छात्रों को 27% और ईडब्ल्यूएस(EWS) वर्ग के लिए 10% आरक्षण देने का फ़ैसला किया था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त विरोध देखने को मिला। हालांकि प्रधानमंत्री ने इसे एक ऐतिहासिक फ़ैसला बताया था। कहा गया कि पिछले कई सालों से मेडिकल की ऑल इंडिया सीटों(15 प्रतिशत) पर ओबीसी आरक्षण का मामला लटका हुआ था। मद्रास हाईकोर्ट ने इन सीटों पर ओबीसी आरक्षण को सुनिश्चित करने एक कमेटी बनाई थी। लेकिन बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देकर रुकवा दिया गया था।

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