UP Police Viral Video ने बिजनौर में पुलिस विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के Bijnor में एक महिला सिपाही और हेड कांस्टेबल का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आते ही Abhishek Jha ने सीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए।
वीडियो कथित तौर पर हेड कांस्टेबल ने ही अपने मोबाइल से बनाया था। घटना ने जिले में पुलिस की छवि और आंतरिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे सामने आया मामला
दोनों पुलिसकर्मी एक ही थाने में डेढ़ साल से अधिक समय से तैनात बताए गए हैं। इससे पहले भी वे अलग-अलग थानों में साथ रह चुके थे। वर्तमान में उनके आवास थाना परिसर के पास-पास हैं।
पिछले एक सप्ताह से वीडियो पहले विभाग के भीतर फैलता रहा, फिर धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला अधिकारियों तक पहुंचते ही जांच बैठा दी गई।
जांच और निलंबन
एसपी ने जांच की जिम्मेदारी सीओ अफजलगढ़ को सौंपी। जांच में दोनों के नाम सामने आए। रिपोर्ट के आधार पर दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
एसपी ने स्पष्ट कहा कि अनुशासनहीनता, गलत आचरण और विभाग की छवि धूमिल करने के आरोप में कार्रवाई की गई है।
वीडियो कैसे हुआ वायरल?
चर्चा है कि वीडियो हेड कांस्टेबल के मोबाइल में था और उनकी सिपाही पत्नी को इस संबंध पर पहले से शक था। विवाद की बात भी सामने आई है।
कहा जा रहा है कि मोबाइल में वीडियो देखने के बाद ही यह सार्वजनिक हुआ, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार और विभाग पर असर
महिला सिपाही अपने पति के साथ रहती है, जबकि हेड कांस्टेबल की पत्नी भी पुलिस विभाग में तैनात है। इस घटनाक्रम ने दोनों परिवारों और विभागीय माहौल पर असर डाला है।
एक ओर पुलिस की साख दांव पर है, दूसरी ओर व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल भी उठ रहा है।
विश्लेषण: अनुशासन की कसौटी पर पुलिस
पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई विभाग की साख बचाने की कोशिश होती है।
यह घटना बताती है कि सोशल मीडिया के दौर में निजी आचरण भी सार्वजनिक जवाबदेही का हिस्सा बन सकता है। विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- बिजनौर में महिला सिपाही और हेड कांस्टेबल का वीडियो वायरल।
- एसपी अभिषेक झा ने दोनों को निलंबित किया।
- सीओ जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच शुरू।
- अनुशासनहीनता और विभाग की छवि धूमिल करने का आरोप।








