Bihar Mahila Rojgar Yojana: बिहार की महिलाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब राज्य की हर उस महिला को 10,000 रुपये मिलेंगे, जिसने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लिए आवेदन किया है। मंगलवार को विधानसभा में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण चौधरी ने यह ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह योजना, जिसे ‘दस हजारी’ योजना के नाम से भी जाना जा रहा है, का लाभ हर पात्र महिला तक पहुंचाया जाएगा। यह जानकारी उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण विकास विभाग के बजट प्रस्ताव पर सरकार का पक्ष रखते हुए दी।
मंत्री ने बताया कि विभाग के 237 अरब 1 करोड़ 17 लाख 90 हजार रुपये के कुल बजट में सबसे अधिक 90 अरब रुपये का प्रावधान अकेले इसी योजना के लिए किया गया है। यह राशि बताती है कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कितनी गंभीर है। उन्होंने कहा कि महिलाएं इस राशि का इस्तेमाल कर बेहतर रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
क्या है मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना?
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत पात्र महिलाओं को सीधे उनके खाते में 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, ताकि वे अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकें या मौजूदा काम को बेहतर बना सकें। ग्रामीण विकास मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि जो महिलाएं अपने रोजगार को बेहतर ढंग से चलाएंगी, उन्हें आगे चलकर 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, जिससे वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकें।
अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को मिल चुका है लाभ
मंत्री श्रवण चौधरी ने विधानसभा को बताया कि यह योजना कोई नई नहीं है, बल्कि पहले से चल रही है और इसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। उल्लेखनीय है कि 26 सितंबर 2025 तक छह चरणों में इस योजना के तहत 1.81 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए जा चुके हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि यह योजना कितने व्यापक स्तर पर लागू हो रही है। इन लाभुक महिलाओं में से केवल 12 लाख महिलाएं शहरी क्षेत्रों की हैं, जबकि बाकी बची 1.69 करोड़ से अधिक महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों की निवासी हैं। इससे साफ है कि यह योजना गांवों की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंच रही है।
विधानसभा में हंगामा और बजट पास
इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्री ने विपक्ष के नेताओं पर महिलाओं को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। हालांकि, जिस समय यह चर्चा हो रही थी, उस समय विपक्ष के अधिकांश सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। वाम दलों के तीन सदस्यों को छोड़ दिया जाए तो विपक्ष लगभग अनुपस्थित ही था और अंतिम समय में वे तीन सदस्य भी सदन से बाहर चले गए। इसके बाद विधानसभा ने ग्रामीण विकास विभाग सहित कई अन्य विभागों की बजट मांगों को गिलोटिन के माध्यम से ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया। इसी के साथ, विपक्ष की ओर से राजद के राहुल शर्मा और अन्य सदस्यों द्वारा लाया गया 10 रुपये का कटौती प्रस्ताव भी स्वतः ही निरस्त हो गया। चर्चा के दौरान विपक्ष ने जीविका, मनरेगा और आवास योजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
ग्रामीणों के लिए पक्के मकान की बड़ी योजना
महिला रोजगार योजना के अलावा, ग्रामीण विकास मंत्री ने आवास योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में आवासविहीन 20 लाख ग्रामीण परिवारों ने पक्के मकान के लिए आवेदन किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में बिहार को 12 लाख 19 हजार आवासों का लक्ष्य मिला है, जो देश में सबसे अधिक है। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार भी बिहार के गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिकता दे रही है। मंत्री ने बताया कि फिलहाल गांव-देहात के 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार लोगों की सूची बनाई गई है। जैसे ही केंद्र से स्वीकृति मिलेगी, इन सभी गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध करा दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि आवास निर्माण के लिए 1.55 लाख रुपये दिए जाते हैं, जिसमें 12,000 रुपये शौचालय निर्माण के लिए शामिल हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
बिहार सरकार की महिला रोजगार योजना के तहत अब हर आवेदन करने वाली महिला को 10,000 रुपये मिलेंगे।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 90 अरब रुपये का प्रावधान किया गया है।
अब तक 1.81 करोड़ महिलाएं इस योजना का लाभ ले चुकी हैं, जिनमें से अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों की हैं।
बेहतर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को भविष्य में 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।
ग्रामीण आवास योजना के तहत 20 लाख आवेदन आए हैं और 12 लाख से अधिक मकानों का लक्ष्य मिला है।








