Sukhpal Khaira ED Case : पंजाब के कपूरथला से वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैहरा को शुक्रवार को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग केस को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ED ने की कार्रवाई’ सुखपाल खैहरा ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि ED की यह पूरी कार्रवाई कानूनी रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला 2015 में जलालाबाद में दर्ज एक NDPS (ड्रग्स) एक्ट केस पर आधारित है। खैहरा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट पहले ही उस NDPS मामले में उनके पक्ष में फैसला दे चुका है और समन के आदेश को भी रद्द कर दिया था।
‘ED की जांच रद्द करने की थी मांग’ खैहरा का कहना था कि जब मुख्य FIR ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द कर दी गई है, तो ED को उसी आधार पर मनी लॉन्ड्रलिंग का मामला चलाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, ED ने 2021 में उनके घर पर छापा मारा और 2023 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जो कि पूरी तरह गलत है।
हाईकोर्ट से खैहरा को बड़ा झटका दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने सुखपाल खैहरा की इस याचिका को खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला और आगे क्या? हाईकोर्ट के इस फैसले को सुखपाल खैहरा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जिससे ED के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई कमजोर पड़ गई है। इस याचिका के खारिज होने के साथ ही, अब इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के लिए खैहरा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपनी जांच और मुकदमे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
मुख्य बातें (Key Points):
- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुखपाल खैहरा की ED केस रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
- खैहरा पर 2015 के NDPS केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
- खैहरा की दलील थी कि NDPS केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद ED की कार्रवाई गलत है।
- इस फैसले के बाद अब ED खैहरा के खिलाफ अपनी जांच और मुकदमा जारी रख सकेगी।








