गोवा सियासत का केंद्र भंडारी

Sandeep-Pandit
पंडित संदीप

कोंकण की धरती से जुड़े भंडारी साहस, शौर्य, धीरता, वीरता का उदाहरण बन हक अधिकार स्वाभिमान की साँसों के साथ जिंदगी को मेहनत के सांचे में ढाल सींचते रहे। उम्मीद की डोर में खुद को समेटे एक नए गोवा को बनाने, एक नये गोवा की जमीन को सजाने, संवारने, रचने, गढ़ने, आगे बढ़ाने में भंडारी समाज ने सदा सर्वस्व समर्पित किया है गोवा के सम्मान की खातिर।
समय के बढ़ते पहिए के साथ पसीने की बूंदों को सोना बना सपनों को साकार करने में भंडारी शूरवीरों की इस बिरादरी ने साँसों की बाजी लगा स्वाभिमान, सम्मान की रक्षा की, खेत की माटी में धरती का कलेजा चीर अन्न पैदा करने की बात हो या फिर शिक्षा का दिया जला अक्षरों की चमक से समाज को चमकदार बनाने की, स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल फूंक हंसते-हंसते प्राण लुटाने का प्रण हो या फिर आजाद गोवा का सूरज देखने के लिए हंसते हंसते यातना का जीवन सहर्ष स्वीकार कर तन मन धन सब गोवा पर कुर्बान करने का जुनून… इतिहास बताता है वीर राष्ट्रभक्त भंडारी के कदम सदा पहली कतार में शुमार रहे।
सच गोवा का गर्व है, गौरव है, मान, सम्मान, स्वाभिमान, साहस, समर्पण, सहयोग, स्वतंत्रता का दूसरा नाम है भंडारी। गोवा के गौरव का अहम पन्ना है भंडारी, गोवा को एक पुस्तक के रूप में पढ़ा जाए तो निर्माण, उत्थान, आंदोलन, बलिदान, ललकार, संगठन, सेवा, सहयोग, समर्पण, साहस बन हर अध्याय की पहली लकीर, पहला अक्षर, पहली पंक्ति में भंडारी अंकित ना हो यह कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
भंडारी समाज का बाहुबल, भंडारी समाज का बुद्धि बल, भंडारी समाज का जनबल, धनबल, गोवा की माटी का सुनहरा रंग बन गोवा की धरा को धन्य बना रहा है भंडारी समाज। गोवा गौरव गाथा के पन्ने दर पन्ने को पलट यह जाने की भंडारी महज एक नाम नहीं भंडारी शौर्य है, गौरव है, सम्मान और गोवा का उजियारा है गोवा की आजादी की सुरक्षा संरक्षण अभिमान का सम्मान भंडारी अडिग खड़ा है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
गोवा की सियासत का पहाड़ होने के बावजूद सत्ता के शीर्ष से दूर ही रहा है बहादुर वीर भंडारी समाज क्यों? यह साजिश है सियासत की या समाज के बिखराव की दास्तां जिस समाज का मतदाता राज्य में सबसे अधिक हो उस समाज को सियासत कब तक कोने में सीमित रख सकती है? 720 महीनों के आजाद गोवा राज के इतिहास में महज 23 महीने ही एक भंडारी मुख्यमंत्री का होना गोवा की जमीन से सवाल पूछता है। चुनाव का बिगुल बज गया है, लगभग सौ साल के संगठित भंडारी समाज के इतिहास में पहली बार भंडारी समाज के दफ्तर में कोई मुख्यमंत्री भंडारी समाज से मिलने पहुंचा, यह दिल्ली के मुख्यमंत्री का बड़ा दिल है, बड़ी सोच है या बड़ा सियासी दांव गोवा के लोकतंत्र में गूंज रहा है अरविंद के इस पहले कदम की धमक।
गोवा सबका है सभी गोवा वासियों को सुंदर, सुरक्षित, सम्मानित, संगठित गोवा मिलजुल कर बनाना है। 60 साल की आजादी के बाद भी एक ईमानदार सरकार के इंतजार में खड़ा है गोवा। गोवा के लोग भयमुक्त, स्वार्थ मुक्त, लोभमुक्त, प्रभु प्रिय हैं। जीवन आदर्श की उच्चता इमानदारी, जिम्मेदारी, भागीदारी के भाव से भरे पड़े हैं। धरती पर गोवा जैसी जीवनशैली, गोवावासियों जैसी ईमानदारी, बिरला ही कहीं और देखने को मिलेगी। पर अफसोस ईमानदार गोआ वासियों की कमान बेईमान, भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के सियासी हाथ में सिमटा पड़ा है। गोआ वासी सबसे ईमानदार और सबसे भ्रष्ट गोवा सरकार… ये कैसे क्यों कब तक यह सवाल गोवा की गली गली में उठने लगा है कि ईमानदारी शांतिप्रिय गोवा वासियों की सादगी, गोवा की शान पर कुछ भ्रष्टाचारियों ने कब्जा कर रखा है। थोड़े से भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की वजह से कब तक अपमानित होता रहेगा गोवा? कब तक भ्रष्टाचारी कहलाता रहेगा गोवा? आखिर बेईमान नेताओं का बोझ कब तक ढोने को मजबूर रहेगा गोवा? गोवा समझने लगा है, गोवा सोचने लगा है, गोवा बदल रहा है फिर एक बार इसकी शुरुआत भंडारी समाज ने आंदोलन के रूप में की है आइए मिलकर ईमानदार सरकार चुने गोवा की सुने।

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