भगवंत मान ने डिप्टी कमीशनरों को राज्य प्रशासन की आँख और कान बताया

The News Air- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज समूह डिप्टी कमीशनरों को राज्य में ख़ास कर गाँवों में जाकर निरंतर सार्वजनिक बैठकें करने के हुक्म देते हुये कहा कि इससे लोगों की तसल्ली के मुताबिक उनकी समस्याओं को मौके पर ही सुलझाना यकीनी बनाया जा सकेगा।
आज प्रातः काल यहां पंजाब भवन में डिप्टी कमीशनरों के साथ मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए भगवंत मान ने उनको विशेष तौर पर गाँव या कस्बे में जाकर अधिकारियों की टीम के साथ विशेष कैंप लगाने के लिए कहा जिससे आम लोगों के बकाए मसले या पेश समस्याओं का मौके पर ही हल किया जा सके।
डिप्टी कमीशनरों को ज़िला प्रशासन की आँखें और कान बताते हुए भगवंत मान ने कहा, ‘‘आप सरकार का असली चेहरा हो क्योंकि हमारे (सरकार) की अपेक्षा आपका आम लोगों के साथ सीधा मेल-जोल रहता है क्योंकि लोग आपके पर बहुत ज़्यादा भरोसा एवं विश्वास करते हैं।’’ उन्होंने डिप्टी कमीशनरों को सांझ केन्द्रों की अचानक जांच करने के लिए कहा क्योंकि इन केन्द्रों को प्रमुख तौर पर लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था और उनको नागरिक केंद्रित सेवाएं सुचारू ढंग से मुहैया करवाने के लिए कहा।
बेहतर कारगुज़ारी दिखाने वाले डिवीजनल कमीशनरों, डिप्टी कमीशनरों, ज़िला पुलिस मुखियों, ऐस.डी.ऐमज़ और अन्य क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए भगवंत मान ने ‘बेहतरीन कारगुज़ारी अवार्ड’ के साथ सम्मानित करने का ऐलान किया जिससे बाकी अफसरों को अपनी ड्यूटी सेवा भावना से निभाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
नशे से ग्रस्त लोगों को मुख्य धारा में लाने के लिए भगवंत मान ने कहा कि सभी जिलों में नशा छुड़ाओ और पुनर्वास केंद्र एक महीने में शुरू और अपग्रेड करने का लक्ष्य दिया जिससे नौजवानों का सही ढंग से पुनर्वास किया जा सके जो भटकर नशे की गिरफ़्त में फंस गए। उन्होंने कहा कि नशाग्रस्त लोगों का पुनर्वास सबसे अहम है जो कि उनको अपनी ज़िंदगी स्वाभिमान के साथ बिताने में सहायक होगा।
मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमीशनरों को अपनी ड्यूटी बिना किसी राजनैतिक दबाव के पूरी काबिलीयत और सामर्थ्य के साथ निभाने की छूट देने का भरोसा दिया। हालाँकि, उन्होंने कहा कि लोगों के नुमायंदों और आम आदमी को उनको बनता सम्मान दिया जाना चाहिए।
गेहूँ की चल रही खरीद की स्थिति का जायज़ा लेते हुये भगवंत मान ने डीजीपी को पड़ोसी राज्यों से पंजाब में गेहूँ की ग़ैर-कानूनी ढुलाई को रोकने के लिए 24 घंटे चौकसी को और तेज करने के लिए कहा क्योंकि कई बेईमान व्यापारी गेहूँ को राज्य भर की मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए चोरी-छिपे लाते हैं। भगवंत मान ने डी.जी.पी को कहा कि वह सीजन के अंत तक इन नाकों पर 24 घंटे वीडिओग्राफी टीमें तैनात करें।
इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री की चिंता का जवाब देते हुये डी.जी.पी. वी.के. भावड़ा ने बताया कि राज्य पुलिस की तरफ से लगाऐ गए 132 नाकों में से 86 अंतरराज्यीय नाके हैं जबकि 46 राज्य के अंदर लगाऐ हुए हैं जिन पर कुल 1150 पुलिस मुलाज़िम तैनात हैं। इन निगरानी कामों की समूची निगरानी एडीजीपी स्तर के अधिकारी ऐम.ऐफ. फारूकी की तरफ से जा रही है और सभी जिलों में एसपी और डीएसपी रैंक के सीनियर पुलिस अधिकारियों को इस कार्य में लगाया गया है।
भूजल के तेज़ी से गिर रहे स्तर पर चिंता ज़ाहिर करते हुये भगवंत मान ने वित्त कमिशनर कृषि डी.के. तिवारी को निर्देश दिए कि वह सभी डिप्टी कमीशनरों को पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी, लुधियाना के साथ मिल कर अपने जिलों में ज़ोरदार मुहिम चलाने के लिए कहें जिससे किसानों को धान की बीजाई की रिवायती प्रणाली की बजाय बड़े स्तर पर धान की सीधी बीजाई (डी.एस.आर.) की प्रौद्यौगिकी की तरफ जाने के लिए जागरूक किया जा सके क्योंकि यह नयी तकनीक राज्य को पानी के गिरते स्तर पर काफ़ी हद तक काबू करने में मदद करेगी।
गेहूँ की खरीद के बारे संक्षिप्त जानकारी देते हुये सचिव ख़ाद्य एवं सिविल सप्लाई गुरकिरत किरपाल सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के अनुमान अनुसार 135 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के लिए पहले ही पुख़्ता प्रबंध किये जा चुके हैं।
गेहूँ की खरीद की तैयारियों पर तसल्ली ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को कहा कि वह डिप्टी कमीशनरों को विस्तृत निर्देश जारी करें कि वह अलग-अलग खरीद एजेंसियों के ज़िला मैनेजरों, ख़ाद्य एवं सिविल सप्लाई के अधिकारियों और किसानों के स्थानीय नुमायंदों के साथ-साथ सलाह-मश्वरा करके अपने-अपने जिलों में खरीद की प्रगति पर नज़र रखने के लिए नियमित तौर पर मंडियों का दौरा करें।

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