Bangladesh Tarique Rahman Cabinet Controversy: बांग्लादेश में मंगलवार को नई सरकार के गठन के साथ ही सियासी घमासान मच गया। नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट में कई नए चेहरों को शामिल किया है, लेकिन इनमें से एक नाम ने पूरे ढाका के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। यह नाम है डॉ. खलीलुर्रहमान का, जिन्हें विदेश मंत्री बनाया गया है। खलीलुर्रहमान इससे पहले मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) के पद पर थे और उन्हें अमेरिका का करीबी माना जाता रहा है।
लेकिन मुश्किल यह है कि खलीलुर्रहमान और बांग्लादेश के आर्मी चीफ जनरल वकार उज जमा के बीच पुरानी तनातनी है। यह तनातनी साल 2025 में उस वक्त शुरू हुई थी, जब खलील ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में मानवीय गलियारा (Humanitarian Corridor) बनाने की कोशिश की थी। अब जब तारिक रहमान ने उन्हीं खलील को विदेश मंत्री बनाया है, तो माना जा रहा है कि सेना प्रमुख और विदेश मंत्री के बीच यह तनातनी सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है।
खलीलुर्रहमान: अमेरिका समर्थक चेहरा
डॉ. खलीलुर्रहमान को यूनुस प्रशासन में अमेरिका के प्रतिनिधि के तौर पर देखा जाता रहा। वह अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेन डील और बोइंग एयरक्राफ्ट खरीद जैसे अहम सौदों में अहम किरदार निभा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खलील के विदेश मंत्री बनने के बाद ढाका में अमेरिकी प्रभाव बरकरार रहेगा। लेकिन उनके इस अचानक कैबिनेट में आने ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां तक कि खुद आर्मी चीफ भी इस फैसले से हैरान बताए जा रहे हैं।
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आर्मी चीफ से क्यों है तनातनी?
सूत्रों के मुताबिक, 2025 में खलीलुर्रहमान ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में मानवीय गलियारा बनाने की पहल की थी। इस मुद्दे पर उनकी और आर्मी चीफ वकार उज जमा की राय में मतभेद हो गया था। सेना प्रमुख इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मान रहे थे, जबकि खलील इसे मानवीय दृष्टिकोण से देख रहे थे। यही वह बिंदु था, जहां से दोनों के बीच दूरियां बढ़नी शुरू हुईं। अब जब खलील विदेश मंत्री बन गए हैं, तो यह तनातनी और गहरा सकती है।
तारिक रहमान के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि तारिक रहमान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खलीलुर्रहमान और वकार उज जमा के बीच इस तनातनी को खत्म कराना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह झगड़ा सरकार के कामकाज पर भी असर डालेगा और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ढाका की राजनीति के जानकार इस पूरे घटनाक्रम पर हैरत जता रहे हैं और इसे पर्दे के पीछे किसी संदिग्ध डील का नतीजा भी बता रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बांग्लादेश में हाल ही में नई सरकार का गठन हुआ है और तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने अपनी कैबिनेट में डॉ. खलीलुर्रहमान को विदेश मंत्री बनाया है। खलील पहले यूनुस सरकार में NSA थे और अमेरिका के करीबी माने जाते हैं। लेकिन उनकी और आर्मी चीफ वकार उज जमा की पुरानी तनातनी है, जो 2025 में म्यांमार मानवीय गलियारे के मुद्दे पर शुरू हुई थी। अब इस तनातनी के सरकार के लिए मुसीबत बनने की आशंका जताई जा रही है। देखना होगा कि तारिक रहमान इस झगड़े को कैसे सुलझाते हैं।
मुख्य बातें
बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान ने कैबिनेट का गठन किया, डॉ. खलीलुर्रहमान बने विदेश मंत्री।
खलीलुर्रहमान पहले यूनुस सरकार में NSA थे और अमेरिका समर्थक माने जाते हैं।
उनकी और आर्मी चीफ वकार उज जमा की 2025 से तनातनी चली आ रही है।
तारिक रहमान के सामने इस तनातनी को सुलझाना बड़ी चुनौती होगी, वरना सरकार के कामकाज पर असर पड़ सकता है।








