Bangladesh Hindu Killing : बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते 18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या की खबरें सामने आई हैं, जबकि पिछले 24 घंटों में दो हत्याओं ने हालात की गंभीरता और बढ़ा दी है। ताजा मामला नरसिंदी जिले का है, जहां मंगलवार रात करीब 8 बजे चारसिंदूर बाजार में किराना व्यापारी मणि चक्रवर्ती की निर्मम हत्या कर दी गई। इससे कुछ घंटे पहले जशोर जिले में एक हिंदू युवक को सरेआम गोली मार दी गई थी।
नरसिंदी में दुकान पर हमला
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मणि चक्रवर्ती रोज की तरह अपनी किराना दुकान पर मौजूद थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावर अचानक वहां पहुंचे और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में डर और तनाव का माहौल बन गया है।

जशोर में सरेआम गोलीबारी
इससे पहले जशोर जिले में राणा प्रताप नाम के एक हिंदू युवक को बाजार में सरेआम गोली मार दी गई। यह वारदात शाम करीब 5:45 बजे हुई। चश्मदीदों के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने भीड़भाड़ वाले बाजार में इस वारदात को अंजाम दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बाद में यह भी सामने आया कि राणा प्रताप एक पत्रकार थे और उनकी अपनी आइस फैक्ट्री के साथ एक अखबार भी था।
18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या
इन दो घटनाओं के साथ ही बीते 18 दिनों में बांग्लादेश में मारे गए हिंदुओं की संख्या छह हो गई है। मृतकों में दीपु चंद्र दास, अमृत मंडल, विजेंद्र विश्वास, खोकन दास, राणा बैरागी और अब मणि चक्रवर्ती शामिल हैं। लगातार हो रही इन हत्याओं ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चुनावी माहौल में बढ़ती हिंसा
बताया जा रहा है कि बांग्लादेश में इस समय आचार संहिता लागू है और 12 फरवरी को चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल के बीच बढ़ती हिंसा को लेकर इसे सबसे हिंसक चुनावों में से एक माना जा रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय का कहना है कि चुनावी तनाव के बीच उनकी सुरक्षा और ज्यादा कमजोर हो गई है।
विश्लेषण: डर के साये में अल्पसंख्यक
लगातार हत्याओं से साफ है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। बाजारों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सरेआम हमले यह संकेत देते हैं कि अपराधियों में कानून का डर कम हो रहा है। चुनावी दौर में अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह न सिर्फ अल्पसंख्यकों बल्कि पूरे देश की आंतरिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

जानें पूरा मामला
नरसिंदी और जशोर की घटनाओं ने यह दिखा दिया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंसा कोई अलग-थलग घटना नहीं रह गई है। 18 दिनों में छह हत्याएं इस बात का संकेत हैं कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और सुरक्षा पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
मुख्य बातें (Key Points)
- बांग्लादेश में 18 दिनों में छह हिंदुओं की हत्या
- नरसिंदी में किराना व्यापारी मणि चक्रवर्ती की मौत
- जशोर में पत्रकार राणा प्रताप को सरेआम गोली मारी गई
- चुनावी माहौल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल








