बलबीर सिद्धू ने चुनौती देते कहा ‘‘अगर ‘अकाली’ व ‘आप’ में हिम्मत है तो प्रधानमंत्री के घर का करें घेराव’’

चंडीगढ़, 7 जून
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने आज शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी द्वारा की जा रही ड्रामेबाज़ी के लिए उन पर बरसते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निवास स्थान के बाहर अपना धरना लगाएं, जिनके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने चुनौती दी ‘‘अगर आप में हिम्मत है तो बेहतर होगा कि यहाँ मेरा और अपना समय बर्बाद करने के बजाए प्रधानमंत्री के घर का घेराव करो।’’
उनके निवास स्थान के बाहर रविवार और आज दोनों पार्टियों द्वारा लगाए गए धरने का जि़क्र करते हुए स. सिद्धू ने कहा, दोनों पार्टियाँ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं और एक दूसरे को पछाडऩे के लिए सख़्त मुकाबला कर रही थीं। उन्होंने कहा दोनों पार्टियाँ ख़ासकर राज्य और मोहाली में अपनी सार्थकता गंवा चुकी हैं, जहाँ हाल ही में हुई शहरी स्थानीय संस्थाओं के चुनाव में अकाली दल का पूरी तरह सफाया हो गया।
निजी अस्पतालों को टीके की सप्लाई करने के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि यह सरकार द्वारा अच्छी भावना के साथ लिया गया फ़ैसला था कि उन सभी व्यक्तियों को टीके उपलब्ध करवाए जाएँ जिनको इसकी ज़रूरत है और इसका ख़र्च उठा सकते हैं, जो भारत सरकार के नियमों के मुताबिक योग्यता के मापदण्डों के अनुसार सरकारी केन्द्रों में टीकाकरण नहीं करवा सकते, जिसमें विशेष तौर पर हज़ारों विद्यार्थी शामिल हैं, जिन्होंने विदेश जाना है परन्तु टीकाकरण न होने के कारण वह जा नहीं सके।
भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहले तो केंद्र सरकार ने निजी अस्पतालों द्वारा चार्ज करने की हद अधिक से अधिक 100 रुपए तय की थी, परन्तु अब भारत सरकार ने निजी अस्पतालों को जितना चाहे चार्ज करने की छुट दे दी है।
उन्होंने कहा कि अकालियों और आप को अपना समय, ऊर्जा और संसाधन दिल्ली में लगाने चाहिएं और भारत सरकार पर दबाव डालना चाहिए कि पंजाब में कांग्रेस की सरकार होने के कारण राज्य के साथ भेदभाव न किया जाए। उन्होंने टिप्पणी की कि परन्तु मैं जानता हूँ कि आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि सुखबीर और अन्य अकाली मोदी से डरते हैं और ‘आप’ और केजरीवाल भाजपा की बी टीम हैं।
इस संबंधी बात करते हुए कि टीकों और ऑक्सीजन के पक्ष से पंजाब के साथ कैसे घोर भेदभाव किया गया, स. सिद्धू ने कहा कि पंजाब के साथ सौतेली माँ वाला सुलूक किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य द्वारा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को दिए गए 30 लाख कोविशील्ड डोज़ के ऑर्डर के बदले पंजाब को सिफऱ् 4.29 लाख डोज़ दिए गए। उन्होंने कहा कि 5.43 लाख वैक्सीन की डोज़ के लिए 18.27 करोड़ रुपए अदा करने के अलावा राज्य सरकार द्वारा 6.88 लाख वैक्सीन की डोज़ के लिए 22.88 करोड़ रुपए की आगामी अदायगी की गई, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि ‘अकाली दल’ और ‘आप’ भारत सरकार की टीके संबंधी दोहरी कीमत नीति जोकि भारत सरकार के लिए 150 रुपए और राज्य सरकारों के लिए 300 रुपए सम्बन्धी सवाल क्यों नहीं करते, जिसके बारे में सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल किया था।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भाजपा के नेतृत्व वाले राज्यों को टीकों की भरपूर सप्लाई हो रही है और इस सूची में सबसे ऊपर 25 लाख टीकों के साथ उत्तर प्रदेश है, जिसके उपरांत गुजरात और मध्य प्रदेश राज्य हैं।
उन्होंने कहा कि इसके उलट, भारत सरकार ने कभी भी पंजाब को वैक्सीन का बनता कोटा आवंटित नहीं किया।
सिद्धू ने अकाली और ‘आप’ के नेताओं को सलाह दी कि यदि वह सचमुच पंजाब और पंजाबियों की चिंता कर रहे हैं, तो उनको पंजाब में उनका और अपना समय बर्बाद करने की बजाय यह मामला भारत सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।
उन्होंने खुलासा किया कि भारत सरकार ने पंजाब को सिफऱ् 126 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आवंटित की थी, जो कुछ ही दिनों में घटाकर 86 मीट्रिक टन कर दी गई। उन्होंने कहा कि बार-बार विनतियाँ करने के उपरांत इस अलॉटमैंट को 24 अप्रैल को 137 मीट्रिक टन और 29 अप्रैल को 195 मीट्रिक टन तक संशोधित किया गया, परन्तु यह अलॉटमैंट बोकारो और हाजिरा जैसे दूर-दूराज़ के इलाकों से गई थी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने राज्य को 50 ऑक्सीजन टैंकरों की माँग के मुकाबले सिफऱ् चार टैंकर ही मुहैया करवाए। इसी तरह 5,750 ऑक्सीजन सिलंडर की ज़रूरत के विरुद्ध पंजाब को सिफऱ् 550 ऑक्सीजन सिलंडर मिले।
स. सिद्धू ने कहा कि भारत सरकार द्वारा दिए गए 340 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटजऱ् जोकि राज्य की असली ज़रूरत की अपेक्षा पहले ही बहुत कम थे, में ख़ामियाँ पाए जाने के कारण 150 कंसेन्ट्रेटजऱ् वापस मंगवा लिए गए थे।
उन्होंने कहा कि समाज सेवकों से प्राप्त सहायता के अलावा राज्य ने अपने स्तर पर 4000 से अधिक ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटजऱ् खऱीदे हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य दिसंबर, 2020 में अमृतसर और पटियाला के मैडीकल कॉलेजों में दो पीएसए मैडीकल ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए तैयार था, परन्तु भारत सरकार ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने में असफल रही, क्योंकि भारत सरकार द्वारा चुने गए विक्रेता पीछे हट गए।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री-केयर्स के अंतर्गत दिए गए वेंटिलेटर कई महीनों से स्थापित नहीं किए गए, क्योंकि यह सही नहीं थे और भारत सरकार ने उनकी मरम्मत भी नहीं करवाई और एक कंपनी द्वारा मुहैया करवाए 100 वेंटीलेटरों का कोई फ़ायदा नहीं हुआ, क्योंकि वह घटिया गुणवत्ता के थे।
सिद्धू ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बार-बार विनतियाँ करने के बावजूद, भारत सरकार ने इंजेक्शन टोसीलीज़ुमैब की अपेक्षित ख़ुराक मुहैया नहीं करवाई, जो कोविड के गंभीर मरीज़ों की जान बचाने के लिए बहुत लाभप्रद थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा ब्लैक फंगस के प्रबंधन के लिए ज़रूरी दवाएँ समय पर और उचित मात्रा में नहीं दी गईं, जिसके नतीजे के तौर पर हमें ब्लैक फंगस के मरीज़ों का इलाज करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य ने 200 पीडियाट्रिक वेंटीलेटरों के लिए विनती की है परन्तु भारत सरकार से कोई जवाब नहीं मिला।

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