आसाराम 4 सालों से जेल में क़ैद, लेकिन ख़ौफ़ बरक़रार मिल रही हैं धमकियां, M.A. कर रही पीड़िता..

The News Air: आसाराम की सज़ा को 4 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन आज भी पीड़ित परिवार खुलकर बाज़ारों में नहीं घूम पाता। चार साल में 5 से ज़्यादा बार धमकियां मिल चुकी हैं, इसलिए परिवार को हमले का डर हर वक़्त सताता रहता है। पीड़िता सदमे से किसी तरह उबरी जरुर है, लेकिन दहशत पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है।
इस मामले में पीड़िता के पिता ही बात करते हैं, बेटी कम बात करती है। पीड़िता से जब घटना के बारे में बात की ज़ाती है तो वह कुछ देर बाद ही रोने लगती है। इस बात के अलावा दूसरी बातों पर बोलती है। पढ़ाई पर कहती है कि आईएएस बनूंगी। बीए कंप्लीट कर लिया है। 80 प्रतिशत से ज़्यादा नंबर आए हैं। अब एमए फाइनल में है, पूरी मेहनत के साथ पढ़ाई कर रही हूं।

फ़ोन रखने से डर लगता है

पीड़िता ने मोबाइल से दूरी बनाकर रखी है। उसका कहना है कि लगातार मिल रहीं धमकियों के कारण स्मार्ट फ़ोन नहीं रखती, और न ही किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्टिव है।​ इससे पढ़ाई पर भी असर पड़ता है।​​​​​​

धमकियां इतनी मिलीं कि बाहर घूमने में डर लगता है

पीड़िता के पिता बताते हैं कि चार साल में 5 से ज़्यादा बार आसाराम के गुर्गे घर पर आकर धमकियां दे चुके हैं। धमकी भरे पत्र फेंक कर भाग जाते हैं। उस पत्र पर बेटी और पूरे परिवार के लिए अश्लील बातें लिखी होती हैं। कभी भी पुलिस ने धमकी देने वाले को गिरफ़्तार कर जेल नहीं भेजा। बस कुछ दिन के लिए पुलिस सुरक्षा बढ़ा देती है।

धमकी देने वाले पकड़े नहीं जाते

पीड़िता के पिता आगे कहते हैं कि अगर पुलिस एक या दो बार धमकी देने वाले आरोपी को पकड़कर जेल भेज देती तो फिर किसी की हिम्मत धमकी देने की नहीं होती। डर सताता रहता है कि पता नहीं कब कहां से हमला हो जाए। केस दर्ज़ करने के बाद कारोबार में कुछ दिक्क़त आई थी। बाद में व्यापारियों ने पूरा सहयोग किया, जिससे कारोबार कुछ ठीक हो गया है।

सज़ा के बाद अपनों का रवैया अच्छा हो गया

रिश्तेदारों के बारे में पीड़ित पिता बताते हैं कि जब आसाराम पर केस दर्ज़ कराया था, तब नाते-रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों ने किनारा कर लिया था, क्योंकि उनको लगता था कि आसाराम पर झूठा केस दर्ज़ कराया है। हालांकि, जब फ़ैसला आया और सज़ा हो गई तो अपनों को भरोसा हो गया कि केस झूठा नहीं था। अब सब मानते हैं कि आसाराम पाखंडी था।

फ़ैसले से पहले हमला हुआ था

पीड़ित पिता परिवार पर हमले के बारे में बताते हैं कि जब केस दर्ज़ कराया था, तब पूरा परिवार घबरा गया था। फ़ैसला आने से पहले की बात है। पत्नी के साथ कार से जोधपुर से गवाही देकर वापस घर लौट रहे थे। दो सुरक्षाकर्मी भी साथ थे। दौसा ज़िले में टोल टैक्स के पास कुछ लोगों ने कंटेनर से टक्कर मार दी थी। मामूली चोट आई थी। दौसा के एएसपी पहाड़ सिंह राजपूत ने काफ़ी मदद की थी।

ईश्वर करे, हाईकोर्ट से भी आसाराम को ज़मानत न मिले’

आसाराम की ज़मानत पर पिता ने बताया कि मेरे वकील पीसी सोलंकी ने हाईकोर्ट में आपत्ति लगा दी है। जो ईश्वर चाहेगा वही होगा। केस दर्ज़ होने के बाद सबसे ज़्यादा राजस्थान सरकार, वहाँ की पुलिस और मेरे वकील का साथ मिला है।

आसाराम को पूजना सबसे बड़ी भूल थी

पीड़िता के पिता आसाराम के प्रति आस्था रखने को अपनी सबसे बड़ी भूल बताते हैं। 07 अगस्त 2013 को उनके मोबाइल पर मध्यप्रदेश के आसाराम गुरुकुल आश्रम से फ़ोन आया था। वार्डन शिल्पी ने पीड़िता पर भूत प्रेत का साया बताकर इलाज के लिए जोधपुर के मणाई आश्रम में लाने को कहा था। 14 अगस्त की शाम वह पत्नी और बेटी को लेकर जोधपुर पहुंच भी गए थे।

इलाज के नाम पर आसाराम ने रेप किया था

15 और 16 अगस्त 2013 की रात आसाराम ने इलाज के लिए अनुष्ठान करने की बात कही थी। पीड़िता के माता-पिता को कुटिया के बाहर जप ध्यान करने को कहा और ख़ुद नाबालिग पीड़िता को कुटिया में बंद कर लिया था। इस दौरान पीड़िता के साथ रेप किया। शोर मचाने पर जान से मारने की धमकी दी थी। घर लौटने पर पीड़िता ने रेप की बात बताई थी।

दूसरे दिन ही पीड़ित परिवार गया, पर आसाराम नहीं मिला

18 अगस्त 2013 की रात पीड़ित परिवार बेटी को लेकर दिल्ली आसाराम से मिलने गया। आसाराम के गुर्गों ने मिलने से रोक दिया। आसाराम दिल्ली से दूर हो गया। पीड़ित परिवार ने दिल्ली के कमला मार्केट थाने में रात में एफआईआर के लिए तहरीर दी। 20 अगस्त 2013 को रेप के साथ ही अन्य धाराओं में मुक़दमा दर्ज़ हुआ था। 25 अप्रैल 2018 को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।

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