आर्यन खान को आज भी नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने 20 अक्टूतबर तक सुरक्षित रखा फैसला


मुंबई, 14 अक्टूबर (The News Air)

क्रूज शिप ड्रग्स मामले में शाहरुख खान (ShahRukh Khan) के बेटे आर्यन खान ( Aryan Khan) व अन्य की जमानत अर्जी पर सेशन कोर्ट में फैसला 20 अक्टूKबर तक सुरक्षित रख लिया है. गुरुवार को जब सुनवाई शुरू हुई तो अभियोजन पक्ष की ओर से ASG अनिल सिंह ने दलीले दीं.दूसरी ओर,आर्यन की ओर से उनके वकील अमित देसाई ने बहस में हिस्साफ लिया.

ASG ने कहा कि हम इस मामले में पूरे chain और connection पर नज़र बनाए रखे हुए हैं. अब भी मामला preliminary स्टेज पर है और आगे जाकर और भी चीज़ें सामने आएगी.इसलिए मैं चाहता हूं कि कम से कम इस स्टेज पर इन्हें ज़मानत नहीं दिया जाए. दूसरी ओर, अमित देसाई ने कहा, आर्यन इस मामले में जो सहयोग है, वो करेंगे, लेकिन आप इनसे इनका अधिकार नहीं छीन सकते. इसलिए मैं चाहता हूँ कि इस मामले में उसे ज़मानत दी जानी चाहिए.

कोर्ट ने फिलहाल 20 अक्टूाबर तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले मामले में बुधवार की भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी. इस बीच, आर्यन खान और दूसरे आरोपियों को न्यायिक हिरासत होने के बाद आर्थर रोड जेल ले जाया गया है.
आर्यन खान जमानत अर्जी मामले में सुनवाई से जुड़ा घटनाक्रम

-जिरह के बाद सेशन कोर्ट में फैसला 20 अक्टूटबर तक सुरक्षित रख लिया है.अब NCB वकील अद्वैत सेठना बात कर रहे हैं, उस समय देसाई और सतीश मानशिन्दे ने इसका विरोध किया. सेठना कह रहे हैं कि इसी तरह का मामला अरमान कोहली का था और उसे भी सज़ा दी गई. देसाई और मानशिन्दे ने कहा कि जब ASG इसपर बात कर रहे हैं, तो आप क्यों कर रहे हैं. अब ASG वही बात दोहरा रहे हैं कि अरमान कोहली के मामले में जमानत खारिज की गई थी, मामला एक जैसा ही था. देसाई का कहना है कि मामला एक जैसा नहीं है

अब ASG बात कर रहे हैं. उन्होंएने कहा, ‘जहां तक बात facts की है, उसमें देसाई कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि व्हाट्सएप चैट में क्या है, लेकिन फिर भी बता रहे हैं कि व्हाट्सएप में किस तरह की बातें होती हैं लेकिन यह चैट क्या है, यह मुझे पता है और अदालत को भी पता है. देसाई टोक रहे थे, तब ASG ने कहा कि आपने आधे घंटे तक बात की, मुझे केवल 2 मिनट चाहिए. मैं केवल अदलात से कहूंगा कि मैंने आपको कई fact दी हैं, आप उसके आधार पर अपना फैसला लीजिए.

देसाई ने कहा, आर्यन इस मामले में जो सहयोग है, वो करेंगे, लेकिन आप इनसे इनका अधिकार नहीं छीन सकते. इसलिए मैं चाहता हूँ कि इस मामले में उसे ज़मानत दी जानी चाहिए

देसाई ने कहा, इसके अलावा एक presumption का मुद्दा है जिसमें कहा जाता है कि जांच रिकवरी से शुरू होती है और रिकवरी पर खत्म होती है. अगर ऐसा है तो जो रिकवरी होनी था, वो हो गई.. तो फिर ज़मानत क्यों नहीं दी जानी चाहिए.अगर आपको शक है तो ट्रायल में बाकी मुद्दों को उठा सकते हैं

अमित देसाई ने कहा, ‘जो मुझे जानकारी मिली हुई है,उसके अनुसार फोन में कोई रेव पार्टी का ज़िक्र नहीं है. Joint posession पर आज चर्चा नहीं करना. मैं नहीं मानता कि यह joint posession है, लेकिन फिर भी मैं मान लेता हूं अगर ऐसा है भी, तो भी यह ट्रायल का मुद्दा है. आर्यन बहुत साल तक विदेश में थे, जहां कई चीज़ें लीगल हैं. यह भी हो सकता है कि वहां के लोग किसी चीज पर बात कर रहे हैं, जिसमें आर्यन भी शामिल है. मुझे नहीं पता कि क्या बात हुई है, लेकिन अदालत को यह सब याद रखना चाहिए.आप conspiracy की possibility कहते हुए ज़मानत का विरोध नहीं कर सकते

देसाई ने कहा, इस मामले में जो भी तार जोड़े जाने थे, वो जोड़े गए. इन्होंने ही कहा कि आर्यन ने आचित का नाम लिया.आचित के रिमांड में कहा गया कि आर्यन और अरबाज़ ने आचित का नाम लिया. अब यह मुझसे जुड़ा हुआ नहीं क्योंकि आचित को भी गिरफ्तार किया गया. आचित को small quantity के आधार पर गिरफ्तार किया गया.अमित देसाई ने ASG से कहा कि आपने फैक्ट के नाम पर बहुत कुछ गलत कहा, उसे ही मैं सही कर रहा हूं. अमित देसाई अपनी बात आगे बढ़ा रहे हैं.कह रहे हैं कि आर्यन की जो जांच की जानी चाहिए थी वो हो गई. यह commercial quantity की बात कर रहे हैं.. जिससे commercial quantity मिली, उसका नाम अब्दुल है. उसका नाम न ही आर्यन ने दिया,नाही अरबाज़ ने दिया और न ही आचित ने. तो फिर आखिर इनके साथ मेरा (आर्यन का) क्या लेना देना है. यह fact है जो रिमांड एप्लीकेशन में कहा गया है. शोविक के जजमेंट की बात ASG ने की. उसी जजमेंट का ज़िक्र मैं कर रहा हूं.. उसमें अदालत ने यह भी अपने observation में शोविक के सभी दूसरे peddler से तार जोड़ने के बाद भी कहा कि शोविक ड्रग्स लेता नहीं था बल्कि वो पैडलर से लेकर सुशांत को देता था.इसलिए उसे एक अहम बात मानी गई थी और ड्रग्स सप्लाई का आरोप लगा था. आज foreign national से भी जोड़ा गया और MEA से बात शुरू होने की बात कही गई. मुझे नहीं पता कि क्या ऐसे बातचीत हुई भी या नहीं, लेकिन मैं केवल यह कह सकता हूँ कि आज का इस generation जिस english का इस्तेमाल करता है, उसे हमारे उम्र वाले torcher मानेंगे.इसलिए जिस बयान और जो शब्दों का इस्तेमाल वो करते हैं, उससे ऐसा शक आ सकता है कि इसमें क्या कोई बड़ी साजिश है। कई बार ऐसा नहीं होता है और यह generational gap के वजह से हमें लगता है.यह लड़का किसी भी तरह illegal drug trafficking से नहीं जुड़ा है.आप MEA से बात कर जांच शुरू रखिये और मैं अब भी कहता हूँ कि आपने जो आरोप लगाए हैं, वो absurd और false हैं. अदालत को देखना चाहिए को जो चैट है वो क्या है.. क्या वो जोक है, क्या वो कुछ और है या वो लोग केवल बात कर किसी चीज़ पर हंस रहे हैं. आज की दुनिया बहुत अलग है. यह जो चैट है वो निजी है. मैं मानता हूँ कि ऐसे चैट से पहले बहुत कुछ निकला है, लेकिन यह मामला वैसा नहीं है. आजकल सिनेमा में लोग ड्रग्स की बात करते हैं, क्योंकि वो इसपर बात करते हैं, किताब लिखी जाती है, क्या इसका यह मतलाब है कि यह सब drug traficking से जुड़े हुए हैं. Context क्या है, यह देखना बहुत महत्वहपूर्ण है

देसाई लगातार बात कर रहे हैं, उन्होंकने कहा, ‘इस अदालत में मोबाइल फोन को लेकर भी चर्चा की गई. इसमें fact साबित करने के लिए मैं आपको NCB से जुड़े एक दस्तावेज बताता हूं जिसमें NCB ने कहा है कि उन्होंुने आर्यन खान के फोन को seize किया था, Voluntary handover नहीं लिखा गया है. अगर seize किया जाएगा तो उसका अलग से पंचनामा होना चाहिए. यह कानून भूल गए हैं. seizure memo का कहीं कोई जिक्र नहीं है.साथ ही जिससे यह लिया गया है, उसे दोबारा यह handover किया जाना चाहिए. मैं केवल facts पर ही बात कर रहा हूं.अब तक केवल investigation ही चल रहा है, trial नहीं शुरू हुआ है. चाहे फोन को voluntarily लिया गया या seize किया गया वो बाद में तय कर सकते हैं, जो भी हुआ, आप मेरे अधिकार को मुझसे नहीं छीन सकते. आपने बताया नहीं कि अगर ज़मानत दिया गया, तो इनक्की जाँच पर इसका असर कैसे पड़ेगा. जब हम इस मामले को देखेंज़ तो fact यही है कि अगर ज़मानत पर इन्हें छोड़ा गया, तब भी इनके जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसलिए यह बार बार अब केवल commercial quantity का ज़िक्र कर रहे हैं और कह रहे हैं कि एक बड़ी conspiracy है, जिसके लिए ड्रग्स को seaze किये गए हैं. कानून और सरकारी policy के अनुसार हम सबसे peeche हैं, हम consumer हैं, लेकिन यह consumer को ही जेल में रखना चाहते हैं, reform करने के बजाए. सरकारी policy, legislative policy और जजमेंट कहते हैं कि small quantity में भी जमानत दी जा सकती है.रिया चक्रवती के मामले में भी कहा गया कि भले ही नियम के अनुसार small quantity मिलने पर गैर जमानती मामला दर्ज होता है, लेकिन अदालत ने इसपर भी टिप्पणी दी है. 2 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया, आज 14 अक्टूबर है.. यह कह रहे हैं कि लगातार जांच जारी है. 3 अक्टूबर को गिरफ्तारी की गई, बयान दर्ज किए गए. 4 अक्टूबर को दोबारा अदालत में उसे produce किया गया, जिसके बाद 7 october तक दोबारा रिमांड में भेजा गया. उस समय भी मजिस्ट्रेट ने कहा कि 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक जो जाँच की जानी चाहिए थी, वो हो गया और उसके बाद ना ही कोई बयान लिया गया, न ही कुछ हुआ. इसलिए अदालत ने उस समय इस मामले में पुलिस कस्टडी नहीं बढ़ाई. तब भी यह international drugs का ज़िक्र कहा गया.

देसाई ने कहा, ‘SG ने 24 अगस्त 2021 का एक जजमेंट नहीं पढ़ा जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपियों की कम उम्र को देखते हुए कहा था कि इन्हें reformation का एक मौका मिलना चाहिए और अगर दोबारा भविष्य में ऐसा होता है, तब इसपर कार्रवाई की जानी चाहिए यानी अदालत ने उम्र देखते हुए राहत दी थी. मीडिया का काम है awareness create करना, इस तरह के जजमेंट से बहुत awareness फैलता है. हाईकोर्ट के एक मामले में ASG ने कहा था कि CELEBRITY और INFLUENCERS पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. मुझे लगता है कि वो बात करते हुए भी अनिल सिंह अपनी खुद की बात नहीं, अपने क्लाइंट की बात रख रहे थे. इसपर हाई कोर्ट ने कहा था ‘I don’t agree, everyone is equal before the law. Each case has to be decided in its own merit despite the status of the accused’.मेरे क्लाइंट को लेकर डिपार्टमेंट ने legal लाइन क्रॉस किया हो सकता है ताकि अदालत जमानत न दे. मान भी लें कि consumption का confession हुआ है.. इसमें भी ज़्यादा से ज़्यादा 1 साल की सज़ा हो सकती है.. इस सब पर भी ट्रायल में हम लगातार चर्चा करेंगे लेकिन यह सच है कि हमने retraction फ़ाइल किया, वो रिकॉर्ड पर है और हमने अदालत के रिकॉर्ड से भी इस retraction का कॉपी निकाला है. मैं केवल कानून के दायरे में रहकर ही सब बात कर रहा हूं.’

अमित देसाई ने कहा, Legislative में बदलाव किया जाना चाहिए.2004 की एक कॉपी अदालत को दी गई जिसमें कहा गया है कि जहां ज़्यादा quantity में ड्रग्स मिलता है, वहाँ पर ज़्यादा सज़ा दी जानी चाहिए. NDPS में illicit trafficking के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है लेकिन उसमें reformative approach की बात भी लिखा गया है उन लोगों के लिए जो addict हैं.. मैं यह नहीं कह रहा कि मेरा क्लाइंट addict है, मैं केवल वो दस्तावेज़ पढ़ रहा हूं. मैं निजी तौर पर कुछ नहीं कह रहा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट, legislature और सरकार की बात कर रहा हूं और उन्होंने ही माना है कि अगर quantity के आधार ओर सज़ा का प्रावधान तय होगा. सुप्रीम कोर्ट के अलग अलग जजमेंट हैं इस पर. ASG ने अलग अलग जजमेंट पढ़े, इसलिए मेरा भी कर्तव्य है कि मैं भी कुछ जजमेंट पढूं. 2018 के एक जजमेंट में कहा गया है कि बिना जांच पर किसी तरह की बाधा लाए जमानत दी जा सकती है. एजेंसी जांच जारी रख सकते हैं, लेकिन ज़मानत दी जा सकती है.

आर्यन के वकील अमित देसाई बात कर रहे हैं. उन्हों ने कहा, इस बात में कोई दो राय नहीं कि पूरी दुनिया ड्रग्स से लड़ रही है. हमें आज़ादी मिली है, उस आज़ादी को बनाए रखना हम सबकी ज़िम्मेदारी है. जिस तरह ASG ने कहा, युवाओं को भविष्य के लिए अपने सेहत का ख्याल रखना चाहिए. मैं यह सही मानता हूं. NCB जो कार्रवाई करती है उसकी तारीफ की जानी चाहिए. मेरा बस यही कहना है कि जो कार्रवाई हो, वो कानून के दायरे में हो। इसके लिए भी हमने आज़ादी के समय बहुत लड़ाई लड़ी थी. यह सब करते हुए यह भी याद रखना बहुत ज़रूरी है, कि जब हम आज़ादी के लिए लड़े थे, तब हम संविधान के लिए लड़े, लोगों के आज़ादी को बनाए रखने और उनके अधिकार के लिए लड़े. हम उनके अधिकार को नज़रंदाज़ नहीं कर सकते और न ही बिना कानून कोई कार्रवाई कर सकते हैं. अलग अलग तरह के ड्रग्स होते हैं और समय के साथ ही सरकार ने तय किया है कि ऐसे कौनसे ड्रग्स है जिसपर कार्रवाई की जानी चाहिए और दूसरे ड्रग्स ऐसे भी हैं जिसपर दूसरे तरह से कदम उठाने चाहिए.साल 2017 में सरकार ने जो समाज में चल रहा है उसपर ध्यान देते हुए एक policy document जारी किया था narcotics को लेकर जिसमें उन्होंने इससे किस तरह से लड़ा जाए, उसके लिए भी कई दिशानिर्देश दिए थे.सबसे ऊपर peddler थे, उसके बाद trafficker और उसके बाद consumer. इसमें यही कहा गया कि इससे लड़ने के लिए सबसे पहले peddler और trafficker पर कार्रवाई की जानी चाहिए. बच्चों के ड्रग्स लेने पर लिखा गया था कि इन बच्चों को sensitize किया जाना चाहिए.आज ASG ने कई जजमेंट पढ़े.

-मुनमुन (धमेचा) के वकील बात कर रहे है वो ASG की ओर से जो जजमेंट पढ़े गए, उसमें से एक का ज़िक्र कर रहे हैं और बता रहे हैं कि जिन आरोपियों को गिरफ्तार कर 27A सेक्शन लगाया गया था,उनसे commercial quantity जब्तऔ किए गए थे.मुनमुन से ऐसा कुछ नहीं मिला है. मुनमुन का नाम conspiracy में जोड़ा गया लेकिन यह सही नहीं है, हम पहले से ही कर रहे हैं कि नाही आर्यन खान और नाही अरबाज़ के साथ कोई लेना देना था. फिर भी हमें साथ में जोड़ा जा रहा है,मुझे (मुनमुन को)इससे अलग करना चाहिए. मेरे रूम से small quantity मिला था, commercial नहीं. मुझे ज़मानत दी जानी चाहिए.

-ASG अब मुनमुन पर बात कर रहे हैं.अदालत को बता रहे हैं कि मुनमुन के पास से भी ड्रग्स NCB को मिला था.

-ASG ने कहा, ‘इन जजमेंट के ज़रिए मैं यही कहना चाहता हूं कि हम सभी मामलों को गंभीरता से ले रहे हैं. एक दूसरे मामले में हमारे अधिकारियों को मारा भी गया था. हम जान जोखिम में डालकर कार्रवाई करते है. समाज में खासतौर पर युवाओं पर इसका असर पड़ा है. आरोपियों के वकीलों ने अदालत में कहा कि यह युवा हैं, बच्चे हैं, इन्हें ज़मानत दी जानी चाहिए, मैं इसे सही नहीं मानता. मैं अदालत के सामने कहता हूं कि इस मामले से युवाओं के भविष्य के बारे में पता चलेगा. यह महात्मा गांधी का देश है, इसलिए ड्रग्स पर रोक लगनी चाहिए. हम इस मामले में पूरे chain और connection पर नज़र बनाए रखे हुए हैं. अब भी मामला preliminary स्टेज पर है और आगे जाकर और भी चीज़ें सामने आएगी.इसलिए मैं चाहता हूं कि कम से कम इस स्टेज पर इन्हें ज़मानत नहीं दिया जाए.’

-अब तक कुल मिलाकर 8 जजमेंट पढ़े जा चुके हैं और इसके जरिए ASG बता रहे हैं कि किस तरह से इन आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

-एक और जजमेंट का ज़िक्र किया जा रहा है जिसमें कहा गया कि अदालत को यह देखना चाहिए कि ज़मानत मिलने के बाद क्या आरोपी दोबारा ऐसा गुनाह कर सकता है या नहीं.लगातार अलग अलग जजमेंट पढ़े जा रहे हैं.

-Conspiracy से जुड़े एक जजमेंट की चर्चा की जा रही है जिसमें कहा गया कि conspiracy directly नहीं होता है, secretly ही होता है जिसकी जानकारी conspirator और उनके लोगों को होती है. इसलिए अगर इससे जुड़े कोई गवाह या सबूत मिलते हैं तो भी इस पर कार्रवाई की जा सकती है. इस मामले में direct conspiracy साबित न करते हुए circumstance के ज़रिए इसे बताया गया था.

-अब एक और जजमेंट का ज़िक्र हो रहा है जिसमें कहा गया है कि अगर रिकवरी ( recovery) नहीं की गई, अदालत ने कहा कि आरोपी के पास posession नहीं मिलने का यह मतलब नहीं है कि उन पर सेक्शन 37 नहीं लग सकता.

-ब्रेक से पहले वाली बात को खत्मi करके ASG अनिल सिंह ने शोविक के जजमेंट के बाद अब इसी तरह के दूसरे जजमेंट की बात की. इस जजमेंट में आरोपी ने अपने बयान को retract किया था, लेकिन इसके बावजूद अदालत ने इस मामले में बयान को अहमियत दी थी. Retraction का मुद्दा ट्रायल में उठाया जा सकता है, अभी नहीं.

-आर्यन खान की जमानत अर्जी पर सेशन कोर्ट में सुनवाई दोबारा शुरू हो गई है.

-ASG ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि आर्यन को केवल 1 साल की सज़ा हो सकती है. अगर दूसरे आरोपियों से उनके तार जुड़ते हैं, तो जो सज़ा दूसरों पर होगी, वही सज़ा इन पर भी लागू की जा सकती है. शोविक चक्रवती के मामले का ज़िक्र करते हुए बताया कि शोविक के पास से ड्रग्स नहीं मिले थे, इस मामले में ड्रग्स भी मिला है. इससे पहले अदालत ने आदेश देते हुए टिप्पणी की थी कि NDPS एक्ट के सारे सेक्शन गैर जमानती हैं. मामले में अब 2:45 बजे आगे की सुनवाई होगी.

-ASG ने कहा, इस मामले में 15 से 20 लोग जुड़े हैं और इसमें conspiracy की बात सामने आ रही है, साथ ही अगर कमर्शियल क्वांटिटी की बात भी सामने आई है] इसलिए सेक्शन 29 लगाया जाता है. जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा और जानकारी मिली, उसके अनुसार हम charges और section लगा सकते है. ऐसे भी सेक्शन हैं जिसमें क्वांटिटी नहीं मिलने पर या कम मात्रा में क्वांटिटी मिलने पर भी कड़ी करवाई की जा सकती है. अगर आपके पास से ड्रग्स नहीं मिला, लेकिन इसी मामले में दूसरों से commercial क्वांटिटी में ड्रग्स मिला तो उस आधार पर कार्रवाई की जा सकती है. मेरी submissiom यही है कि इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती है और ऐसे कई जजमेंट इस मामले में हो चुके हैं. पंचनामा में मोबाइल फोन का ज़िक्र नहीं होने की बात आरोपियों के वकीलों ने की। मैं मांग करता हूँ कि ऐसा कहां लिखा गया है वो बताओ. हमारे पास मोबाइल फोन का voluntary surrender मौजूद है. क्या इसका यह मतलब नहीं है कि हम इसकी जांच कर सकते हैं? कोई हमें नहीं बता सकता कि जांच कैसे करना है, हम यह सब जांच पहले से करते आए.आप ऐसे technical चीजों को अदालत के सामने नहीं रख सकते हैं.एप्लीकेशन में यह ground ही नहीं था, इसलिए रिप्लाई में इसका जिक्र नहीं है.ASG अनिल सिंह ने कहा, ‘देरी से आने के लिए माफी चाहता हूं. मैंने कोर्ट में भी जानकारी दी थी कि यहां पर एक मामला है. कल जब मैं रिप्लाई दे रहा था, उसमें मैंने रिप्लाई में लिखी गई कई बातें आपके सामने रखी, आगे का रिप्लाई मैं अभी पढ़ रहा हूं. आर्यन खान पहली बार ड्रग्स का सेवन नहीं कर रहे हैं,जो बयान मिला है, उससे पता चलता है कि पिछले कुछ सालों से वो इसका सेवन करते थे. अरबाज़ के पास से ड्रग्स मिला है. आर्यन उनके साथ थे. पंचनामा में भी साफ लिखा है कि ड्रग्स का सेवन दोनों करने वाले थे.मैंने पहले ही आपको पंच नामा और व्हाट्सएप चैट दे दिया है.

-ASG अनिल सिंह अदालत पहुंच गए हैं. अदालत में सुनवाई शुरू हो गई है.

-आर्यन के वकील अमित देसाई ने कहा कि मैं मानता हूं कि हाई कोर्ट में भी ज़रूरी मामला चल रहा है, लेकिन यहां भी जानकारी देनी चाहिए. उन्हें हमारे बारे में भी सोचना चाहिए. इस पर NCB के वकील अद्वैत सेठना ने कहा कि वो अब हाई कोर्ट से निकल चुके हैं. थोड़े समय में आ रहे हैं. हम इसके लिए माफी मांगते हैं. अमित देसाई ने इस पर कहा कि अगर वो आ रहे हैं तो अच्छी बात है, लेकिन मेरी अपील है कि जब वो आ जाएं,तब इस मामले की सुनवाई शुरू हो. वहीं मानेशिन्दे ने कहा कि मेरी अपील है कि ज़रूरत पड़ने पर अदालत 2 बजे के बाद भी कुछ देर सुनवाई कर इस मामले को खत्म करें.

-बता दें कि बुधवार को कोर्ट में बचाव पक्ष और एनसीबी के बीच लंबी बहस चली थी. आर्यन खान के वकील ने कोर्ट में कहा था कि आर्यन के पास किसी तरह का ड्रग्स नहीं मिला है. उनके पास कैश भी बरामद नहीं हुआ है. वहीं एनसीबी ने दलील दी थी कि आर्यन खान पैडलर के संपर्क में थे और ये बड़ी साजिश हो सकती है. एनसीबी ने ये भी कहा किसी एक आरोपी के पास सामग्री न मिलने का मतलब ये नहीं है कि वह साजिश का हिस्सा नहीं है.

-एनसीबी ने ये भी दावा किया कि आरोपी विदेश में कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में थे जो अवैध खरीद के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा लग रहे हैं और इसकी जांच चल रही है. मामले में कुल 20 गिरफ़्तारीयां हुई हैं, जिनमें चार पेड्लर बताए गए हैं. आर्यन के अलावा अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा के वकीलों ने भी अपने मुवक्किलों के ड्रग्स तस्करी का हिस्सा होने से इनकार किया था. मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाद अब एनसीबी की ओर से चैट की कॉपी सेशन कोर्ट में भी दी गई है, जिसमें दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स गिरोह से आरोपियों का संपर्क और हार्ड ड्रग्स का जिक्र है.


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