America Iran Talks को लेकर पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जंग और शांति का फैसला इसी बातचीत पर निर्भर करता है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबफ की अगुवाई में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, लेकिन बातचीत शुरू होने से पहले ही गंभीर अटकाव सामने आ गए हैं।
ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि अतीत में किए गए सभी वादे तोड़े गए हैं। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान के नेता सिर्फ बातचीत के लिए ही जिंदा हैं। दोनों पक्षों के बीच जिस तरह का तनाव है, उससे लग रहा है कि यह बातचीत आसान नहीं होगी।
ईरान ने रखी भरोसे की शर्त, अमेरिका से मांगी संपत्ति वापसी
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबफ ने इस्लामाबाद पहुंचते ही साफ कर दिया कि ईरान की नियत साफ है लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका वाकई में एक असली समझौते के लिए तैयार है तो ईरान भी बातचीत के लिए राजी हो सकता है।
गालिबफ ने अमेरिका के साथ पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से अमेरिकियों के साथ हमारी बातचीत का अनुभव हमेशा नाकामी और वादों के उल्लंघन में ही खत्म हुआ है। इस बयान से साफ है कि ईरान इस बार बेहद सतर्क है और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता।
ईरान की सबसे बड़ी शर्त थी कि वार्ता शुरू होने से पहले जब्त की गई संपत्तियों को वापस किया जाए। खबरों के मुताबिक अमेरिका ने लगभग 7 से 8 बिलियन डॉलर की संपत्तियों को छोड़ने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना हुआ।
मिनाब 168: शहीद छात्रों की याद में ईरान का संदेश
ईरानी प्रतिनिधिमंडल जिस विमान में इस्लामाबाद पहुंचा, उसका नाम मिनाब 168 रखा गया है। यह नाम उन 168 छात्रों की याद में रखा गया जो इजराइल और अमेरिका के हमले में शहीद हो गए थे।
इस फ्लाइट में मिनाब स्कूल में मारे गए 168 छात्रों की तस्वीरें और खून से सने उनके स्कूल बैग रखे गए हैं। ईरान ने इस तरह पूरी दुनिया के सामने अमेरिका और इजराइल का क्रूर चेहरा उजागर कर दिया है। ईरान ने इस हमले के लिए माफी की मांग भी की है।
71 सदस्यीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल
ईरान की तरफ से 71 सदस्यीय मजबूत प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है। इसमें संसद स्पीकर गालिबफ के अलावा विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुल नासिर हिम्मती, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदीन, विदेश मामलों के उपमंत्री का गरीबादी और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई भी शामिल हैं।
बातचीत से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर से मुलाकात की। ईरान चाहता है कि पाकिस्तान उसे लेबनान में शांति पर ठोस आश्वासन दिलाए।
अमेरिका की तरफ से जेडी वेंस का नेतृत्व
अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरिड कुशनर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी इस्लामाबाद पहुंचे हैं।
जेडी वेंस को रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि ट्रंप के बाद वो राष्ट्रपति पद के मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं। इस वार्ता में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
ट्रंप की धमकी और ईरान का जवाब
बातचीत से पहले दोनों पक्षों की तरफ से जो बयान आ रहे हैं, वे डरा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि ईरान के नेता सिर्फ बातचीत के लिए ही जिंदा हैं। ईस्टर के मौके पर ट्रंप ने ईरान की पूरी सभ्यता को ही खत्म करने की धमकी दी थी, जिसे लेकर अमेरिका में भी उनके खिलाफ मोर्चा खुल गया था।
वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका हार के डर से बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहा था। ईरान ने साफ कहा है कि वे अमेरिका से जंग जारी रखने के लिए तैयार हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान और अमेरिका में फिर से जंग होगी।
चीन से हथियार, अमेरिका का सैन्य जमावड़ा
बातचीत से पहले ही दोनों देश युद्ध की तैयारी में जुटे हुए हैं। वर्ल्ड जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की तरफ से एक बार फिर पश्चिम एशिया में सैन्य जमावड़ा बढ़ाया जा रहा है।
वहीं ईरान भी हर तरह के हालात के लिए खुद को तैयार कर रहा है। खबर यह आ रही है कि चीन की तरफ से कई विमान ईरान में लैंड हुए हैं और माना जा रहा है कि इसमें बड़ी मात्रा में हथियार उपलब्ध कराए गए हैं। खुफिया रिपोर्ट्स का दावा है कि चीन ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दे रहा है।
क्या शांति होगी या फिर छिड़ेगी जंग
इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत का नतीजा पूरे पश्चिम एशिया के भविष्य को तय करेगा। अगर यह बातचीत सफल रही तो क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जग सकती है। लेकिन अगर यह वार्ता विफल हुई तो एक बार फिर से भयंकर जंग छिड़ सकती है।
ईरान और अमेरिका दोनों ने युद्ध की पूरी तैयारी कर रखी है। सैन्य जमावड़ा बढ़ाया जा रहा है और हथियारों की आपूर्ति तेज हो गई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या वाकई में शांति की कोशिशें चल रही हैं या एक बार फिर अमेरिका ईरान को धोखा देने वाला है।
पाकिस्तान की भूमिका अहम
इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका बेहद अहम है। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहा है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटा है कि बातचीत सफल हो।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात की है। पाकिस्तान यह चाहता है कि इस बातचीत से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति कायम हो।
लेबनान और इजराइल का मसला
बातचीत में लेबनान का मसला भी अहम है। ईरान चाहता है कि पहले लेबनान में युद्धविराम लागू हो और इजराइल अपनी सेना वापस बुलाए। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में 30 किलोमीटर तक घुसकर लिटानी नदी तट तक अपनी सेना पहुंचा दी है।
पश्चिम एशिया में सीजफायर हो चुका है लेकिन इजराइल अपनी सेना को वापस लौटने का आदेश नहीं दे रहा। यह मामला भी America Iran Talks में अहम मुद्दा बन सकता है।
दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर
अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हुई हैं। यह बातचीत पश्चिम एशिया के भविष्य को तय करेगी। अगर यह वार्ता सफल रही तो शांति की एक नई उम्मीद जगेगी, लेकिन अगर यह विफल हुई तो एक भयंकर जंग का खतरा मंडराएगा।
ईरान और अमेरिका के बीच भरोसे की कमी गहरी है। दोनों देशों के बीच अतीत में कई समझौते हुए लेकिन उन्हें तोड़ा भी गया। ऐसे में यह देखना होगा कि इस बार क्या होता है और क्या दोनों देश किसी ठोस नतीजे पर पहुंच पाते हैं या नहीं।
मुख्य बातें (Key Points):
- अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में ऐतिहासिक बातचीत शुरू, लेकिन शर्तों पर अटकाव
- ईरान ने कहा – अमेरिका पर भरोसा नहीं, अतीत में सभी वादे तोड़े गए
- अमेरिका ने 7-8 बिलियन डॉलर की संपत्ति वापसी की मंजूरी दी
- मिनाब 168 फ्लाइट में 168 शहीद छात्रों की तस्वीरें और खून से सने बैग
- जेडी वेंस, मार्को रूबियो अमेरिका की तरफ से, गालिबफ, अराक्षी ईरान की तरफ से
- चीन ईरान को हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम दे रहा
- शांति या जंग का फैसला इसी बातचीत पर निर्भर













