शनिवार, 7 मार्च 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result
Home Breaking News

America Wants Ceasefire Iran War: ट्रंप को क्यों कहना पड़ा ‘हमले रोको’, खेल कुछ और है

ईरान पर हमले के 48 घंटे में अमेरिका के हथियार खत्म, सऊदी बोला 'हमें छोड़ दिया', शेयर बाजार धड़ाम, तेल 82 डॉलर पार — अब ट्रंप मांग रहे हैं युद्धविराम, लेकिन असली वजह ईरान नहीं कुछ और है

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 2 मार्च 2026
A A
0
America Wants Ceasefire Iran War
104
SHARES
691
VIEWS
ShareShareShareShareShare
Google News
WhatsApp
Telegram

America Wants Ceasefire Iran War: ईरान पर बम बरसाने के बाद अब खुद डोनाल्ड ट्रंप को युद्धविराम की अपील करनी पड़ रही है — और यही इस पूरे युद्ध की सबसे बड़ी कहानी है। जिस अमेरिकी राष्ट्रपति ने 48 घंटे पहले ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को “मिट्टी में मिला देने” का ऐलान किया था, वही अब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से “हथियार जमीन पर रख दो” की गुहार लगा रहे हैं।

लेकिन यह युद्धविराम की अपील शांति की चाहत से नहीं, बल्कि उन संकटों से पैदा हुई है जो अमेरिका को चारों तरफ से घेरने लगे हैं — मध्यपूर्वी देशों का भरोसा टूट रहा है, अमेरिकी बेस पर हथियार खत्म हो रहे हैं, कच्चे तेल की कीमतें $82.67 प्रति बैरल पार कर गई हैं, दुनिया भर के शेयर बाजार धड़ाम हो रहे हैं और अमेरिका के भीतर ही सवाल उठने लगा है — “यह युद्ध अमेरिका के लिए है या इसराइल के लिए?”


ट्रंप की अपील: ‘हथियार रखो वरना मौत तय है’

ट्रंप ने अपने ताजा संबोधन में एक अजीब विरोधाभास पैदा किया। एक तरफ उन्होंने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और सैन्य पुलिस से कहा — “हथियार जमीन पर रख दो, आपको पूरी इम्यूनिटी दी जाएगी, कोई कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन अगर नहीं रोके तो मौत तय है।”

दूसरी तरफ उन्होंने ईरान की जनता से सीधी अपील करते हुए कहा — “जो ईरानी देशभक्त आजाद होना चाहते हैं, मैं उनसे आग्रह करता हूं कि इस मौके पर साहस दिखाएं, वीर बनें और अपना देश वापस ले लें। अमेरिका आपके साथ खड़ा है।”

यह बयान ऊपर से देखने में ताकत का प्रदर्शन लगता है, लेकिन असल में यह अमेरिका की बढ़ती बेचैनी को बयां कर रहा है। जो राष्ट्रपति 48 घंटे पहले “ईरान को मिट्टी में मिला देने” की बात कर रहा था, वही अब दुश्मन से हथियार रखने की गुहार लगा रहा है — इसके पीछे की असली वजहें कहीं ज्यादा गहरी और चिंताजनक हैं।


खामेनई नहीं रहे, लेकिन ईरान का सिस्टम और मजबूत हुआ

अमेरिका और इसराइल ने सोचा था कि आयातुल्ला खामेनई को मारकर ईरान को ‘हेडलेस’ (बिना सिर का) बना दिया जाएगा और सिस्टम ढह जाएगा। लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उलटा।

खामेनई अपने दफ्तर में ही रहे — वे किसी बंकर में नहीं छिपे। उन्हें पता था कि ईरान का पूरा शासन तंत्र सिर्फ एक सुप्रीम लीडर के हाथ में नहीं होता, बल्कि उनके द्वारा बनाया गया एक सिस्टम है जो सामूहिक रूप से (Collective Way) काम करता है। खामेनई की शहादत ने ईरान के पूरे सिस्टम को बिखेरने की जगह और एकजुट कर दिया।

यह भी पढे़ं 👇

Aaj Ka Rashifal 7 March 2026

Aaj Ka Rashifal 7 March 2026: किसकी चमकेगी किस्मत, जानें यहां

शनिवार, 7 मार्च 2026
Iran Israel War India Russia Oil News Today

दिनभर की बड़ी खबरें: Iran का Israel पर ब्रह्मास्त्र, भारत को Russia से तेल पर 30 दिन की मोहलत, Bihar में सियासी भूचाल!

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
Why Life in India is Frustrating1

Why Life in India is Frustrating: अमीर होते भारत में जिंदगी इतनी थकाऊ क्यों?

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
Sanjeev Arora

Punjab Electricity Rate Cut 2026-27: घरेलू उपभोक्ताओं को ₹1.55/यूनिट की राहत, EV Charging देश में सबसे सस्ती ₹5/यूनिट!

शुक्रवार, 6 मार्च 2026

अब ट्रंप के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उनके पास कोई चेहरा नहीं बचा जिस पर निशाना साधा जा सके। खामेनई मारे गए, लेकिन ईरान का सिस्टम पहले से ज्यादा तीखे तरीके से जवाब दे रहा है। दुनिया को यह संदेश गया कि ईरान को सुप्रीम लीडर नहीं चलाते — सुप्रीम लीडर द्वारा तैयार किया गया सिस्टम चलाता है। इसीलिए ट्रंप को अब इस्लामिक गार्ड्स का सहारा लेना पड़ रहा है और आंदोलनकारियों को ढाल बनाने की कोशिश करनी पड़ रही है।


सऊदी अरब का विस्फोट: ‘अमेरिका ने हमें त्याग दिया’

इस पूरे युद्ध का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मध्यपूर्व के वो देश जो अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे, उन्होंने ही अमेरिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

सऊदी अरब की अरामको कंपनी की रास तनूरा रिफाइनरी (दमाम के पास) पर ईरानी हमले से भीषण आग लग गई। इस हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने जो बयान दिया वह अमेरिका के लिए करारा तमाचा था — “अमेरिका ने हमें अकेला छोड़ दिया। उसका पूरा एंटी-मिसाइल सुरक्षा कवच सिर्फ इसराइल की रक्षा में लगा हुआ है। अमेरिका ने अपनी हवाई रक्षा को इसराइल की ओर मोड़ दिया और अमेरिकी सैन्य अड्डों वाली सभी खाड़ी देशों को ईरानी हमलों के भरोसे छोड़ दिया।”

यह बयान किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी का है जिसने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए यह कहा। यह बताता है कि मध्यपूर्व में अमेरिका के सबसे भरोसेमंद साथी का भरोसा टूट चुका है।


गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने खोला मोर्चा: ‘हमले रोको, बातचीत करो’

सऊदी अरब अकेला नहीं है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) — जिसमें यूएई, बहरेन, सऊदी अरब, ओमान, कतर और कुवैत शामिल हैं — इन सभी ने मिलकर खुली अपील की कि हमले तुरंत रोके जाएं और बातचीत की दिशा में बढ़ा जाए।

इन देशों ने कहा कि ईरान का उन पर हमला उनकी संप्रभुता का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। लेकिन साथ ही उनकी नाराजगी अमेरिका से भी उतनी ही गहरी है — क्योंकि अमेरिका ने अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था इसराइल की तरफ मोड़ दी और मध्यपूर्वी सहयोगियों को ईरान के हमलों के सामने बेसहारा छोड़ दिया।

ईरान ने भी बिना देर किए इस स्थिति का फायदा उठाया। ईरान के विदेश मंत्री ने जवाब दिया — “हम पड़ोसी देशों पर हमला नहीं कर रहे हैं। हम उन देशों में अमेरिकियों की मौजूदगी को निशाना बना रहे हैं जहां अमेरिकी बेस हैं। और पड़ोसियों को अपनी शिकायत इस युद्ध का फैसला लेने वालों तक पहुंचानी चाहिए।” ईरान का यह संदेश बिल्कुल साफ है — जिसने आपको छोड़ दिया, उससे सवाल करो।


अमेरिका के हथियार 48 घंटे में खत्म: यूरोप ने खोले अपने दरवाजे

इस युद्ध का एक ऐसा पहलू सामने आया है जिसने अमेरिका की सैन्य ताकत पर ही सवालिया निशान लगा दिया। खबरें आ रही हैं कि शुरुआती 48 घंटों के भीषण हमलों में अमेरिका ने मध्यपूर्व के अपने बेस पर मौजूद जितने भी हथियार, मिसाइलें और बम थे — उनका बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है। कई अमेरिकी बेस पर हथियारों का स्टॉक या तो खत्म हो गया है या ईरानी हमलों में नष्ट हो गया है।

इसी कारण ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे नाटो देशों ने अपने सैन्य अड्डे अमेरिका के लिए खोल दिए हैं और हथियारों की आपूर्ति शुरू कर दी है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका उनके बेस का इस्तेमाल कर सकता है।

लेकिन इसकी कीमत भी तुरंत चुकानी पड़ी — साइप्रस में ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर हमला हो गया। यानी जो भी देश अमेरिका और इसराइल के साथ खड़ा हो रहा है, ईरान उसे भी निशाने पर ले रहा है। यह स्थिति बताती है कि ट्रंप आगे तो बढ़ गए, लेकिन अब पीछे लौटना मुश्किल है — क्योंकि पीछे हटे तो इसराइल खतरे में, और आगे बढ़े तो आर्थिक तबाही।


इसराइल का परमाणु प्लांट निशाने पर: रेडिएशन लीकेज का भयावह खतरा

इस युद्ध ने एक ऐसा खतरा पैदा कर दिया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। ईरान ने इसराइल के परमाणु रिएक्टर (न्यूक्लियर पावर प्लांट) पर सीधा हमला कर दिया। इसराइल आज तक IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) का सदस्य नहीं बना है और उसने कभी आधिकारिक तौर पर यह नहीं माना कि उसके पास परमाणु हथियार हैं — लेकिन दुनिया जानती है।

दूसरी तरफ ईरान के नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर भी अमेरिका-इसराइल ने हमला किया। यह फैसिलिटी अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है, लेकिन IAEA ने कहा कि उसे इस हमले की कोई जानकारी नहीं। जबकि ठीक इसके उलट, इसराइल के परमाणु प्लांट पर हमले पर IAEA ने तुरंत चिंता जताई।

IAEA ने कहा — “हालात वाकई चिंताजनक हैं। गंभीर परिणाम हो सकते हैं। रेडिएशन के खतरों से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान अथॉरिटी से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।” अगर कहीं भी यूरेनियम लीकेज हो गया तो शहर-दर-शहर खाली कराने पड़ जाएंगे — यह परिस्थिति इस युद्ध को एक पारंपरिक संघर्ष से कहीं आगे ले जा सकती है।

इन दो स्थितियों के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का दोहरापन साफ दिख रहा है — ईरान का निगरानी में रहने वाला प्लांट बमबारी में नष्ट हो जाए तो IAEA को कोई चिंता नहीं, लेकिन इसराइल का वह प्लांट जो किसी निगरानी में है ही नहीं, उस पर हमले से IAEA परेशान हो गया।


दुनिया भर में आर्थिक तबाही: तेल $82.67, शेयर बाजार धड़ाम

इस युद्ध का सबसे तेज और सबसे गहरा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में एक झटके में 5 से 8% की उछाल आई है और ब्रेंट क्रूड $82.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर रोक लगा दी है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है — इस पर रोक लगने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर झटका लगा है।

भारत के शेयर बाजार में पहले घंटे में ही निवेशकों के लगभग ₹6 लाख करोड़ डूब गए। उसके बाद भी बाजार में कोई सुधार नहीं आया, बल्कि गिरावट जारी रही। यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं — दुनिया भर के बाजार गिरे हैं।

कुवैत में मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर मलबा गिरा। सऊदी अरब में अरामको की रिफाइनरी में भीषण आग लगी। ये वो ठिकाने हैं जहां से दुनिया को तेल मिलता है — इन पर हमले का मतलब है कि आम आदमी की जेब पर सीधा असर। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगी, महंगाई बढ़ेगी और रुपये पर भारी दबाव पड़ेगा।


चीन और रूस ने दी कड़ी प्रतिक्रिया: ‘तुरंत सैन्य कार्रवाई रोको’

चीन और रूस — दोनों ने इस बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। चीन ने कहा कि खामेनई की हत्या संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और नियमों के खिलाफ है। ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन हुआ है। चीन ने तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने, तनावपूर्ण हालात को न बढ़ाने और मध्यपूर्व व पूरी दुनिया में शांति-स्थिरता की अपील की।

रूस ने इस हत्या को “मानव नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ” बताया और तुरंत राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर लौटने की मांग की।

हालांकि दोनों देश अभी सीधे युद्ध में नहीं कूदे हैं, लेकिन ईरान को पहले से हथियारों का सहयोग और नैतिक समर्थन लगातार देते रहे हैं। अगर यह युद्ध और लंबा खिंचा तो चीन-रूस का सीधे उतरना भी असंभव नहीं — और यह परिस्थिति अमेरिका के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न होगी।


प्रधानमंत्री मोदी ने जताई गहरी चिंता: 80-90 लाख भारतीय खतरे में

खाड़ी देशों में 80 से 90 लाख भारतीय रहते हैं — जहां-जहां मिसाइलें गिर रही हैं, वहां भारतीय कामगार, व्यापारी और उनके परिवार मौजूद हैं। कुछ लोग फंसे हुए हैं, कुछ के सामने रोजगार का संकट है और जो वहां बस चुके हैं उनके सामने सवाल है — अब कहां जाएं?

प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार चिंता व्यक्त करते हुए कहा — “पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।”

लेकिन सवाल यह है कि जब एयरस्पेस बंद हो, फ्लाइट्स कैंसिल हों और युद्ध का कोई अंत दिखाई न दे — तब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा व्यावहारिक रूप से कैसे सुनिश्चित होगी?


असली खेल क्या है: ईरान नहीं, मकसद कुछ और

इस पूरे युद्ध को ध्यान से देखें तो यह डिफेंसिव (रक्षात्मक) कतई नहीं है — यह पूरी तरह जियोपॉलिटिक्स (भू-राजनीतिक खेल) है। अमेरिका इस युद्ध में तीन चीजें चाहता है — पहला, तेहरान में एक लचीली सरकार जो अमेरिका की बात माने। दूसरा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ताकि दुनिया के तेल की चाबी उसके हाथ में रहे। तीसरा, ईरान की क्षेत्रीय पहुंच को सीमित करना।

दूसरी तरफ इसराइल चाहता है कि इस पूरे कालखंड में वह मध्यपूर्व की सबसे ताकतवर शक्ति बनकर उभरे — और यही बात वह अमेरिका से कह भी रहा है।

अमेरिका के भीतर ही अब यह सवाल गूंजने लगा है — “यह युद्ध अमेरिका के लिए नहीं, इसराइल की ताकत बरकरार रखने और ‘ग्रेटर इसराइल’ बनाने के लिए किया जा रहा है।” अमेरिकी टैक्सपेयर का पैसा और अमेरिकी सैनिकों की जानें इसराइल के विस्तार के लिए दांव पर लगाई जा रही हैं — यह आवाज अब अमेरिका की सड़कों से उठने लगी है।

ट्रंप जिस आर्थिक महाशक्ति का सपना देख रहे थे, वह इस युद्ध ने चकनाचूर कर दिया है। डूबते शेयर बाजार, बढ़ता कच्चा तेल, कमजोर होती अर्थव्यवस्था — ये सब संकेत हैं कि इस युद्ध की कीमत अमेरिका खुद चुका रहा है।


मध्यपूर्व में कौन करेगा मध्यस्थता?

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि इस बिगड़ते हालात में कोई समझौता या बातचीत किसके आश्रय में होगी? अमेरिका खुद युद्धरत है। रूस और चीन अभी सीधे कूदे नहीं हैं लेकिन ईरान के साथ खड़े हैं। मध्यपूर्वी देश अमेरिका से नाराज हैं।

एक तरफ यूरोपीय देश अमेरिका के लिए दरवाजे खोल रहे हैं, दूसरी तरफ मध्यपूर्व अमेरिका से दूर होता जा रहा है। एक तरफ इसराइल को बचाना है, दूसरी तरफ ईरान को रोकना है — और दोनों के लिए अमेरिका का रुख बिल्कुल अलग-अलग है।

ईरान अपने सर्वाइवल (अस्तित्व) की लड़ाई लड़ रहा है। मध्यपूर्वी देश अपनी सुरक्षा को लेकर अमेरिका से मोहभंग के दौर में हैं। और अमेरिका एक ऐसी चक्रव्यूह में फंस गया है जिसमें आगे बढ़ना भी मुश्किल है और पीछे हटना भी — क्योंकि पीछे हटे तो इसराइल खतरे में, आगे बढ़े तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था खतरे में।


मुख्य बातें (Key Points)
  • ट्रंप ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से हथियार रखने की अपील की — 48 घंटे पहले “मिट्टी में मिलाने” की बात कहने वाले अब युद्धविराम मांग रहे हैं; अमेरिकी बेस पर हथियार खत्म होने और आर्थिक संकट गहराने से यह कदम उठाना पड़ा।
  • सऊदी अरब ने अमेरिका पर लगाया “त्याग देने” का आरोप — अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी में आग लगी; GCC देशों ने कहा अमेरिका ने सारी सुरक्षा इसराइल को दी, हमें बेसहारा छोड़ा।
  • कच्चा तेल $82.67/बैरल, होर्मुज बंद — दुनिया भर के शेयर बाजार गिरे; भारत में पहले घंटे में ₹6 लाख करोड़ डूबे; 80-90 लाख भारतीय खाड़ी में खतरे में।
  • IAEA ने रेडिएशन लीकेज का खतरा जताया — इसराइल के न्यूक्लियर प्लांट पर ईरानी हमले से शहर खाली कराने की नौबत आ सकती है; अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का दोहरापन उजागर।
Previous Post

Punjab Police Gangster War: 41वें दिन 409 छापे, 132 गिरफ्तार, 5 हथियार बरामद, नशा तस्करों पर भी शिकंजा

Next Post

India Stand on Iran Attack: मोदी ने सऊदी-UAE-इसराइल को फोन किया, ईरान को नहीं – भारत का स्टैंड क्या है?

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Aaj Ka Rashifal 7 March 2026

Aaj Ka Rashifal 7 March 2026: किसकी चमकेगी किस्मत, जानें यहां

शनिवार, 7 मार्च 2026
Iran Israel War India Russia Oil News Today

दिनभर की बड़ी खबरें: Iran का Israel पर ब्रह्मास्त्र, भारत को Russia से तेल पर 30 दिन की मोहलत, Bihar में सियासी भूचाल!

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
Why Life in India is Frustrating1

Why Life in India is Frustrating: अमीर होते भारत में जिंदगी इतनी थकाऊ क्यों?

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
Sanjeev Arora

Punjab Electricity Rate Cut 2026-27: घरेलू उपभोक्ताओं को ₹1.55/यूनिट की राहत, EV Charging देश में सबसे सस्ती ₹5/यूनिट!

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
punjab-cabinet-congress-governor-address-boycott-response

Congress ने राज्यपाल अभिभाषण का बहिष्कार कर लोकतंत्र का अपमान किया: Punjab Cabinet Ministers का पलटवार

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
Punjab Budget 2026-27 Cabinet Approval

Punjab Cabinet की बड़ी बैठक: CM Bhagwant Mann की अध्यक्षता में Budget 2026-27 को मिली मंजूरी, 8 मार्च को Finance Minister Harpal Cheema पेश करेंगे बजट!

शुक्रवार, 6 मार्च 2026
Next Post
India Stand on Iran Attack

India Stand on Iran Attack: मोदी ने सऊदी-UAE-इसराइल को फोन किया, ईरान को नहीं - भारत का स्टैंड क्या है?

Punjab Excise Policy

Haryana Bank Fraud AAP Punjab: 550 करोड़ घोटाले पर चीमा का हमला, भाजपा नई टेक्नोलॉजी में फेल

0 0 votes
Rating
Subscribe
Notify of
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

GN Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।