Akali Dal Online Membership : शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने अपने संगठन विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सदस्यता प्रक्रिया को अब ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। यह घोषणा पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुल्लांपुर (Mullanpur) से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली (Manpreet Singh Ayali) ने फतेहगढ़ साहिब (Fatehgarh Sahib) में एक रक्तदान शिविर के दौरान की। अयाली ने बताया कि यह नई प्रणाली सबसे पहले विदेशों में लागू की जाएगी, ताकि एनआरआई (NRI) समर्थक भी पार्टी से सीधे जुड़ सकें। इसके बाद इसे पंजाब (Punjab) और देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा।
अयाली ने कहा कि भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के मौजूदा तनावपूर्ण हालात को देखते हुए पार्टी की 10 मई को होने वाली प्रस्तावित बैठक को स्थगित कर अब 24 मई को बुलाया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने कांग्रेस (Congress) पर पानी के मुद्दे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा (Haryana) के बंटवारे के बाद राज्य के जल अधिकारों को कमजोर करने वाले असंवैधानिक प्रावधान लागू किए गए, जिनका विरोध स्व. प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal) की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में किया था।
मनप्रीत अयाली ने तत्कालीन इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) सरकार पर आरोप लगाया कि उसने धमकियों और दबाव की राजनीति के जरिए पंजाब के जल अधिकारों (Water Rights) का हनन किया। उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (Bhakra Beas Management Board) को भी असंवैधानिक बताया और कहा कि पंजाब के जल संसाधनों पर केवल पंजाब को ही अधिकार होना चाहिए, अन्य राज्यों को नहीं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्तमान में पंजाब को उसके हिस्से का केवल 25 प्रतिशत पानी मिल रहा है, जबकि शेष पानी हरियाणा, राजस्थान (Rajasthan) सहित अन्य राज्यों को दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार पर पंजाब के प्रति अरबों रुपये की देनदारी है, लेकिन अब तक उसका भुगतान नहीं किया गया है। अयाली ने कहा कि जानबूझकर योजनाबद्ध तरीके से पंजाब को विकास से पीछे धकेला जा रहा है और इसके जल अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
शिरोमणि अकाली दल की यह नई डिजिटल पहल पार्टी के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में राजनीतिक रूप से अहम साबित हो सकती है। वहीं, पानी के मुद्दे पर फिर से उठी आवाज ने पंजाब के अधिकारों की बहस को दोबारा ज़ोर पकड़वा दी है।













