बच्चों के ऑनलाइन क्लास और स्क्रीन टाइम पर गाइडलाइन लाएगा एम्स


नई दिल्ली, 28 अगस्त (The News Air)
देश के जाने-माने कंट्रैक्ट सर्जन व एम्स आरपी सेंटर (राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेस) के नवनियुक्त चीफ़ डॉक्टर जीवन सिंह तितियाल ने कहा है कि कोरोना की वजह से आंखों का इलाज बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है। इसे फिर से पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले कुछ दिनों में ही आरपी सेंटर के वर्क़ फ्लो को बेहतर कर इलाज में तेज़ी लाई जाएगी।
‘वैक्सीन लेने के बाद डेल्टा वायरस से 60 फ़ीसदी तक घटता है संक्रमण का ख़तरा’– वहीं, कोविड काल में बच्चों से लेकर बड़ों तक के चश्मे के बढ़ते नंबर पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अभी इसको लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है। जल्द ही एम्स का आरपी सेंटर एक रिसर्च बेस्ड गाइडलाइन जारी करेगा, जिससे यह दुविधा कम हो सकेगी।
वर्क़ फ्लो बढ़ाने की चुनौती– एनबीटी से ख़ास बातचीत में डॉ. तितियाल ने कहा कि कोविड से कई तरह की चुनौतियां यही नहीं, समय पर इलाज नहीं मिलने से कुछ का मोतियाबिंद ग्लूकोमा में बदल गया है जिससे सर्जरी का लोड बढ़ रहा है। हम वर्क़ फ्लो और काम के घंटे बढ़ाएंगे, मेडिकल रिकॉर्ड को इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड में बदला जाएगा। इससे ओपीडी बेसिस पर काम पटरी पर लाने की कोशिश होगी। ऑपरेशन का बैकलॉग भी कम किया जाएगा।
स्क्रीन टाइम के लिए बनेगी गाइडलाइन– डॉ. तितियाल ने कहा कि लंबे समय से ऑनलाइन एजुकेशन और वर्क़ फ्रॉम होम की वजह से बच्चों और बड़ों के चश्मे का नंबर बढ़ गया है। ओपीडी में ऐसे मरीज़ों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है। इनकी काउंसलिंग भी करनी पड़ रही है कि कितना समय स्क्रीन पर दें और क्या-क्या सावधानियां अपनाएं। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, इसलिए गाइडलाइन की ज़रूरत है।


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