Agriculture Export : 20 जनवरी 2026 को गुवाहाटी में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एपीडा और असम सरकार के सहयोग से एक अहम जैविक उत्पाद सम्मेलन-सह-खरीदार–विक्रेता बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य असम से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों व निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जोड़ना रहा।
गुवाहाटी में आयोजित इस सम्मेलन में असम के 30 से अधिक निर्यातकों, 9 आयातकों और करीब 50 किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) ने हिस्सा लिया। इस मंच ने खरीदारों और विक्रेताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद को संभव बनाया, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए नए व्यापारिक अवसर खुले।

एपीडा की अगुवाई में बड़ा निर्यात प्रयास
यह सम्मेलन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा आयोजित किया गया, जो लंबे समय से क्षेत्रीय कृषि शक्तियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर काम कर रहा है। सम्मेलन का फोकस असम के कृषि-निर्यात संबंधों को मजबूत करने और बाजार तक पहुंच में व्यावहारिक सुधार लाने पर रहा।
असम की कृषि ताकत, वैश्विक मांग
असम अपनी समृद्ध कृषि-जलवायु विविधता के कारण निर्यात की अपार संभावनाएं रखता है। जोहा चावल और अन्य गैर-बासमती विशेष चावल किस्मों के अलावा केला, अनानास, संतरा, असम नींबू, जैविक अदरक, हल्दी, काली मिर्च और अन्य बागवानी व जैविक उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में असम की मजबूत पहचान बना सकते हैं।
खरीदार–विक्रेता बैठक से क्या बदला
क्रेता–विक्रेता बैठक ने व्यापारिक संबंधों के लिए एक संरचित मंच दिया। इससे उत्पादकों और निर्यातकों को न केवल नए खरीदार मिले, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारियों की संभावनाएं भी बनीं। यह पहल खास तौर पर छोटे और मध्यम किसानों के लिए अहम रही, जो अब तक वैश्विक बाजार से दूर थे।
जैविक उत्पादन पर जागरूकता सत्र
सम्मेलन में जैविक उत्पादन के राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPOP) के आठवें संस्करण पर एक विशेष जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें नियामक ढांचे, प्रमाणन और लेबलिंग से जुड़ी आवश्यकताओं को विस्तार से समझाया गया, ताकि निर्यातक और किसान अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन कर सकें।
राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश
असम सरकार के कृषि, बागवानी और उत्पाद शुल्क मंत्री अतुल बोरा ने अपने संबोधन में कहा कि असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले जैविक उत्पादों का विशाल भंडार है, जिनकी वैश्विक स्तर पर मजबूत मांग है। उन्होंने जोर दिया कि एपीडा के सहयोग से एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण और बाजार पहुंच को मजबूत कर राज्य अपने किसानों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित कर रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर सहयोग
असम सरकार की आयुक्त एवं सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया ने कहा कि जीआई टैग और जैविक प्रमाणन वाले असम के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी संभावनाएं रखते हैं। एपीडा के साथ मिलकर काम करने से किसानों और उद्यमियों को टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य निर्यात मॉडल मिलेगा।
एपीडा अध्यक्ष का नजरिया
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने असम सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि संशोधित एनपीओपी, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ जैविक पारस्परिक मान्यता समझौते और ब्रिटेन, ओमान तथा ईएफटीए देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते, असम के जैविक उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को और व्यापक बनाएंगे।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह पहल
यह सम्मेलन केवल एक व्यापारिक बैठक नहीं, बल्कि असम और पूर्वोत्तर भारत को कृषि निर्यात के वैश्विक नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की रणनीति है। जैविक उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच, यह पहल भारत को उच्च मूल्य वाले और टिकाऊ कृषि निर्यात में प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला सकती है।
आम किसानों पर असर
इस पहल से किसानों को बेहतर कीमत, स्थिर मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की सीधी समझ मिलेगी। इससे न केवल उनकी आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि खेती को एक दीर्घकालिक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
जानें पूरा मामला
एपीडा और असम सरकार की यह संयुक्त पहल असम को उच्च मूल्य वाले जैविक और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में एक प्रमुख राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है।
मुख्य बातें (Key Points)
- गुवाहाटी में एपीडा की जैविक खरीदार–विक्रेता बैठक
- 30+ निर्यातक, 9 आयातक और 50 FPCs की भागीदारी
- जोहा चावल, मसाले और जैविक उत्पादों पर फोकस
- किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की रणनीति








