68 साल बाद फिर टाटा की एयर इंडिया; सरकार ने बोली को दी मंजूरी, 43 हजार करोड़ का है कर्ज

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (The News Air)

देश की एयरलाइन एयर इंडिया की बोली टाटा संस ने जीत ली है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने टाटा संस की बोली को मंजूरी दे दी है। टाटा समूह स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह से अधिक बोली लगाकर 68 साल बाद एयर इंडिया में फिर से शामिल हुआ है।

ये है एयर इंडिया की मौजूदा स्थिति

  • मार्च, 2021 को समाप्त तिमाही में एयर इंडिया को 95000-10000 करोड़ रुपये के नुकसान की उम्मीद है
  • 31 मार्च 2019 तक एयर इंडिया पर 60,074 करोड़ रुपये का कर्ज है
  • एयर इंडिया को खरीदने पर टाटा संस को अब उठाना होगा 23,286.5 करोड़ रुपये का कर्ज
  • अब सरकार एयर इंडिया की एक अन्य कंपनी Air India Sats (AISATS) में 50% हिस्सेदारी बेचेगी।
  • एयर इंडिया की बिक्री के लिए गठित समिति में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हैं। एयर इंडिया का रिजर्व प्राइस 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये तय किया गया था।

दिसंबर से टाटा समूह के पास होगा एयर इंडिया
लगभग 68 साल पहले, एयर इंडिया का स्वामित्व टाटा समूह के पास था। इस बोली को जीतने के बाद दिसंबर तक एयर इंडिया को फिर से टाटा समूह को सौंप दिया जाएगा। लंबे समय से भारी कर्ज में डूबी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया चल रही थी। उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया था कि 15 सितंबर की आखिरी तारीख में बदलाव नहीं किया जाएगा।

पहले 76 फीसदी शेयर बेचे जाने थे
सरकार ने पहले 2018 में एयर इंडिया में 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन उस समय इसके लिए कोई खरीदार नहीं मिला और फिर इसे पूरी तरह से बेचने की कवायद शुरू हो गई। एयर इंडिया पर कुल 43,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने की थी। टाटा समूह के जेआरडी टाटा इसके संस्थापक थे। वे खुद पायलट थे। इसके बाद इसका नाम बदलकर टाटा एयर सर्विस कर दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसे एक सरकारी कंपनी बना दिया गया था। आजादी के बाद सरकार ने इसमें 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी।

क्या बंद होगी एयर इंडिया?
सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि अगर एयर इंडिया का निजीकरण नहीं किया गया तो उसे बंद करना होगा. इसके संचालन के लिए धन कहां से आएगा? वर्तमान में एयर इंडिया प्रथम श्रेणी की संपत्ति है। ऐसे में खरीदारों को यह आसानी से मिल जाएगा।

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