BharatPe के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर पर एक्‍शन, कंपनी ने सभी पदों से हटाया

पेमेंट स्‍टार्टअप ‘भारत पे’ (BharatPe) के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर और कंपनी के बीच चल रहा विवाद अब अशनीर के इस्‍तीफे तक पहुंच गया है। कंपनी ने अशनीर ग्रोवर को सभी पदों से हटा दिया है। उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें कंपनी में उनकी हिस्‍सेदारी को वापस लेना भी शामिल है। एक बयान में कंपनी ने कहा कि ग्रोवर ने आगामी बोर्ड बैठक के लिए एजेंडे की जानकारी मिलने के बाद इस्तीफा दे दिया। इस बैठक में ग्रोवर के व्‍यवहार को लेकर एक ऑडिट रिपोर्ट दी जानी थी। पेमेंट की दुनिया में ‘भारत पे’ ने कम समय में ही अपनी पहचान बनाई है। यह दुकान मालिकों को QR कोड के जरिए डिजिटल पेमेंट की इजाजत देता है।

अशनीर ग्रोवर और उनके परिवार पर कंपनी के पैसों के दुरुपयोग में शामिल होने का आरोप है। दावा है कि ग्रोवर ने कंपनी के अकाउंट्स से पैसे निकाल लिए। कंपनी के एक्‍सपेंस अकाउंट्स का गलत इस्‍तेमाल किया, ताकि वो खुद को अमीर बना सकें। ग्रोवर पर लग्‍जरी लाइफ जीने के लिए कंपनी के पैसों के दुरुपयोग का आरोप है।

बताया जाता है कि 1 मार्च की आधी रात से कुछ मिनट पहले अशनीर ग्रोवर को 2 मार्च को शाम 7:30 बजे बोर्ड की बैठक के लिए एक ई-मेल मिला। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। भारत पे में ग्रोवर की मौजूदा हिस्‍सेदारी 9.5 प्रतिशत है। उनके सहयोगी शाश्वत नाकरानी के पास 7.8 फीसदी की हिस्सेदारी है। निवेशक सिकोइया कैपिटल इंडिया 19.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत पे में सबसे बड़ा शेयरधारक है। इसके बाद Coatue के पास 12.4 प्रतिशत और रिबिट कैपिटल 11 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी है।

कंपनी के बयान पर अशनीर ग्रोवर ने कहा कि वह हैरान थे, लेकिन आश्चर्यचकित नहीं थे। उन्‍होंने कहा कि यह व्यक्तिगत घृणा और लो-थिंकिंग है। ‘मैं जानना चाहता हूं कि अमरचंद, PwC और A&M में से किसने अपनी लाइफस्‍टाइल पर ऑडिट करना शुरू कर दिया है?’

गौरतलब है कि इस विवाद को करीब दो महीने हो गए हैं। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद कंपनी ने इसकी जांच के लिए एक कानूनी फर्म और कुछ सलाहकारों को नियुक्त किया है। उन्‍होंने पिछले महीने अशनीर ग्रोवर की पत्‍नी माधुरी जैन को कंपनी ने बर्खास्‍त कर दिया है। आरोप है कि ग्रोवर की पत्‍नी ने कंपनी के पैसों को खुद पर खर्च किया। वह विदेश घूमने गईं, ब्‍यूटी ट्रीटमेंट लिए और इलेक्‍ट्रॉनिक आइटम्‍स खरीदे।

शुरुआती जांच में 50 करोड़ रुपये से ज्‍यादा के वित्तीय कदाचार की बात सामने आई है।

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