नई दिल्ली, 9 मार्च (The News Air) : 2024 के चुनावी रण में बीजेपी ने एनडीए गठबंधन के लिए 400 पार का टारगेट सेट किया है। इसके लिए पार्टी लगातार अपना कुनबा बढ़ाने में जुटी है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों में पार्टी लगातार नए साथियों को अपने साथ लाने को लेकर मंथन में जुटी है। पार्टी का फोकस उन राज्यों पर ज्यादा है जहां दूसरे दलों के साथ गठबंधन की गुंजाइश नजर आ रही। यही वजह है कि पार्टी की ओडिशा में बीजू जनता दल के साथ बातचीत चल रही। उधर, आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और पवन कल्याण की जेएसपी के साथ डील फाइनल नजर आ रही। बीजेपी आलाकमान का प्लान यही है कि किसी तरह आंध्र प्रदेश में दोनों दलों के साथ सीट शेयरिंग फॉर्म्युला फाइनल हो जाए। यही वजह है कि तेलगुदेशम पार्टी के मुखिया एन. चंद्रबाबू नायडू और जन सेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण के साथ गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। तीनों पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर दिल्ली में ये अहम बैठक हुई। जिसमें आगामी लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी सीट शेयरिंग फाइनल करने पर चर्चा हुई।
बीजेपी-6, JSP-2, TDP-17, क्या ये होगा फॉर्म्युला : आंध्र प्रदेश में लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं। सूत्रों से मिलीही जानकारी के मुताबिक, जो सीट शेयरिंग फॉर्म्युला तय हुआ है उसमें बीजेपी 6, जनसेना पार्टी 2 और टीडीपी 17 सीटों पर कैंडिडेट उतारेगी। वहीं आंध्र प्रदेश में होने वाले विधानसभा को लेकर भी सीट बंटवारे पर बातचीत जारी है। बताया जा रहा कि अभी इसी पर कुछ पेंच फंस रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सूबे में 175 विधानसभा सीटें हैं। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने साफ कह दिया है को व 145 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ऐसे में बीजेपी और जनसेना पार्टी के हिस्से में 30 सीटें ही आ रही हैं। अगर दोनों दलों के बीच 30 सीट को लेकर फॉर्मूला बनता है तो ये गठबंधन फाइनल हो जाएगा।
लोकसभा के साथ विधानसभा पर भी फोकस : बीजेपी की कोशिश विजाग, विजयवाड़ा, अराकू, राजमपेट, राजमुंदरी, तिरूपति समेत कुछ प्रमुख चुनावी क्षेत्रों को अपने पास रखने की है। माना जा रहा कि टीडीपी और जनसेना पार्टी के साथ बातचीत में ये प्वाइंट भी उठा है। बीजेपी का फोकस आगामी लोकसभा चुनावों में अकेले 370 सीटें जीतने का है। इस सफलता को हासिल करने के लिए वो क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को महत्वपूर्ण मान रही है। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश के अलावा, बीजेपी ओडिशा में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) के साथ भी चुनावी समझौते पर विचार कर रही है।
जानिए क्यों टीडीपी-बीजेपी आ रहे साथ :आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों में अपना प्रभुत्व बनाए रखना चाहती है। पांच साल पहले, वाईएसआर कांग्रेस राज्य की 25 लोकसभा सीटों में से 22 सीटें और 175 विधानसभा क्षेत्रों में से 151 सीटें जीतकर विजयी हुई थी। इसके विपरीत, बीजेपी को पिछले चुनावों में चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी। ऐसी स्थिति में पार्टी लोकसभा और विधानसभा दोनों में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी। पिछले चुनाव नतीजों से सबक लेते हुए ही पार्टी ने इस बार गठबंधन का दांव चला है। टीडीपी, जो एक समय एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। पार्टी को पूरी कोशिश है कि उन्हें वापस एनडीए में लाया जाए।








