– लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लाया गया मोदी सरकार का ये बिल कब लागू होगा? इस पर बड़ा सवाल है- संजय सिंह
– पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा, उसके बाद ही महिला आरक्षण बिल लागू हो सकेगा- संजय सिंह
– जनगणना 2031 में होगी, पिछली बार परिसीमन में 6-7 साल लगे थे, इस बार भी 6-7 साल लगे तो ये बिल 2039 में लागू हो पाएगा- संजय सिंह
– ये बिल 1996, 1998, 2002, 2008, 2009 और 2010 में भी आया था, लेकिन कभी लागू नहीं हुआ, मोदी जी अब इसे जुमले के रूप में ला रहे हैं- संजय सिंह
– 2010 में राज्यसभा में लाए गए बिल में जनगणना व परिसीमन का प्रावधान नहीं था, उसमें सीधे 33 फीसद आरक्षण देने की बात थी- संजय सिंह
– मोदी जी की नीयत साफ होती तो 2010 में लाए गए महिला आरक्षण बिल को ही लोकसभा में पारित कराते, वो लैप्स नहीं होता- संजय सिंह
– भाजपा की मानसिकता हमेशा महिला विरोधी रही है, ये बिल भी इसी दिशा में सिर्फ एक जुमला है- संजय सिंह
– ‘‘आप’’ इस बिल का विरोध करती है, अगर मोदी जी सच में महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हैं तो इसे 2024 में लागू करें- संजय सिंह
नई दिल्ली, 20 सितंबर (The News Air) महिला आरक्षण बिल का लाभ देश की महिलाओं को आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में नहीं मिलने पर आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी की नीयत पर प्रश्न खड़ा किया है। ‘‘आप’’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि मोदी जी ने देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसद आरक्षण देने के नाम पर ‘‘महिला बेबकूफ बनाओ’’ बिल का जुमला दिया है। पिछले 9 वर्षों में पीएम मोदी ने देश की जनता से जितने भी वादे किए, सब जुमले साबित हुए। महिला आरक्षण बिल कब लागू होगा या नहीं लागू होगा, इस पर बड़ा सवाल है। क्योंकि इसमें प्रावधान है कि पहले जनगणना होगी। इसके बाद परिसीमन होगा और उसके बाद ये बिल लागू हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जनगणना 2031 में होगी। पिछली बार परिसीमन में 6-7 साल लगे थे। अगर इस बार भी परिसीमन में 6-7 साल लग गए तो ये बिल 2039 में कहीं लागू हो पाएगा। इसलिए आम आदमी पार्टी इस बिल का विरोध करती है। अगर प्रधानमंत्री वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हैं तो यह बिल 2024 में ही लागू किया जाए।
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित कर महिला आरक्षण बिल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में भारत के प्रधानमंत्री ने देश की जनता से जितने भी वादे किए, सब जुमला और झूठा साबित हुए। चाहे दो करोड़ नौकरियों का वादा हो, काले धन का हो, 15 लाख देने का हो, फसल का दाम दोगुना करने का हो, पक्का मकान देने का हो या महंगाई कम करने का हो, सब जुमला साबित हुआ। अब चुनाव के ठीक पहले, इस देश की करोड़ों महिलाओं को जिस महिला आरक्षण बिल का इंतजार था, वह बिल न लागू करने की नीयत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकर आए हैं।
राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि महिला बेवकूफ बनाओ बिल है। यह जो बिल आ रहा है, यह बिल लागू होगा या नहीं होगा, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। जो महिला आरक्षण बिल 2010 में राज्यसभा के अंदर पास हुआ था, उसमें कहीं ऐसा कोई प्रावधान नहीं था कि पहले जनगणना और परिसीमन होगा। उसमें सीधे यह था कि महिलाओं को 33ः आरक्षण मिलेगा। अगर उनकी नियत साफ होती तो राज्यसभा में पारित बिल लैप्स नहीं होता और उसी बिल को यह लोग लोकसभा में पास कर सकते थे। लेकिन इन्होंने जुमले के रूप में एक नया बिल तैयार किया और कहा कि पहले जनगणना होगी फिर परिसीमन होगा और उसके बाद बिल लागू किया जाएगा। इसके लिए कोई समय सीमा नहीं दी।
उन्होंने कहा कि आर्टिकल 82 का बदलाव हुआ है। यह कहता है कि जनगणना के बाद ही परिसीमन होगा और जनगणना 2031 में होगी। उसके बाद कम से कम दो-तीन साल बाद परिसीमन होगा। पिछले परिसीमन में 7 साल लग गए थे। अगर इस बार भी 6-7 साल लग गए तो यह बिल 2039 में लाने की योजना बनाई गई है। मोदी जी एक नया जुमला फेंककर देश की करोड़ों महिलाओं को धोखा दे रहे हैं। यह बिल पहली बार 1996 में आया। इसके बाद 1998, 2002, 2008, 2009 और फिर 2010 में भी आया। करीब-करीब 27 साल हो गए हैं। इतने बहुप्रतीक्षित बिल को ये लोग ऐसे लेकर आए हैं कि वो बिल 2039 में लागू होगा और ये लागू होगा भी या नहीं, यह भी नहीं पता है।
राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार क्रेडिट चोर सरकार है। इनको हर चीज का क्रेडिट लेने की होड़ मची रहती है। फ्लाईओवर आप बनवाइए, फीता ये कटेंगे। सड़कें आप बनवाइए, फीता ये काटेंगे। मेट्रो आप बनवाइए, फीता ये काटेंगे। इसरो में लंबे समय तक रिसर्च चलेगा और क्रेडिट लेने का काम ये करेंगे।
इस बिल का विरोध करते हुए संजय सिंह ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण देने के नाम पर महिलाओं को बेवकूफ बनाने का बिल है। इसलिए आम आदमी पार्टी इस पर अपना विरोध दर्ज कर रही है। मोदी जी से मांग है कि अगर आपकी मंशा साफ है, अगर वास्तव में आप महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हैं तो 2024 में महिला आरक्षण बिल लागू कीजिए। आपकी पार्टी का इतिहास है कि आपने हमेशा महिलाओं के विरोध में काम किया है। उन्नाव कांड हुआ तो आरोपी के साथ खड़े हुए। हाथरस कांड हुआ तो आरोपी के साथ खड़े हुए। पहलवानों का कांड हुआ, तब भी आरोपी के साथ खड़े हुए। भाजपा की मानसिकता हमेशा देश की महिलाओं के खिलाफ रही है। हमेशा महिलाओं के विरोध में, महिलाओं के साथ अत्याचार करने वालों के साथ खड़े रहे। यह महिला आरक्षण बिल भी इसी दिशा में एक काम है जो सिर्फ एक जुमला है।








