Parvinder Jhota Postmortem: मानसा के नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा के पोस्टमॉर्टम में देरी हो रही है। करीब 24 दिन तक शव फ्रीजर में रखे रहने की वजह से पोस्टमॉर्टम में दिक्कत आ रही है। डॉक्टरों की टीम शव की स्थिति की जांच कर रही है।
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 7 नवंबर 2026 को उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हैं, पर पोस्टमॉर्टम अभी शुरू नहीं हो सका।
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24 दिन का इंतजार और PGI का सफर
झोटा का शव करीब 24 दिनों तक मानसा के सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा रहा। गुरुवार आधी रात (5 नवंबर) को उसे मानसा से PGI भेजा गया।
इंसाफ कमेटी के सदस्य गुरप्रीत सिंह झबर ने धरने की स्टेज से बताया कि पोस्टमॉर्टम में अभी समय लगेगा। दोपहर 12 बजे डॉक्टरों की टीम पोस्टमॉर्टम के लिए दोबारा जांच करेगी। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही अंतिम संस्कार का समय तय होगा। उन्होंने यह भी बताया कि परविंदर की मां धरने में मौजूद हैं।
पिता की भूख हड़ताल और SSP पर आरोप
झोटा के पिता भीम सिंह ने मांग रखी है कि पंजाब सरकार बेटे के अंतिम संस्कार से पहले मानसा के SSP वैभव चौधरी का तबादला करे। उनका आरोप है कि चौधरी के नशा न रोकने की वजह से ही झोटा की हत्या हुई।
भीम सिंह ने कहा कि जब तक SSP का ट्रांसफर नहीं होता, वह अन्न का एक दाना भी नहीं खाएंगे। उन्होंने दावा किया कि इस बारे में कृषि मंत्री गुरमीत खुड्डियां और स्पीकर कुलतार संधवां के साथ मीटिंग में भी बात हो चुकी थी। यह बात उन्होंने चंडीगढ़ में मीडिया से कही।
ट्रोलिंग पर पत्नी का दर्द
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने सरकारी नौकरी और 2 करोड़ रुपए के मुआवजे को लेकर हो रही ट्रोलिंग पर कड़ा एतराज जताया है। उनके शब्द थे, “ऐसे लोग 12 बोर की बंदूक लाएं और मानसा आकर हमारे पूरे परिवार को गोली मार दें।”
हैरान करने वाली बात यह है कि जिस परिवार ने बेटे को खोया, उसे अब सोशल मीडिया पर भी सफाई देनी पड़ रही है। यह किसी भी इंसान के लिए दर्दनाक है।
अंतिम संस्कार की तैयारी और युवाओं से अपील
मानसा में चकेरियां रोड पर उनकी पैतृक जमीन पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव के लोग तैयारियों में जुटे हैं और पुलिस ने इलाके में अलर्ट जारी किया है।
झोटा के साथी इंद्रजीत सिंह मुंशी ने कहा कि अंतिम यात्रा में आने वाला पंजाब का हर युवा संकल्प ले कि वह नशे से दूर रहेगा। साथ ही बिक रहे नशे के खिलाफ आवाज भी बुलंद करेगा। उन्होंने युवाओं से नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की अपील की।
इस मामले के मायने
अगर गौर करें तो यह मामला अब सिर्फ एक हत्या का नहीं रहा। एक तरफ 24 दिन से रुका पोस्टमॉर्टम है, दूसरी तरफ पिता की भूख हड़ताल और SSP के तबादले की मांग है। इसका मतलब है कि परिवार अंतिम संस्कार को भी प्रशासन से जवाबदेही की मांग के साथ जोड़ चुका है।
अंतिम संस्कार का समय पोस्टमॉर्टम पर टिका है और पोस्टमॉर्टम की जांच डॉक्टरों के हाथ में है। इसलिए आने वाले कुछ घंटे इस मामले में अहम रहेंगे। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवा और आम लोग इस पूरे घटनाक्रम को बारीकी से देख रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा का पोस्टमॉर्टम 24 दिन फ्रीजर में रहे शव की वजह से अटका है।
- झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या हुई थी, शव 5 नवंबर की आधी रात PGI भेजा गया।
- पिता भीम सिंह SSP वैभव चौधरी के तबादले तक अन्न नहीं खाएंगे।
- अंतिम संस्कार मानसा में चकेरियां रोड की पैतृक जमीन पर होगा, तैयारियां पूरी हैं।










