Gold Price Forecast: दिवाली से ठीक पहले सोने-चांदी के भाव में गिरावट के बीच हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है: क्या सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे जा सकता है? ऑल बुलियन एंड ज्वेलरी एसोसिएशंस के अध्यक्ष योगेश सिंघल का जवाब है कि जा सकता है, पर इसकी संभावना नहीं दिखती।
उनके मुताबिक अभी बाजार करेक्शन के दौर में है। आने वाले तीन साल तक वे सोने में बहुत बड़ी तेजी नहीं देखते। फिर भी जो लोग लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए मौजूदा भाव बुरे नहीं हैं।
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कीमतों का सफर: कहां से कहां
सिंघल के मुताबिक आज की तारीख में सोना करीब ₹1,38,000 पर है। जनवरी में यह करीब ₹1,93,000 के उच्चतम स्तर तक गया था, जबकि चांदी ऊपर में ₹4,30,000 तक पहुंची। पिछली दिवाली यानी 2025 में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,26,000 के आसपास था।
| पैमाना | स्तर |
|---|---|
| 24 कैरेट सोना, दिवाली 2025 | करीब ₹1,26,000 |
| सोने का उच्चतम स्तर (जनवरी) | करीब ₹1,93,000 |
| सोना, आज की तारीख में | करीब ₹1,38,000 |
| चांदी का उच्चतम स्तर | ₹4,30,000 |
सिंघल का कहना है कि तीन साल में सोना चार गुना और चांदी सात गुना हुई। अब सोना तकरीबन 35 प्रतिशत टूट चुका है और चांदी 60 प्रतिशत से ज्यादा।
गिरावट के पीछे के कारण
सिंघल ने कई वजहें गिनाईं। उनके मुताबिक यह प्रॉफिट बुकिंग और करेक्शन का दौर है।
पहला कारण यह है कि दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने तीन साल में अपने डॉलर को सोने में बदल लिया। अब हर सेंट्रल बैंक की खरीदारी हो चुकी है। भारत में भी रिक्शा वाले से पान वाले तक हर छोटे निवेशक ने किलो-दो किलो चांदी या सोना खरीद लिया। इस तरह निवेशक “फुल” हो चुके हैं।
दूसरा कारण अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का करीब 5 प्रतिशत तक बढ़ना है। जब वहां पक्का ब्याज मिले, तो सोने में निवेश कम होता है। तीसरा कारण कच्चे तेल का बढ़ना है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरों का रुख भी सोने के खिलाफ है।
रुपया और कस्टम ड्यूटी का दबाव
भारत के लिए दो और वजहें हैं। सिंघल के मुताबिक रुपया पिछले साल के ₹85 से कमजोर होकर अब ₹94-95 के आसपास पहुंच गया है। साथ ही कस्टम ड्यूटी 9 प्रतिशत बढ़ गई है। इन दोनों को मिलाकर वे करीब 20 प्रतिशत असर बताते हैं।
उनका कहना है कि अगर यह ड्यूटी न बढ़ती और रुपया इतना कमजोर न होता, तो सोना और सस्ता होता और ₹1 लाख के अंदर भी जा सकता था।
₹1 लाख के नीचे कब जा सकता है सोना
सिंघल ने शर्तें भी गिनाईं। सरकार 9 प्रतिशत ड्यूटी घटा दे, रुपया मजबूत होकर पुराने स्तर के आसपास आ जाए और कुछ सेंट्रल बैंक बिकवाली शुरू कर दें, तब ऐसा हो सकता है। रूस का उदाहरण भी दिया, जो लंबे युद्ध के खर्च के कारण सोना बेच रहा है।
पर मौजूदा हालात में वे ऐसा कोई पक्का परिदृश्य नहीं देखते। उनके मुताबिक ऊपर की तरफ ₹1.5 लाख से ऊपर की गुंजाइश भी नहीं दिखती। ₹1,65,000 का स्तर दोबारा देखना भी उन्हें मुश्किल लगता है, क्योंकि हर तरफ बिकवाली चल रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर उनका गणित है कि सोना $5,600 तक गया था। अगर 40 प्रतिशत करेक्शन हो, तो करीब $3,360 बनता है। भाव $3,400, $3,700 या $3,800 पर भी रह सकता है।
बड़े बैंकों की रिपोर्ट बनाम सिंघल की राय
एंकर ने चार बड़ी रिपोर्टों का जिक्र किया, जिनमें से तीन तेजी बताती हैं। सिंघल इन रिपोर्टों को “प्रोजेक्टेड” और भरोसे लायक नहीं मानते। उनका कहना है कि इनसे निवेशक भीड़ की तरह खरीदने लगते हैं और बुकिंग का फायदा कुछ ही लोगों को मिलता है। यह उनकी निजी राय है।
| संस्था / व्यक्ति | अनुमान |
|---|---|
| JP Morgan | 2026 के अंत तक करीब $6,000, 2027 में $6,300 प्रति औंस |
| Bank of America | $3,700 से $3,200 के बीच |
| Goldman Sachs | 2026 के अंत तक $4,600 से $4,900 |
| UBS | करीब $5,000 प्रति औंस |
| योगेश सिंघल | करीब $3,360 तक की गिरावट संभव |
सलाह: कौन खरीदे, कौन रुके
सिंघल की सलाह सीधी है। निवेशक सोने को तीन से पांच साल के नजरिए से ही खरीदें। ₹1,38,000 से ₹1,32,000 और ₹1,25,000 तक जहां भी भाव आए, थोड़ा-थोड़ा खरीदते रहें। घबराहट में बेचने की सलाह वे नहीं देते। उनके मुताबिक सोने की वैल्यू कभी जीरो नहीं होगी, क्योंकि यह करेंसी जैसा है।
चांदी पर उनका रुख साफ है। सोना-चांदी का रेशियो बिगड़ा हुआ है, इसलिए अभी चांदी में खरीदारी की राय नहीं है। वे शुरू से कह रहे हैं कि चांदी बेचकर सोना कन्वर्ट कर लेना चाहिए। चांदी में फंसे लोगों को दो से पांच साल इंतजार करना पड़ सकता है।
शादी-ब्याह या घरेलू जरूरत के लिए खरीदने वालों के लिए भाव कोई मुद्दा नहीं होता। सिंघल ने ज्वेलर्स को भी कहा कि जितना बेचें, उतना सोना उसी भाव पर बुक कर लें।
दिवाली के बाजार में लौटी रौनक
ज्वेलरी कारोबार के लिए सिंघल ने राहत की बात बताई। उनके मुताबिक पिछले 9 महीने बाजार में बहुत नरमी रही। पिछले 15-20 दिन से त्योहारी मांग लौटी है और नवंबर में शादियों का सीजन भी शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने की अपील निवेशकों के लिए वरदान साबित हुई, पर ज्वेलर होने के नाते उन्हें इसका खामियाजा 9 महीने भुगतना पड़ा। उन्हें उम्मीद है कि यह दिवाली पिछली दिवाली से बेहतर रहेगी।
विश्लेषण: एक्सपर्ट की सोच का निचोड़
दिलचस्प बात यह है कि सिंघल का तर्क सिर्फ सोने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक अगर लोग बैंक एफडी और शेयर बाजार से पैसा निकालकर सिर्फ सोना-चांदी में लगाते रहें, तो देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने संतुलन की वकालत की: शेयर बाजार, बैंक और सोना-चांदी, तीनों में निवेश।
इससे साफ होता है कि उनकी सलाह का केंद्र “भीड़ के पीछे न भागना” है। आम खरीदार के लिए इसका मतलब है कि FOMO में खरीदना और घबराहट में बेचना, दोनों से बचना चाहिए। हर चीज का भाव ऊपर-नीचे होता है, पर बजट और लक्ष्य अपना ही रखें। यह एक्सपर्ट की निजी राय है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर बात करें।
क्या है पृष्ठभूमि
पिछले तीन साल में सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी से सोना-चांदी में तेज उछाल आया। जनवरी में सोना और चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे और उसके बाद गिरावट शुरू हुई। अब दिवाली और शादियों के सीजन से ठीक पहले यही बहस है कि गिरावट रुकेगी या और बढ़ेगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- योगेश सिंघल के मुताबिक अगले तीन साल सोने में बड़ी तेजी नहीं दिखती, पर ₹1,38,000 से ₹1,25,000 के भाव लंबी अवधि के लिए अच्छे हैं।
- गिरावट की वजहें: प्रॉफिट बुकिंग, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड, कच्चा तेल, डॉलर इंडेक्स, कमजोर रुपया और 9% कस्टम ड्यूटी।
- ₹1 लाख के नीचे जाने के लिए ड्यूटी में कटौती, मजबूत रुपया या सेंट्रल बैंकों की बिकवाली जैसी शर्तें जरूरी, पर संभावना कम।
- चांदी में अभी खरीदारी की राय नहीं, बड़े बैंकों की तेजी वाली रिपोर्टों को सिंघल भरोसेमंद नहीं मानते।










