Rahul Gandhi Sangrur Rally में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को कांग्रेस ने पंजाब में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की। राहुल गांधी ने संगरूर की इंसाफ रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा, “मोदी जी, आप जहां चाहें, मैं बहस के लिए तैयार हूं। मेरे सामने बैठ जाइए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”
यह रैली मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में हुई। राहुल ने नशे, गैंगस्टरवाद, बेरोजगारी और अधूरे वादों पर AAP सरकार को घेरा। मंच पर उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे।
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‘मूसेवाला के पिता से मुलाकात और बदला हुआ भाषण’
दोपहर करीब 2:45 बजे राहुल ने बोलना शुरू किया। उन्होंने सबसे पहले लोगों से पूछा कि मूड कैसा है। फिर बताया कि भाषण की एक योजना पहले से तैयार थी, लेकिन कुछ देर पहले सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह उनसे मिलने आए। इसलिए वह भाषण का अंदाज बदल रहे हैं।
इसके बाद राहुल ने बलकौर सिंह को मंच पर बुलाया। अगर गौर करें तो रैली का भावनात्मक मोड़ यहीं से शुरू हुआ।
‘मोदी को बहस की चुनौती, ट्रम्प पर बड़ा आरोप’
राहुल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नियंत्रित करते हैं। उनके मुताबिक ट्रम्प 24 घंटे मोदी के सामने कहते रहते हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का संघर्ष रुकवाया था।
राहुल का आरोप है कि पांच मिनट में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर दस्तखत कर दिए गए। उनके शब्दों में, इसमें भारत के किसानों, उद्योगों और डेटा को अमेरिकी हितों के हवाले कर दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका में अडाणी के खिलाफ चल रहा मामला इसी समझौते के बाद ट्रम्प ने बंद करवा दिया।
राहुल ने कहा कि मोदी अरबपतियों और अडाणी के लिए काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी कांग्रेस नेताओं को देशद्रोही कहते हैं। इसी पर उन्होंने चुनौती दी कि मोदी कहीं भी बैठकर बहस कर लें। बीच में जज कोई भी बन सकता है, चाहे मोहन भागवत हों या अडाणी।
राहुल के मुताबिक प्रधानमंत्री आमने-सामने बहस नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में चर्चा की मांग पर विपक्ष का माइक बंद कर दिया जाता है।
‘राहुल गांधी के भाषण के 5 बड़े दावे’
| मुद्दा | राहुल गांधी का दावा |
|---|---|
| मान सरकार के वादे | किसानों को MSP और महिलाओं को चार साल तक आर्थिक सहायता का वादा किया, एक भी पूरा नहीं हुआ |
| सरकार कौन चला रहा | पंजाब सरकार की आधी लगाम अमित शाह और आधी अरविंद केजरीवाल के हाथ में है |
| कानून-व्यवस्था | जेलों में गैंगस्टर पाले जा रहे हैं |
| नशे पर केंद्र | शाह के 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने के वादे पर बोले कि तीन साल बाद शाह गृह मंत्री नहीं होंगे, यह उनका आकलन है |
| मुंद्रा पोर्ट | पोर्ट पर पकड़े गए नशे के मामले में केंद्र से पूछा कि क्या कार्रवाई हुई |
‘पंजाब को कैसी सरकार चाहिए: राहुल की अपील’
राहुल ने पंजाब के लोगों से कहा कि पंजाब को पंजाब की सरकार दीजिए, यानी कांग्रेस की सरकार। उनके मुताबिक ऐसी सरकार चुनिए जो नशे के खिलाफ लड़े, युवाओं को रोजगार दे, उद्योग बचाए और किसानों के साथ खड़ी रहे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनी तो पंजाब का मुख्यमंत्री ही पंजाब चलाएगा। न देश का गृह मंत्री और न दिल्ली का पूर्व मुख्यमंत्री।
राहुल ने याद दिलाया कि कभी पंजाब में छोटे और मध्यम उद्योगों का मजबूत आधार था। उनका तर्क था कि किसानों और उद्योगों को मजबूत किए बिना गैंगस्टरवाद और नशे के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती।
‘”यहां कत्ल करना फैशन बन गया”‘
राहुल ने कहा कि सिद्धू मूसेवाला के साथ जो हुआ, वह आज पंजाब में फैशन बन गया है। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक घटना नहीं, पंजाब की मौजूदा हालत का आईना है।
उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में उद्योग, फैक्ट्रियां और खेती मजबूत नहीं होंगे, रोजगार नहीं बनेगा। फिर नशा और गैंगस्टरवाद बढ़ेगा और सड़कों पर गोलियां चलेंगी। राहुल ने कहा कि उन्होंने बहुत पहले नशे का मुद्दा उठाया था, तब विपक्षियों ने कहा था कि राहुल को कुछ पता नहीं है।
राहुल ने मुख्यमंत्री पर भी निजी हमला किया। उन्होंने कहा कि जब वह लोकसभा में थे, तब मान उनके पास बैठकर चुटकुले सुनाते थे और सुबह 11 बजे उनके मुंह से शराब की बदबू आती थी। राहुल ने जोड़ा कि शराब पीना निजी मामला है, पर नशे के खिलाफ लड़ने वाला मुख्यमंत्री हर शाम नशा नहीं कर सकता। यह राहुल का आरोप है और इस पर मुख्यमंत्री की तरफ से कोई जवाब ट्रांसक्रिप्ट में नहीं है।
‘मूसेवाला की कहानी, राहुल की जुबानी’
दिलचस्प बात यह है कि राहुल ने मूसेवाला से पहली मुलाकात का किस्सा भी सुनाया। उनके मुताबिक मूसेवाला उनके कार्यालय आए थे। तब राहुल उन्हें जानते नहीं थे और उनके गाने भी नहीं सुने थे। कमरे में आए युवक के शरीर पर टैटू बने थे।
राहुल ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि वह अच्छा लड़का और म्यूजिशियन है, जो कांग्रेस में शामिल होना चाहता है। राहुल ने उसे प्रभावशाली, डायनामिक और टैलेंटेड युवा बताया।
उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने गाने सुने, खासकर “295”, तब उनकी गहराई समझ आई। राहुल का मानना है कि मूसेवाला देश के सबसे प्रतिभाशाली संगीतकारों में थे और राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभा सकते थे।
राहुल ने कहा कि उन्हें किसी ने नहीं बताया था कि मूसेवाला को खतरा है। उन्होंने सोचा था कि वह राजनीति में आ रहा है तो उसे राजनीतिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। राहुल के मुताबिक बाद में उसे धमकियां मिलने लगीं।
उनका आरोप है कि सबके सामने उसकी सुरक्षा हटा दी गई और दिनदहाड़े काली एसयूवी में आए हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी।
‘मंच पर कांग्रेस के दिग्गज: किसने क्या कहा’
| नेता | मुख्य बात |
|---|---|
| मल्लिकार्जुन खड़गे | “पंजाब जीतेंगे तो सारा भारत जीतेंगे।” AAP को भाजपा की बी टीम बताया और कहा कि गोवा-गुजरात में AAP ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया |
| सचिन पायलट | फरवरी में चुनाव है, AAP सरकार को जड़ से उखाड़कर कांग्रेस सरकार बनाएंगे |
| परगट सिंह | पंजाब को जंगलराज और पुलिस स्टेट बनाने का आरोप, 2029 में राहुल को PM बनते देखने की इच्छा |
| राजा वड़िंग | नशे के लिए AAP के साथ भाजपा और अकाली दल भी जिम्मेदार |
| चरणजीत सिंह चन्नी | AAP की उल्टी गिनती शुरू, कई नेता विदेश भाग चुके |
| प्रताप सिंह बाजवा | AAP का विकल्प कांग्रेस है, पंजाब के बॉर्डर तुरंत खोले जाएं |
| सुखजिंदर सिंह रंधावा | अमित शाह से सवाल: गुजरात और असम के गैंगस्टर पंजाब में कैसे बैठे हैं |
| सुखपाल सिंह खैहरा | डेमोग्राफिक बदलाव का मुद्दा उठाया, मेनिफेस्टो में बिल शामिल करने की बात कही |
‘खड़गे के तीखे हमले’
खड़गे ने कहा कि आज का दिन पंजाब के लिए बेहद शुभ है, क्योंकि प्रचार संगरूर से शुरू हो रहा है। उन्होंने मंच पर कांग्रेस की एकजुटता की तरफ इशारा करते हुए कहा, “यह आपकी एकता है और इसे बनाए रखने की जरूरत है।”
खड़गे ने पंजाब सरकार को भ्रष्ट बताया। उनका कहना था कि 60 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसी सरकार नहीं देखी। आरोप लगाया कि राज्य में जो वसूली होती है, उसका पैसा दिल्ली पहुंचता है।
उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान की रैली का भी जिक्र किया, जहां राहुल ने “वोट चोरी” का मुद्दा उठाया था। खड़गे ने केंद्र सरकार को वोट चोरों की सरकार कहा। RSS और भाजपा पर संस्थाओं को खत्म करने का आरोप भी लगाया।
‘जमीन के मुद्दे: मंडी से लेकर विदेश जाते बच्चे तक’
परगट सिंह ने कहा कि मंडियों में 25 प्रतिशत धान पड़ा है, मगर खरीद एजेंसियों ने खरीद बंद कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन नौजवानों के शव मुर्दाघर में पड़े हैं। उन्होंने पंजाब के डीजीपी को चेतावनी भी दी कि अगर किसी अफसर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को टेढ़ी नजर से देखा तो आंख नहीं रहने देंगे।
रंधावा ने चिंता जताई कि डर के कारण माता-पिता बच्चों को विदेश भेज रहे हैं। उनके शब्दों में, 10 साल बाद पंजाब में बुजुर्गों को कंधा देने वाला भी नहीं बचेगा। रंधावा ने मुख्यमंत्री पर विदेश से लौटते समय शराब की बोतलें मिलने और 50 हजार रुपए का चालान भरने का भी आरोप लगाया, जो उनका दावा है।
रैली से पहले राज कुमार वेरका ने कहा था कि पुलिस बसें रोक रही है और कार्यकर्ता बाहर फंसे हैं। यह भी उनका आरोप था।
‘रैली से कांग्रेस को क्या मिला और क्या बाकी’
देखा जाए तो राहुल का भाषण दो हिस्सों में बंटा था। एक तरफ दिल्ली का मुद्दा था: मोदी, ट्रम्प, अडाणी और व्यापार समझौता। दूसरी तरफ पंजाब का दर्द: नशा, गैंगस्टर, किसान और बेरोजगारी। इससे साफ होता है कि कांग्रेस एक साथ AAP और भाजपा, दोनों को निशाने पर रखकर चल रही है।
संगरूर का चुनाव भी सोच-समझकर किया गया लगता है। मालवा में पंजाब की 69 सीटें हैं और 2022 में कांग्रेस को यहां सिर्फ दो सीटें मिली थीं। मुख्यमंत्री के गृह जिले से शुरुआत करने का मतलब है कि पार्टी सीधे सत्ता के गढ़ में चुनौती देना चाहती है।
समझने वाली बात यह भी है कि मंच पर लगभग पूरी कांग्रेस एक साथ दिखी। वड़िंग, चन्नी, परगट, बाजवा और रंधावा, सब बोले। पर चन्नी के मंच पर आते ही समर्थकों ने नारेबाजी की। चन्नी प्रदेश प्रधान या 2027 के सीएम चेहरे की मांग पर अड़े थे, लेकिन हाईकमान ने उनकी बात नहीं मानी। यानी तस्वीर में एकता दिखी, पर पुरानी खींचतान की परछाईं भी मौजूद है।
राहुल का मूसेवाला वाला हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगा। पिता को मंच पर बुलाकर उन्होंने रैली को राजनीतिक भाषण से हटाकर एक भावनात्मक संदेश में बदल दिया। सवाल उठता है कि क्या यह भावना वोट में बदलेगी। इसका जवाब चुनाव के बाद ही मिलेगा, खासकर तब, जब AAP और भाजपा की तरफ से इन आरोपों पर जवाब आएगा।
आम पंजाबी परिवार के लिए इस रैली की बातें रोजमर्रा से जुड़ी हैं: बच्चों का रोजगार, खेती की कीमत, मंडी में धान की खरीद और सड़कों पर सुरक्षा। राहुल ने जो वादे और आरोप रखे हैं, उन्हें अब इन्हीं कसौटियों पर परखा जाएगा।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
संगरूर की यह रैली कांग्रेस के 2027 विधानसभा चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है। 28 फरवरी 2026 को बरनाला की रैली में राहुल ने नेताओं को गुटबाजी छोड़ने की चेतावनी दी थी, लेकिन पार्टी में चन्नी और वड़िंग के खेमे आमने-सामने आ गए। 5 सितंबर को सचिन पायलट प्रभारी बने और 2 अक्टूबर को वड़िंग के इस्तीफे के बाद परगट सिंह प्रदेश अध्यक्ष बने। 20 सितंबर से प्रस्तावित बस यात्रा रद्द हुई, और उसकी जगह यह रैली रखी गई।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- राहुल गांधी ने संगरूर की इंसाफ रैली में मोदी को बहस की चुनौती दी और कहा कि मोदी ट्रम्प से नियंत्रित होते हैं और अडाणी के लिए काम करते हैं।
- राहुल ने भगवंत मान सरकार पर MSP और महिलाओं को आर्थिक सहायता के वादे पूरे न करने और नशे, गैंगस्टरवाद पर नाकामी का आरोप लगाया।
- भाषण शुरू करने से पहले मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह से मुलाकात हुई। राहुल ने उन्हें मंच पर बुलाया और भाषण का अंदाज बदला।
- खड़गे, पायलट, परगट, वड़िंग, चन्नी, बाजवा और रंधावा ने भी AAP सरकार पर हमला बोला। AAP की तरफ से कोई जवाब ट्रांसक्रिप्ट में नहीं है।












